एवरेस्ट पर बर्फीले तूफ़ान से जंग 'लाइव'

नेपाल में विनाशकारी भूकंप का असर दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर भी दिखा. भूकंप के बाद एवरेस्ट पर आए बर्फीले तूफान ने 18 लोगों की जान ले ली. वहां मौजूद रहे बीबीसी के थॉमस मार्टिनसन न सिर्फ प्रकृति के कोप और उससे लड़ने की मानवीय जद्दोजहद के गवाह बने बल्कि उन्होंने वहां से सीधी जानकारी भी दी.
प्रकृति से जंग
माउंट एवरेस्ट फतह करने निकली टीम कैंप 1 पर पहुंची थी कि तभी 7.8 तीव्रता के भूकंप ने पूरे इलाके को हिला दिया. इसके असर से बर्फ की दीवार सी खड़ी हो गई. बर्फीली चट्टानें एवरेस्ट के बेस कैंप पर आ गिरी.
लाइव रिपोर्टिंग
मार्टिनसन ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर सबसे बड़ी त्रासदी का ब्यौरा पेश किया. वो लगातार ट्वीट करते रहे और अपने और अपने साथियों के बारे में जानकारी देते रहे.

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मार्टिनसन ने ट्वीट किया, "मैं जिंदा हूं. मैं अपने साथियों के साथ जैसे ही कैंप 1 में पहुंचा भूकंप का झटका लगा."
उनका अगला ट्वीट था, "हम उसके बाद तीन तरफ से बर्फीले तूफान से घिर गए."

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अगले ट्वीट में मार्टिनसन ने जानकारी दी, ''शुक्र ये था कि जब बर्फीला तूफान टकाराया ये पाउडर बन चुका था. बाकी हिस्सों में टेंट जमीन से मिल चुका था. हम ठीक थे."

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वो 48 घंटे

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उन्होंने एक और ट्वीट किया, जिसमें तूफान से 48 घंटे तक जूझने की जानकारी दी गई थी. "बर्फीला तूफान अगले 48 घंटे तक बना रहा. हर 20-30 मिनट में इसका असर दिखा" इसके बाद भी वो लगातार पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते रहे. मार्टिनसन ने बताया कि तूफान के असर से उनका टेंट पूरी तरह तबाह हो गया. उन्हें अपनी किट का एक टुकड़ा पांच सौ मीटर दूर मिला.
खत्म हुई जंग
दिक्कतों का ये दौर घंटों के इंतज़ार के बाद खत्म हुआ. मार्टिनसन ने बताया कि वो दो दिन बाद कैंप से निकल सके.

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उन्होंने ट्विटर पर जानकरी दी, "हेलिकॉप्टर रविवार से उड़ान भरने लगे और हम सोमवार की सुबह वहां से निकल सके. हमारे तीन शेरपाओं की मौत हो गई"

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पूरे घटना क्रम का ब्योरा देते हुए उन्होंने एक और ट्वीट किया. जिसमें मार्टिनसन ने कहा कि पहाड़ पर चढ़ना हमेशा खतरनाक होता है, लेकिन बेस कैंप पर खतरा नही होना चाहिए था. ये प्रकृति का उसी तरह का कोप था, जैसा कि बाइबिल में बताया गया है.
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