लिंक्ड इन के दौर में भी कैंपस प्लेसमेंट अहम

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- Author, एलिज़ाबेथ गारोन
- पदनाम, बीबीसी कैपिटल
लिंक्ड इन और ज़िंग जैसी साइट्स के आने से अब प्रोफ़ेशनल लोग अपना नेटवर्क बढ़ा सकते हैं और नौकरी के नए अवसर ऑनलाइन खोज सकते हैं.
तो क्या अब जॉब फ़ेयर यानी कैंपस इंटरव्यू या प्लेसमेंट इंटरव्यू के ज़रिए नौकरी पाना पुरानी बात हो चुकी है?
विभिन्न विशेषज्ञों की राय अलग-अलग है, लेकिन कई जॉब एक्सपर्ट मानते हैं कि एशिया में भारत, जापान सहित अन्य देशों में इनकी अहमियत को कम करके नहीं आंकना चाहिए.
एक्सपर्ट मानते हैं कि कैंपस इंटरव्यू और प्लेसमेंट्स के ज़रिए ख़ासी संख्या में युवा प्रोफ़ेशनल्स को बड़ी कंपनियों में नौकरी पाने के अवसर मिल रहे हैं और उन्हें इनकों गंभीरता से लेना चाहिए.
1990 के दशक तक तो वो ज़माना था जब नई नौकरियों की तलाश में जॉब फ़ेयर में लोग अपने रेज़्यूमे और निजी बिजनेस कार्ड लेकर पहुंचते थे और फ़ेस-टू-फ़ेस इंटरव्यू में नियोक्ता को इंप्रेस करने की कोशिश करते थे.
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<link type="page"><caption> बीबीसी कैपिटल</caption><url href="http://www.bbc.com/capital" platform="highweb"/></link> ने कॉलम करियर कोच के लिए दुनिया के अलग अलग हिस्सों से विशेषज्ञों से आज के दौर में जॉब फ़ेयर की अहमियत पूछी.
बीबीसी कैपिटल ने पाया कि विशेषज्ञ करियर के किसी भी मोड़ पर और विशेष देश को ध्यान में रखते हुए, नौकरी ऑनलाइन खोजने के बाद जॉब फ़ेयर को गंभीरता से लेने की सलाह देते हैं.
स्टीवन येओंग, सिंगापुर की हॉफ़ कंसल्टिंग के नियोक्ता

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एशिया में जॉब फ़ेयर न केवल मौजूद है, बल्कि अच्छा कर रहा है. एशिया के कई हिस्सों में फ्रेशर्स के लिए करियर फ़ेयर काफी लोकप्रिय हैं और एंट्री लेवल पर ज्यादातर नौकरियां जॉब फ़ेयर के जरिए ही मिलती हैं.
एमबीए के स्तर पर जॉब फ़ेयर में नौकरी पाने की ज्यादा गुंजाइश होती है. भारत और जापान में सबसे ज्यादा जॉब फ़ेयर लगते हैं.
बैंक जैसी कई बड़ी संस्थाओं में कैंपस से नियुक्ति के लिए अलग से विभाग होता है. कंपनियां जॉब फ़ेयर में अपने कारपोरेट ब्रांड को भी प्रमोट करते हैं.
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कई बार ऐसा भी होता है कि फर्म्स के पास फ्रेशर को देने की लिए नौकरियां नहीं होती, पर वे शीर्ष एशियाई यूनिवर्सिटीज में कैंपस सिलेक्शन के लिए पहुंचते हैं, जिससे उनकी ब्रांडिंग होती है.
हालांकि आने वाले दिनों में ऑनलाइन जॉब फ़ेयरशुरू भी शुरू हो सकते हैं क्योंकि उसमें समय और पैसे दोनों की बचत होगी और तकनीकी में माहिर युवाओं की दिलचस्पी भी ज्यादा होगी.
अने हुब्बन, क्रिएटिव टैलेंट नियोक्ता, न्यूयार्क सिटी

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इसमें सुधार की जरूरत है. करियर फ़ेयर उन लोगों के लिए काफी उपयोगी है जो अपनी इंटरव्यू स्किल में सुधार करना चाहते हैं.
जब बूथ पर काफी लोगों की भीड़ हो और इंटरव्यू लेने वाले का भी ध्यान भटक रहा हो, तो आप अपना फोकस किस तरह से कायम रख सकते हैं, इसका अभ्यास जॉब फ़ेयर के दौरान होता है.
STY37616675ख़ुद को भरोसेमंद साबित करने के 4 नुस्ख़ेख़ुद को भरोसेमंद साबित करने के 4 नुस्ख़ेकंपनी, कर्मचारी, आप, हम, दोस्त, रिश्तेदार भरोसा जीतना चाहते हैं. लेकिन कैसे?2015-03-03T20:04:24+05:302015-03-12T12:54:25+05:302015-03-12T12:57:05+05:302015-03-12T13:56:25+05:30PUBLISHEDhitopcat2
आप अपने हाथ मिलाने के स्टाइल, आंखों से संपर्क साधते हुए, आवाज़ और एनर्जी लेवल पर काम कर सकते हैं.
लाइव प्रस्तुति देने का इससे बेहतर दूसरा उदाहरण नहीं हो सकता.
एडवर्ड डालासा, लंदन बिज़नेस स्कूल के एमर्जिंग मार्केट्स मैनेजर

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ये पहले से मज़बूत हुआ है. लंदन बिज़नेस स्कूल में मैंने देखा है कि कैंपस में नियुक्ति के लिए कॉर्पोरेशन और छात्रों में काफी उत्साह रहता है.
प्रत्येक टर्म के बाद 30 से ज्यादा कंपनियां कैंपस सिलेक्शन के लिए पहुंचती हैं.
हालांकि कंपनियां इस दौरान छात्रों से काल्पनिक प्रिजेंटेशन देने की मांग करती हैं. लेकिन नौकरी हासिल करने में व्यक्तिगत प्रस्तुति की अहम भूमिका होती है.
नियोक्ता और छात्र दोनों ये बताते हैं कि आपस में बातचीत सबसे महत्वपूर्ण होती है. सक्रिय भागीदारी से कंपनियों और उम्मीदवारों, दोनों के लिए ये अनुभव महत्वपूर्ण होता है.
STY37594421कब योग्यता कम बताने में समझदारी?कब योग्यता कम बताने में समझदारी?आप किसी नौकरी के लिए ओवर-क्वालिफ़ायड करार दिए तो क्या करेंगे?2015-03-02T17:46:44+05:302015-03-04T07:30:38+05:302015-03-04T07:30:38+05:302015-03-04T07:30:38+05:30PUBLISHEDhitopcat2
स्कूल की कोशिश होती है कि वो अपने छात्रों को नियोक्ता कंपनियों के पास अच्छे ढंग से पेश करे.
लंदन बिज़नेस स्कूल हर साल 16 करियर ट्रैक का आयोजन करता है, जिसमें छात्रों का समूह अपने संबंधित क्षेत्र की कंपनियों का दौरा करता है.
उदाहरण के लिए जिनकी दिलचस्पी स्वास्थ्य सेवा में होती है वो स्विटजरलैंड जाते हैं और जिनकी दिलचस्पी तकनीक में होती है वो सिलिकॉन वैली जाते हैं.
जॉर्ज स्टैजमान, कैनेडी एक्ज़ीक्यूटिव सर्च के मैनेजिंग डायरेक्टर

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अब जॉब फ़ेयर का महत्व नहीं है. पेरिस में 2014 में उम्मीदवारों की तलाश के बाद मैंने तय किया मैं ऐसे मेलों में जल्दी नहीं जाऊंगा.
20 उम्मीदवार नियोक्ताओं के सामने खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे. ज्यादा संख्या होने का ये मतलब नहीं कि उनमें उस पॉजिशन के लिए काबिल उम्मीदवार मौजूद था.
तब भी ऐसा ही होता है जब हम नौकरी देने का विज्ञापन देते हैं. तब 95 फ़ीसदी उम्मीदवार ऐसे होते हैं जिनकी हमें तलाश नहीं होती है.
सोशल नेटवर्किंग ने जॉब फ़ेयर के महत्व को कम कर दिया है. सोशल मीडिया ने अब नेटवर्क की परिभाषा बदल दी है. अब 80 फ़ीसदी संभावना है कि आपको अगली नौकरी नेटवर्किंग से मिले.
हम जॉब फ़ेयर की जगह लिंक्ड इन से कनेक्ट हो रहे उम्मीदवारों को तरजीह देते हैं. व्यक्तिगत मीटिंग की अपनी अहमियत है, पर आवेदन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद.
जब तक आप हाथ नहीं मिलाएंगे, कोई क्लासिकल जॉब आपको नहीं मिल सकती है और ना ही कॉन्ट्रेक्ट मिलता है. अब नौकरी के लिए पहली बार संपर्क करने का तौर-तरीका बदल गया है.
एंथनी कुर्लो, सीईओ आईटी रेक्रूटिंग

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सूचना तकनीक के लिए जॉब फ़ेयर पुराना पड़ चुका है. आईटी के क्षेत्र में नौकरी की तलाश की प्रक्रिया में पिछले कुछ सालों में काफी बदलाव हुआ है.
कुर्लो ने अपने ईमेल के ज़रिए कहा है कि आज की अर्थव्यवस्था में हमारे क्लाइंट के लिए नियोक्ता, संभावित उम्मीदवार वेबसाइट्स या फिर सोशल मीडिया पर मौजूद हैं.
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इसलिए अब करियर फ़ेयर की जरूरत नहीं रह गई है. करियर फ़ेयर में टाइम खर्च करने की बजाए लिंक्ड इन पर समय लगाएँ.
हकीकत यही है कि ज्यादातर कंपनियां लिंक्डइन पेज पर उम्मीदवार का प्रोफ़ाइल चेक किए बिना इंटरव्यू के लिए ही नहीं बुलाते हैं.
डेविडसन यंग, करियर एंड लीडरशिप कोच, सिलिकन वैली
तैयारी के साथ जाइए, अनुभव हासिल कीजिए.

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नौकरी पाने की चाह रखने वाले ज्यादातर आवदेक जॉब फ़ेयर का सही इस्तेमाल नहीं करते हैं. वे बिना किसी तैयारी के साथ जाते हैं.
कंपनियों और अवसरों के बारे में रिसर्च करनी होती है. पको उसी के मुताबिक सूचनाएं हासिल करनी होती हैं. आपको अपना पहला इंप्रेशन तैयारी के साथ देना चाहिए.
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हमेशा बिज़नेस कार्ड मांगना चाहिए या फिर लिंक्ड इन जैसे ऐप के ज़रिए तत्काल कनेक्ट करना चाहिए.
मेरे ख्याल से नए छात्रों और ग्रेजुएट्स को ऑनलाइन दुनिया की जगह जॉब फ़ेयर में जाना चाहिए, ताकि उन्हें अपरिचित लोगों से संवाद करने का अनुभव हासिल हो.
रेगिना रेनहर्ट, एक्जीक्यूटिव करियर कोच, स्विटजरलैंड

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अभी भी कुछ लोगों के लिए इसकी अहमियत है. स्विटजरलैंड में जॉब फ़ेयर अभी भी पापुलर है. खासकर यूनिवर्सिटी छात्रों के बीच और विदेशी पेशेवरों के बीच.
हालांकि अनुभवी पेशेवरों, स्थानीय नौकरी तलाशने वालों, नियोक्ता एजेंसियों में सोशल मीडिया और मार्केटिंग का असर आम है.
सोशल मीडिया और इंटरनेट पर नौकरियों की जानकारी दी जाती है. इसके बाद व्यक्तिगत मुलाकात की अहम भूमिका होती है. अधिकतर इंटरव्यू फ़ेस-टू-फ़ेस होते हैं, न कि फोन के ज़रिए या फिर ऑनलाइन.
<italic><bold>अंग्रेज़ी में <link type="page"><caption> मूल लेख</caption><url href="http://www.bbc.com/capital/story/20150313-meet-in-person-really" platform="highweb"/></link> यहाँ पढ़ें, जो <link type="page"><caption> बीबीसी कैपिटल</caption><url href="http://www.bbc.com/capital" platform="highweb"/></link> पर उपलब्ध है.</bold></italic>
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