लापता विमान और एक पत्नी की आस

आठ मार्च को मलेशियाई एयरलाइंस एमएच 370 को लापता हुए एक साल हो गए.
मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर से बीजिंग की उड़ान भरने वाला ये विमान रास्ते में ग़ायब हो गया था.
विमान में सवार लोगों के परिवार वालों में से कुछ को अब भी चमत्कार की उम्मीद है.
इन्हीं में से एक हैं चेन लिपिंग.
उनके पति कुआलालंपुर से एमएच 370 विमान में बैठे थे.
उन्होंने बीबीसी को अपने माइक्रोब्लॉग के ज़रिए बताया कि कैसे अपने पति का चार दिन का इंतज़ार एक साल में तब्दील हो गया.
उन्होंने सिलसिलेवार तरीके से लिखा कि विमान के लापता होने के बाद उन पर क्या-क्या गुज़रा?
चेन लिपिंग का ब्लॉग
सात मार्च 2014 को रात 11:18 बजे वीडियो कॉल के ज़रिए आखिरी बार मेरी मेरे पति से बातचीत हुई. उन्होंने मुझे बताया कि उनका सिक्योरिटी चेक हो गया है और अब वे विमान में बैठने के लिए इंतज़ार कर रहे हैं.
उन्होंने मुझसे जल्दी सोने के लिए कहा. साथ ही यह भी कहा कि यदि मुझे अकेले सोने में डर लगता है तो लाइटें जली रहने दूं.
विमान खोने के एक हफ्ते बाद

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14 मार्च, 2014 : मैं पूरी दुनिया से अपील करना चाहती हूं कि हमारे परिवारजनों का पता लगाने में हमारी मदद करें. यह मेरे दो बच्चों की पुकार है. यह एक हताश मां की चीख है. हम मलेशियन एयरलाइंस से अपने परिवारजनों को लौटाने के लिए और सरकार से जवाबदेही के लिए कह रहे हैं.
अब मुझे रात को डर लगने लग गया था. हर तरफ से हर तरह की खबरें आ रहीं थीं. मैं बहुत परेशान हो गई. मुझे भूख नहीं लगती और बहुत मुश्किल से सो पाती हूं.
अप्रैल 2014

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25 अप्रैल: विमान को खोए हुए 49 दिन हो गए हैं. चीन की सरकार ने पूरा दिन मलेशियन दूतावास की ओर जाने वाला हर रास्ता बंद कर दिया.
आखिरकार, दूतावास से कोई निकलकर आया. उसने कहा- मैं नहीं जानता कि आज रात मैं सो पाउंगा. हमें नहीं पता कि हमारे परिवारजन जिंदा हैं. यह दुख की घड़ी है. मैं विश्व से मदद की गुहार लगाता हूं.
27 अप्रैल: हम मजबूर हैं इसलिए हर दिन रो कर गुजार रहे हैं. अब तो मीडिया को भी ज़्यादा खबरें देने पर रोक लगा दी गई है. हम और मजबूर महसूस करते हैं और ज़्यादा डर लगता है.
पहले मुझे षडयंत्र के सिद्धांत पर विश्वास नहीं हुआ. लेकिन आखिर इतना बड़ा विमान इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया के रडार पर ज़रूर दिखना चाहिए था.
लेकिन किसी देश ने यह स्वीकार नहीं किया कि उसने यह विमान देखा है.
वे लोग सच क्यों छुपा रहे हैं? क्यों वे शुरुआत से लेकर आखिर तक के आंकड़े नहीं बता रहे? उन्होंने जो किया इससे मुझे अब षडयंत्र के सिद्धांत पर विश्वास होने लगा है.

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मई 2014
मई में मलेशिया एयरलाइंस ने सभी रिश्तेदारों को दिए बीजिंग के होटलों को खाली करने के निर्देश दिए, साथ ही ज़मीनी और हवाई खोज को भी बंद कर दिया.
हताश परिवारजन घर जाने को मजबूर हो गए. हमें जो उम्मीद थी उसे भी वो तोड़ने पर लगे हुए थे. प्लीज प्रिय पतिदेव अब और अकेला मत रहने दीजिए और सुरक्षित घर आ जाइए. प्लीज घर आ जाइए.
सात मई : बहुत से लोग यह सोचते होंगे कि हमने घर जाने के लिए मलेशियन एयरलाइंस से पैसे लिए. लेकिन मैं यह बताना चाहती हूं कि हमने नहीं लिए.
मलेशिया कुछ चीजों को छुपा रहा है. इसलिए वह असल आंकड़े नहीं बताना चाहता. यहां तक कि जो रिकॉर्ड उन्होंने दिखाए वो भी संपादित किए हुए हैं. उन्होंने ऐसा क्यों किया? हमें उनका पैसा नहीं चाहिए, हमें सिर्फ हमारा परिवार चाहिए.
मलेशियन एयरलाइंस ने हमारी कोई मदद नहीं कि. सिवाय यह बताने के कि उन्हें नहीं पता कि क्या हुआ.

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मैं उम्मीद करती हूं कि मलेशियन अधिकारी जानकारी को पारदर्शी बनाएं ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसमें शामिल किया जा सके.
मैं उम्मीद करती हूं कि जो लोग इस बारे में सच जानते हैं वे जितना जल्दी हो सके इस बारे में सार्वजनिक घोषणा करें.
27 मई: दबाव के चलते मलेशिया ने उड़ान का रॉ डेटा जारी कर दिया.
इस सबके लिए सबसे ज़्यादा ज़िम्मेदार मलेशियन एयरलाइंस है. मलेशिया की सरकार शुरुआत से ही सच को छुपा रही है. अब मुझे उस पर भरोसा नहीं बचा है.
जून 2014
हर दिन एक नई शुरुआत होती है. मैं उम्मीद करती हूं कि हर दिन ख़ूबसूरत हो और कोई चमत्कार हो. मैं अपने सभी दोस्तों का धन्यवाद करती हूं जिन्होंने मेरे ट्वीट्स पर रीट्विट किया. मैं पूरी तरह मानती हूं कि चमत्कार होगा.
जनवरी, 2015
मलेशिया ने आधिकारिक तौर पर इसकी घोषणा कर दी कि वह एक हादसा था जिसमें कोई नहीं बचा.

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इस हादसे को दुर्घटना की घोषणा करने से हमारा दुख और बढ़ा गया.
अपने विश्लेषण और अनुमान के आधार पर यह कह देना कि विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया है, एक अमानवीय गैर ज़िम्मेदाराना और अनुचित कृत्य है.
उन्होंने बिना सबूत के इस प्रकार की घोषणा की जिससे हमें बहुत दुख पहुंचा है. हमें लगा रहा है कि हमारे साथ अन्याय हुआ है. हमें पूरा हक है यह जानने का कि आखिर विमान के साथ क्या हुआ.

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मैं उम्मीद करती हूं कि एयरलाइंस अपनी सभी ऐसी गोषणाओं को वापस ले ले और कहे कि हमारे पास ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह पता चल सके कि विमान के सभी यात्री मारे जा चुके हैं.
मैं आज भी काम नहीं कर पाती. अपना ज़्यादातर समय बिस्तर पर बिताती हूं. ज़्यादा से ज़्यादा सोने की कोशिश करती हूं ताकि अधिक सोचने से बच सकूं और अपने पति के सपने देख सकूं.
मैं हर रोज़ पीड़ा झेल रही हूं.
बिस्तर पर पर पड़े हुए और अपने पति का फोटो देखते हुए मेरे दिमाग में बस एक सवाल आता है कि तुम कब आओगे. हमारे बेटे और मैं तुम्हें बहुत याद करते हैं.
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