अदन में हूती विद्रोही आगे बढ़े

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सऊदी अरब के नेतृत्व में लगातार हो रहे हवाई हमलों के बावजूद हूती विद्रोही यमन के अदन शहर में कुछ आगे बढ़ने में कामयाब हुए हैं.
राष्ट्रपति मंसूर हादी की सेना और विद्रोहियों के बीच लड़ाई भी तेज़ होती जा रही है.
इसे ध्यान में रखते हुए भारत और चीन जैसे देशों ने अपने नागरिकों को यमन से निकालने की कार्रवाई तेज़ कर दी है.
वहीं गठबंधन सेना ने रेडक्रॉस को यमन के नागरिकों की सहायता के लिए ज़रूरी चीज़ें विमान से लाने की अनुमति दे दी है.
रेडक्रॉस का कहना है कि उसे दो विमान ले जाने की अनुमति मिली है. एक विमान में दवाइयां और दूसरी ज़रूरी चीज़ें होंगीं. दूसरे विमान से सहायताकर्मियों को यमन पहुंचाया जाएगा.
रेडक्रॉस के प्रवक्ता सितारा ज़बीन ने बताया कि आज दोनों विमानों को राजधानी सना में उतारने की योजना है.
'हालात बहुत ख़राब'

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शनिवार को रेडक्रॉस ने अदन शहर में 24 घंटे के लिए युद्ध विराम की अपील की थी और कहा था कि अगर ऐसा नहीं होता तो बड़ी संख्या में नागरिक मारे जाएंगे.
रेडक्रॉस की अधिकारी मेरी क्लेयर फ़ेगेली ने बीबीसी को बताया कि शहर के हालात भयानक हैं.
उन्होंने कहा, ''गलियों में लाशों के ढेर लगना शुरू हो गए हैं. इस हफ्ते यमन रेड क्रीसेंट के तीन स्वयंसेवक मारे गए. लोग खाने की चीजें लेने बाहर नहीं निकल सकते. हम जानते हैं कि शहर में पानी की कमी है क्योंकि पानी के पाइपों को नुकसान पहुंचा है. हमसे जितना हो सकता है, हम करने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन हालात बहुत ख़राब हैं.''
समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार, विद्रोही लड़ाके शहर में आगे बढ़ने में कामयाब हुए हैं और उन्होंने रिहाइशी इलाकों में बमबारी की है. कई इमारतों में आग भी लगाई गई है.
हताहतों की संख्या बढ़ी

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स्वास्थ्य विभाग के निदेशक अल खेदर लासुआर के मुताबिक, अदन में 26 मार्च से अब तक 185 लोग मारे गए हैं और 1,282 लोग घायल हुए हैं.
इसमें विद्रोहियों और हवाई हमलों में मारे गए लोग शामिल नहीं हैं.
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि पिछले दो हफ्तों में 500 लोग मारे गए हैं.
तमाम देशों ने यमन के हालात देखते हुए अपने नागरिकों को वहां से वापस लाने की कारवाई तेज़ कर दी है.

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भारत के अलावा पाकिस्तान भी अपने नागरिकों को यमन से लगातार निकाल रहा है.
रूस, चीन, इंडोनेशिया, मिस्र और सूडान ने भी अपने नागरिकों को यमन से निकालने के प्रयास तेज़ कर दिए हैं.
हूती विद्रोहियों का कहना है कि वे राष्ट्रपति मंसूर हादी की सरकार को हटाना चाहते हैं जो उनके मुताबिक भ्रष्ट है. विद्रोहियों को सेना के उस धड़े का समर्थन भी हासिल है जो पूर्व राष्ट्रपति अली अब्दुल्लाह सालेह का वफादार है.
दूसरी सउदी अरब का कहना है कि उसका प्रतिद्वंदी ईरान हूती विद्रोहियों की मदद कर रहा है. लेकिन ईरान इससे इंकार करता रहा है.
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