नेपाल में भूस्खलन से नदी रुकी, बिहार सचेत

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पश्चिम नेपाल में भूस्खलन के बाद हज़ारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है.
उधर, पटना से स्थानीय संवाददाता मनीष शांडिल्य ने बताया कि नेपाल में काली गंडक में बनी कृत्रिम झील को देखते हुए बिहार का आपदा प्रबंधन विभाग भी मुस्तैद हो गया है.
राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव व्यास जी ने बताया, ‘‘सिंचाई विभाग के आकलन के मुताबिक अभी इस झील से कोई बड़ा खतरा नहीं है. घबराने की बात नहीं है, फिर भी हम मुस्तैद हैं.’’
बैराज के फाटक खोले
काली गंडक नदी बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के वाल्मीकिनगर इलाके में भारत में प्रवेश करती है. नेपाल में नदी की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन भी चौकन्ना हो गया है.

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जिलाधिकारी लोकेश कुमार सिंह ने बीबीसी को फोन पर बताया कि जल-संसाधन विभाग से मिली सूचना के बाद एहतियातन वाल्मीकिनगर बैराज के सभी 36 फाटकों को खोल दिया गया है.
भूस्खलन के कारण म्यागदी ज़िले में काली गंडकी नदी रुक गई है, जिससे वहां एक गहरी झील बन गई है.
नेपाल के अधिकारियों का कहना है कि पानी का स्तर 200 मीटर तक चढ़ गया है.
अभी तक किसी के हताहत होने की ख़बर नहीं है, लेकिन मदद के लिए सैनिकों को क्षेत्र में भेजा गया है.
भूकंप के बाद भूस्खलन
नेपाल में 25 अप्रैल को आए विनाशकारी भूकंप के बाद बार-बार भूस्खलन हो रहा है.

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पिछले महीने आए 7.8 तीव्रता के भूकंप में नेपाल में आठ हज़ार से ज्यादा लोग मारे गए थे.
इसके बाद 12 मई को भी 7.3 तीव्रता के भूकंप से भी नेपाल में जान माल की हानि हुई थी.
ताज़ा भूस्खलन लगभग आधी रात को हुआ. गृह मंत्रालय के प्रवक्ता लक्ष्मी प्रसाद ढकाल ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, "हमने गांव वालों से सुरक्षित जगहों पर जाने को कहा है."
अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इस भूस्खलन और नदी रुकने के कारण नेपाल एक बड़े बिजली संयंत्र को नुक़सान हो सकता है.
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