2014 में हैक्टविस्टों के साइबर हमले बढ़े

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एक रिपोर्ट के मुताबिक़ साइबर हमले के ज़रिए किसी वेबसाइट को ऑफ़लाइन करने वालों में हैक्टविस्ट और गेमर्स की संख्या ख़ासी बढ़ी है.

मज़ेदार बात ये है कि ये हैक्टिविस्ट ज़रुरत से ज्यादा डेटा डालकर वेबसाइट को बंद कर देते हैं जो एक अलग तरह का हमला है.

आर्बर नेटवर्क की ओर से तैयार इस रिपोर्ट में पिछले 10 साल में साइबर हमले के जरिए किसी वेबसाइट को उसके यूजर्स के लिए अनुपलब्ध कराने यानि की डीडीओएस हमलों का अध्ययन किया गया.

आर्बर नेटवर्क के वरिष्ठ विश्लेषक डैरेन एनस्टी कहते हैं कि साइबर अपराध करने वाले गिरोह शुरू में डीडीओएस का प्रयोग सट्टेबाज़ों और ऑनलाइन जुआ खेलाने वाली वेबसाइटों से पैसे उगाहने में करते थे, क्योंकि ये संस्थाएं ऑफलाइन होने का ख़ामियाज़ा नहीं उठा सकती थीं.

चोरी की रफ़्तार

आजकल इस तरह के हमले विभिन्न तरह के समूह कर रहे हैं, जिनकी संख्या बढ़ी है.

रिपोर्ट के लिए जिन कंपनियों से बात की गई उनमें से 40 फ़ीसदी ने कहा कि उन्हें हर महीने उन्हें 21 बार से अधिक निशाना बनाया गया.

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इमेज कैप्शन, रिपोर्ट के लिए जिन कंपनियों से बात की गई उनमें से 40 फ़ीसदी ने कहा कि उन्हें हर महीने उन्हें 21 बार से अधिक निशाना बनाया गया.

रिपोर्ट कहती है कि 2011 में बड़े हमलों में निशाना बनाई गई वेबसाइट से 100 गीगाबाइट्स प्रति सेकेंड (जीबीपीएस) की दर से डेटा डाला गया. लेकिन 2014 में इसकी रफ़्तार बढ़कर 400 जीबीपीएस हो गई.

पिछले 12 महीने के मुकाबले में 2014 में 100 जीबीएस का डेटा के हमले चार गुना बढ़े हैं.

रिपोर्ट बनाने के लिए आर्बर ने जिन संगठनों से संपर्क किया, उनमें से 40 फ़ीसदी ने बताया कि हर महीने उन्हें 21 बार से अधिक निशाना बनाया गया.

डैरेन एनस्टी कहते हैं कि उन्नत तकनीक से हमलों की संख्या बढ़ी. वो कहते हैं कि पैसे उगाहने के लिए अभी भी बोटनेट्स का उपयोग किया जाता है.

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