गुब्बारे से उत्तर कोरिया पहुँची 'द इंटरव्यू'

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दक्षिण कोरिया के एक सामाजिक कार्यकर्ता का कहना है कि उसने विवादित फ़िल्म 'द इंटरव्यू' की सैकड़ों डीवीडी गुब्बारे में बांधकर उत्तर कोरिया की सीमा में पहुँचाई हैं.
फ़िल्म 2014 में रिलीज़ हुई सेथ रोजेन और इवान गोल्डबर्ग द्वारा निर्देशित इस फ़िल्म पर काफी विवाद हुआ था.
सामाजिक कार्यकर्ता ली-मिन-बॉक ने इस विवादास्पद फ़िल्म की हज़ारों डीवीडी जनवरी से अब तक चार बार गुब्बारों में बांधकर उत्तर कोरिया की सीमा में भेजी. हाल ही में उन्होंने शनिवार को डीवीडी गुब्बारे में बांधकर उड़ाईं.
फ़िल्म पर विवाद

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फ़िल्म 'द इंटरव्यू' उत्तर कोरिया के नेता किम-जोंग-उन की हत्या के लिए सीआईए के षडयंत्र की काल्पनिक कहानी है.
उत्तर कोरिया इस फ़िल्म से खफ़ा था. हैकिंग हमले और इसे दिखाने वाले सिनेमाघरों पर हमले की धमकियों के बाद सोनी ने इसे शुरुआत में रिलीज़ नहीं किया था.

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ली-मिन-बॉक ने कहा कि डीवीडी बांटने का उद्देश्य उत्तर कोरिया के लोगों को उनके शासक का असली चेहरा दिखाना है.
उन्होंने बताया कि वे इसी तरीक़े से हज़ारों डीवीडी और 10 लाख प्रचार पुस्तिकाएं उत्तर कोरिया के सीमाई इलाकों में भेज चुके हैं.
मक़सद
ली के मुताबिक वे चाहते हैं कि उत्तर कोरिया में लोग इसे देखकर किम-जोंग को भगवान नहीं, एक इंसान की तरह देखना शुरू करें और लोग अत्याचार और दुष्प्रचार के खिलाफ आवाज़ उठाएं.

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सोनी फिल्म्स की 'द इंटरव्यू' राजनीतिक व्यंग्य है और इसमें कॉमेडी का भी तड़का लगाया गया है, हालाँकि फ़िल्म विश्लेषकों ने इसे एक ढीली फ़िल्म क़रार दिया था.
उत्तर कोरिया में जिन लोगों के पास डीवीडी प्लेयर हैं और उनके इस फ़िल्म के देखने की जानकारी मिलने पर उन्हें सज़ा दिए जाने का प्रावधान है.

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दक्षिण कोरिया के सामाजिक कार्यकर्ता के इस कदम को उत्तर कोरिया ने एक उकसाने वाला क़दम बताकर रोकने के लिए कहा है.
वहीं, दक्षिण कोरिया का कहना है कि सामाजिक कार्यकर्ताओं को ऐसा करने का अधिकार है लेकिन सीमा पर रहने वाले लोगों के लिए यह खतरा साबित हो सकता है.
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