चीन की चुनौतीः नक़ल से असल की ओर

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- Author, केटी होप
- पदनाम, बिजनेस रिपोर्टर, बीबीसी न्यूज़
पश्चिम में नक़ल करना बेहद बुरा लगता है लेकिन चीन में मुश्किल से ही कोई अजीब बात होती है.
वर्ष 2011 में एक अमरीकी ब्लॉगर ने चीन में एप्पल का एक फ़र्जी स्टोर ढूंढ निकाला.
इसके बाद हुई आधिकारिक जांच में पता चला कि देश के दक्षिणी पश्चिमी हिस्से में ऐसे 21 स्टोर थे.
यह स्टोर इतना असली लगता था कि स्टोर के कर्मचारी भी मानते थे कि वे विशाल अमरीकी टेक्नोलॉजी कम्पनी में काम करते हैं.
यहां तक कि मैरियट होटल या हयात जैसे जाने पहचाने पश्चिमी ब्रांड वाले होटलों के नाम पर देश में चीनी होटल हैं.
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अमरीकी दूतावास का अनुमान है कि चीन के बाज़ार में मौजूद कुल उपभोक्ता सामानों में 20 प्रतिशत नक़ली हैं.
दूतावास की चेतावनी है कि, "यदि ऐसा उत्पाद बेचा जा रहा है तो यह संभव है कि यह ग़ैरक़ानूनी रूप से नक़ली हो."
चीन की संस्कृति में नक़ल करना और नक़ली सामान बनाना इतना गहरे में पैठ गया है कि इसके लिए एक शब्द भी बन गया है- शांझाई.

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अभी तक यह कोई समस्या नहीं रहा है. दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का विस्तार पिछले तीन दशक तक दहाई अंक में हुआ, जिसने इसे पश्चिमी प्रतिद्वंद्वियों के लिए जलन का सबब बना दिया.
लेकिन विकास दर धीमी पड़ने के कारण, चीनी व्यवसाय अगर घरेलू ही नहीं बल्कि महत्वपूर्ण विदेशी बाज़ारों में सफल होना चाहते हैं तो उन्हें नई खोज़ों की ज़रूरत है.
पिछले साल चीन की अर्थव्यवस्था का 24 सालों में सबसे कमज़ोर प्रदर्शन रहा है.
यांत्रिक नकल

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एक निजी शिक्षा फ़र्म बांड एजुकेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जो बाओलिन झाउ मानते हैं कि कंपनियां बदलाव की शुरुआत कर रही हैं.
वो कहते हैं कि नक़ल करने का ढर्रा तब शुरू हुआ जब चीनी सरकार ने 1980 के दशक में पहली बार देश को खोलने की शुरुआत की और निजी कंपनियां बनाने की इजाज़त दे दी.
व्यवसाय शुरू करने वालों के लिए शोध और विकास पर समय और पैसा ख़र्च करने का विकल्प ही नहीं था. उनके पास बहुत सीमित संसाधन और कुशल कर्मचारी थे.
वो कहते हैं, "तत्काल सफलता चाहने वाले व्यवसायी आम तौर पर नक़ल करते थे. उस समय यह बहुत रूढ़ और यांत्रिक नक़ल हुआ करती थी, उन्होंने हर चीज़ की हूबहू नक़ल की."
झाउ कहते हैं कि इसके मुक़ाबले व्यवसाय की शुरुआत करने वली दूसरी पीढ़ी ने अब नई खोज करना शुरू कर दिया है.
अलीबाबा

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विशाल ई कॉमर्स कंपनी अलीबाबा और मैसेजिंग सेवा वीचैट की कंपनी टेनसेंट का वो उदाहरण देते हैं.
इन्होंने अपने पश्चिमी प्रतिद्वंद्वियों से सीखा लेकिन चीन के बाज़ार की ज़रूरतों के मुताबिक अपनी सेवा को विकिसत किया और सुधारा.
लेकिन नई खोज को आम बात बनाने के लिए, कंपनियों के तौर तरीक़ों में आमूल चूल बदलाव की ज़रूरत है.
चीन में, बॉस शब्द का मतलब सर्वोपरि है और एक निचले क्रम के एक कर्मचारी द्वारा सुझाव दिए जाने को हेय दृष्टि से देखा जा सकता है.
चीनी कंपनी नार्दर्न लाइट वेंचर कैपिटल के मुखिया देंग फेंग वर्तमान नेतृत्व को नेतृत्वकारी के बजाय 'प्रबंधकीय' ज़्यादा कहते हैं.
प्रबंधन

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वो कहते हैं, "प्रबंधन का चीन में मतलब होता है- लोगों को कैसे नियंत्रित किया जाए. हमें मानसिकता बदलनी है ताकि लोगों का नेतृत्व किया जा सके, बनिस्बत इसके कि सिर्फ़ प्रबंधन किया जाए या बताया जाए कि उन्हें क्या करना है."
पर्सनल कम्प्यूटर बनाने वाले दुनिया की सबसे बड़ी चीनी कंपनी लेनोवो की 60 से अधिक देशों में शाखाएं हैं और इसके बोर्ड सदस्यों में 40 प्रतिशत ग़ैर चीनी हैं.
यूरोप, अमरीका और जापान समेत इसके अधिकांश विदेशी व्यवसाय को स्थानीय कर्मचारी संभालते हैं.
कंपनी के संस्थापक लियू शुआंझी कहते हैं, "लेनोवो के लिए भविष्य में पश्चिमी और पूर्वी संस्कृतियों को मिलाना महत्वपूर्ण है. क्योंकि बाज़ार में मजबूत प्रतिद्वंद्वियों और तीखी प्रतियोगिता का सामना हो रहा है. इसलिए उन्हें पश्चिम की नई खोज की ताक़त और पूर्वी संस्कृति को एक करना होगा."
पश्चिम की शिक्षा

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जबसे चीन ने अपनी अर्थव्यवस्था खोली है उसके बाद से दूसरी पीढ़ी के जो व्यवसाय शुरू हुए हैं, उनके जो शुरुआती संकेत हैं वो उत्साहजनक हैं, क्योंकि अक्सर इनके संस्थापक पश्चिम में शिक्षित हुए हैं.
वीडियो साझा करने वाली जानी मानी चीन की कंपनी यूकू तुडोऊ के मुख्य अधिकारी विक्तोर कू ने अमरीका में पढ़ाई की है और चीन लौटने से पहले उन्होंने सिलिकॉन वैली में काम किया.
यूकू तुडोऊ को चीनी यू ट्यूब माना जाता है.
वो बताते हैं कि शुरू से ही, जब उन्होंने पूर्ववर्ती यूकू से लेकर इसकी स्थापना की, कंपनी ने अपनी तकनीकी ख़ुद विकसित की और अपने अंतरराष्ट्रीय समकक्षों से बहुत पहले ही अपनी प्रोग्रामिंग की.
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