मिस्र की रुकी अमरीकी सैन्य मदद फिर बहाल

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राष्ट्रपति ओबामा ने मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फ़तह अल सीसी से कहा है कि अमरीका मिस्र के लिए सैन्य मदद बहाल कर रहा है.
व्हाइट हाऊस के मुताबिक मिस्र को एफ़-16 विमान, मिसाइलें और टैंक मिस्र को दिए जाएंगे.
2013 में चुने गए राष्ट्रपति मोहम्मद मोर्सी को सत्ता से बेदख़ल किए जाने के बाद अमरीका ने मिस्र को दी जाने वाली सैन्य मदद रोक दी थी.
लेकिन अब मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फ़तह अल सीसी और अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के बीच फ़ोन पर हुई बातचीत में ओबामा ने कहा है कि सैन्य सहायता दोनों देशों की राष्ट्रीय सुरक्षा बनाए रखने और चरमपंथी के ख़िलाफ़ लड़ाई में मदद करेगी.
ग़़ौरतलब है कि मिस्र यमन में हूती विद्रोहियों के ख़िलाफ़ हवाई हमले कर रहे अरब गठबंधन में शामिल है और लीबिया में चरमपंथियों की चुनौती से भी जूझ रहा है.
अमरीकी सरकार मिस्र में मानवाधिकार हनन के मामलों पर नाख़ुश होने के बावजूद यह सैन्य मदद बहाल कर रही है.
यमन में हमले तेज़

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उधर लगातार छठे दिन सऊदी अरब के नेतृत्व में यमन में हूती विद्रोहियों पर हवाई हमले जारी रहे. राजधानी सना में आज अब तक के सबसे बड़े हमले किए गए.
गठबंधन हूती विद्रोहियों और उनके सहयोगियों को दक्षिणी शहर अदन पर क़ब्ज़ा करने से रोकने के लिए हमले तेज़ कर रहा है.
वहीं संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि हमलों में आम नागरिक सबसे ज़्यादा प्रभावित हो रहे हैं.
यूनीसेफ़ की यमन प्रतिनिधि जूलियन हार्नीस ने कहा, "देश में ताज़ा बमबारी में और देश के सभी हिस्सों में जारी लड़ाई में, ख़ासकर अदन में, नागरिक और बच्चे मारे जा रहे हैं. पिछले दिनों में हमारी जानकारी में कम से कम 62 बच्चे मारे गए है और तीस घायल हुए हैं. वास्तव में तादाद इससे भी ज़्यादा है. सना एक बड़ा शहर है और वहां निशाना बनाए जा रहे सैन्य अड्डे नागरिक आबादी के बीच हैं."

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पाकिस्तान सऊदी के साथ
इसी बीच पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ के नेतृत्व में पाकिस्तान का एक प्रतिनिधिमंडल सऊदी अरब पहुँच गया है. पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल सऊदी अरब से यमन के हालात पर बातचीत करेगा.
पाकिस्तान का यह प्रतिनिधिमंडल दो दिन तक सऊदी अरब में रहेगा.
पाकिस्तानी सरकार सऊदी अरब को ख़तरा होने की स्थिति में हर संभव मदद देने का ऐलान कर चुकी है. हालांकि पाकिस्तान ने वहाँ सेना भेजने का फ़ैसला अभी नहीं किया है.
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