मोहनजोदड़ो: नष्ट होता दुनिया का 'सबसे पुराना' शहर

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    • Author, राज़िया इकबाल
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

दुनिया की सबसे पुरानी नगरीय व्यवस्था माने जाने वाले प्राचीन शहर मोहनजोदड़ो पर नष्ट होने का ख़तरा मंडरा रहा है.

पाकिस्तान के सिंध प्रात में सिंधु नदी के किनारे बसे क़रीब चार हज़ार साल पुराने इस शहर की खोज अभी महज़ 100 साल पहले ही हुई थी.

यह दुनिया के प्रचीनतम सभ्यताओं में से एक सिंधु घाटी सभ्यता का एक प्रमुख शहर रहा है. मोहनजोदड़ो का मतलब होता है 'मुर्दों का टीला.'

मोहनजोदड़ो योजनाबद्ध तरीके से बनाया गया एक शानदार शहर था जिसमें अविश्वसनीय तरीके से सारी सुख-सुविधाएं मौजूद थीं. यहां बने घरों में पक्की ईंटों से बने स्नानघर और शौचालय थे.

इसमें जल निकासी के लिए नाले बने हुए थे जिसे ईंटो से ढका गया था. ये नाले सड़क के बीच से गुज़रते थे.

अद्भुत शहर

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मोहनजोदड़ो से मिली कई बहुमूल्य चीज़ों में जो एक चीज मेरे दिमाग में रह जाती है वो है 10 सेंटीमीटर ऊंची एक लड़की की कांसे की मूर्ति.

बनी-संवरी, कमर पर हाथ रखी लड़की की यह मूर्ति सिर्फ सिंधु सभ्यता घाटी के लोगों का धातुकर्म ही नहीं दर्शाती है बल्कि उस वक़्त के कला, समाज और साथ ही साथ महिलाओं का प्रतिनिधित्व करती है.

मोहनजोदड़ो के पुरातात्विक महत्व को देखते हुए यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर की सूची में भी रखा है.

लेकिन मैं इसकी हालात देखकर काफ़ी निराश हुई. पर्यटन बढ़ाने की ओर सरकार का ध्यान नहीं है. अधिकारी सुरक्षा और चरमपंथ को लेकर अधिक चिंतित हैं.

मैं जब यहां घूम रही थी तो उस वक्त मुश्किल से 20-30 पर्यटक ही यहां रहे होंगे.

हम यहां स्थित छोटे से संग्राहलय में गए जिसमें काफी कम रोशनी थी.

संग्रहालय के बाहर नाचती हुई लड़की की मूर्ति रखी थी लेकिन वो असली नहीं थी. असली अब दिल्ली में रखी हुई है.

कारण

मोहनजोदड़ो

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इस शहर में घूमना कई मायनों में एक अद्भुत अहसास था. ईंट की बनी हुई विशाल संरचना और साफ तौर पर सड़कों को पहचाना जा सकता था.

माना जाता है कि सिंधु घाटी सभ्यता के इस शहर में 35,000 लोग रहा करते थे. गौरतलब है कि इसके छोटे से हिस्से की ही खुदाई की गई है.

इसके बड़े हिस्से को अब आप नष्ट होते हुए देख सकते हैं. दीवारें अपने आधार से खिसक रही हैं.

भूमिगत जल में खारापन होने की वजह से ईंटों को नुकसान हो रहा है जिसकी वजह से दिवारे गिर रही हैं.

गिरने से पहले हज़ारों साल से ये ईंटे बची हुई थी. लेकिन आज भी यह एक असाधारण स्थल है.

अस्तित्व

20 रुपए का नोट, पाकिस्तान

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इमेज कैप्शन, मुअनजोदड़ो के सम्मान में पाकिस्तान सरकार ने 20 रुपए का नोट जारी किया हुआ है.

जिस दिन मैं मोहनजोदड़ो गई थी उस दिन कोई गाइड वहां मौजूद नहीं था. वहां इस स्थल से जुड़ा ना कोई पोस्टकार्ड था, ना कोई स्मारिका और ना ही कोई किताब ही बिक रही थी.

बस दो बंदूकधारी सुरक्षा अधिकारी मौजूद थे जिन्हें लगता था सिर्फ विदेशी पर्यटकों के पासपोर्ट से मतलब था.

मैंने अपने साथ वालों को कहते सुना कि कुछ पुरातत्वविदों का मानना है कि दो दशक में यह जगह अस्तित्व में नहीं रहेगी.

मैंने सिंधु सभ्यता घाटी से नष्ट होने के बारे में नरसंहार, बाढ़ और बीमारी जैसे कई कारण सुने हैं लेकिन आज यह लापरवाही और ध्यान नहीं देने जैसे साधारण कारणों से बर्बाद हो रही है.

अगले साल मोहनजोदड़ो पर एक फ़िल्म रिलीज़ होने वाली है तो शायद इस बहाने ही कही इस प्राचीन शहर की तरफ कुछ ध्यान जाए.

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