फ़लस्तीनी शरणार्थियों की स्थिति 'अमानवीय'

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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने दमिश्क के यारमुक में रह रहे फलस्तीनी शरणार्थियों के लिए मानवीय सहायता की अनुमति देने की मांग की है.
संयुक्त राष्ट्र के एक अधिकारी के अनुसार 18,000 शरणार्थियों की स्थिति 'अमानवीय' से भी बदतर है.
सेव दी चिल्ड्रन संस्था की प्रवक्ता का कहना है वहां सहायता पहुंचाना नामुमकिन है. अस्पतालों में दवाएं खत्म हो गई हैं और कामकाज ठप हो गया है.

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एक अप्रैल को इस शरणार्थी शिविर पर इस्लामिक स्टेट के हमले के बाद स्थिति और ख़राब हो गई है. इस लड़ाई की वजह से वहां 18,000 शरणार्थी फंसे हुए हैं.
सीरियाई सरकार का विरोध करने वाली फलीस्तीनी मिलिशिया और फ्री सीरियन आर्मी के लड़ाके आईएस चरमपंथियों के खिलाफ़ लड़ाई का नेतृत्व कर रहे हैं.
15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष जॉर्डन के राजदूत दीना कवर ने आम नागरिकों की सुरक्षा, मानवीय सहायता और लोगों की जान बचाने के लिए सहयोग देने की बात कही है.
संयुक्त राष्ट्र में फ़लस्तीनी राजदूत रियाद मंसूर का कहना है कि शरणार्थियों का बचाना ही उनकी सरकार की मुख्य प्राथमिकता है.
उन्होंने सदस्य देशों से इन शरणार्थियों को सीरिया में या बाहर कहीं और शरण की सुविधा मुहैया कराने की अपील की है.
इस बीच इस्लामिक स्टेट के चरमपंथी इलाके को अपने कब्ज़े में लेने की कोशिश कर रहे हैं और फलस्तीनी बंदूकधारियों के साथ संघर्ष जारी है.
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