हवाई जहाज़ को देखते ही डर लगता है..

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साल भर पहले ग़ायब हुए मलेशियाई विमान एमएच 370 के यात्रियों के परिवार वालों ने सरकार की ओर से जारी रिपोर्ट को सिरे से ख़ारिज कर दिया है.
रिपोर्ट में विमान के लापता होने के बारे में जानकारी देते हुए कहा गया है कि विमान में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं थी. विमान के लोकेटर बीकन की बैटरी उसके लापता होने से एक साल पहले ही ख़त्म हो चुकी थी. इस वजह से शुरुआती जांच में परेशानी आई.
मुसाफ़िरों के रिश्तेदारों ने इस रिपोर्ट को 'बेकार' क़रार दिया है.
लापता होने की बरसी

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8 मार्च 2014 को कुआलालम्पुर से बीजिंग के लिए उड़ान भरने के कुछ देर बाद इस विमान का संपर्क कंट्रोल रूम से कट गया था और इसका आज तक कुछ पता नहीं चला है.
इस घटना की पहली बरसी पर बयान जारी कर मलेशिया, चीन और ऑस्ट्रेलिया की सरकारों ने भी 'ठोस सबूत' मिलने तक खोज अभियान चलाते रहने का एेलान किया है.
हादसा के वक़्त उड़ान एमएच 370 में चालक दल के 12 सदस्यों के अलावा 14 देशों के 227 यात्री सवार थे. इनमें सबसे ज़्यादा चीनी नागरिक थे.
भूल नहीं पाते

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पिछले एक साल से किसी जानकारी की उम्मीद में बैठे उन यात्रियों के परिवार वालों का कहना है कि वे इस दिन को याद नहीं करना चाहते, लेकिन भूलेंगे भी नहीं.
मलेशिया के शहर पेटालिंग जाया में रहने वाले भारतीय मूल के जी सुब्रमण्यम ने कहा, ''अब हवाई जहाज़ देखते ही डर लगने लगता है और इकलौते बेटे पुष्पनाथन की याद में गला भर आता है.''
विमान में सवार सभी लोगों को आधिकारिक रूप से मृत घोषित किया जा चुका है. लेकिन जी सुब्रमण्यम की पत्नी अब भी उन्हें पुष्पनाथन की तस्वीर पर माला नहीं डालने देती.
चीनी नागरिक दाई शुक़िन के परिवार के पांच सदस्य इस विमान में सवार थे. उनका कहना है कि इस तरह की मौत किसी भी मौत से ज़्यादा दुखद है.
'इसकी खोज मिसाल बनेगी'

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हांगकांग का अख़बार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के संपादक के एक ट्वीट के मुताबिक़, कई लोग अब तक एमएच 370 में सवार अपने संबंधियों के मोबाइल बिल भरते हैं ताकि वह नंबर चालू रहे.
मलेशिया की एलेन चिउ अब भी कभी-कभी अपने 46 वर्षीय पति और एमएच 370 के क्रू सदस्य तान सिज़ हिआंग को याद कर उनके मोबाइल नंबर पर कॉल करती हैं.

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विमान में सवार लोगों के प्रियजनों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए मलेशियाई प्रधानमंत्री नजीब रज़्ज़ाक ने कहा है कि यह घटना अब तक के विमानन इतिहास में एक 'चुनौतीपूर्ण मिसाल' है. इसलिए इसकी खोज भी मिसाल बनेगी.
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री टोनी एबट के मुताबिक़ चीन और मलेशिया की मदद से तक़रीबन 60,000 वर्ग किलोमीटर के इलाक़े की खोज करनी है. इसके लगभग चालीस प्रतिशत हिस्से मे तलाश का काम पूरा हो चुका है.
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