नक़्क़ालों से लड़ने में 1000 करोड़ खर्च

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नक़्क़ालों से निपटने के लिए चीन की ई-कॉमर्स कंपनी अलीबाबा को वर्ष 2013 से लेकर पिछले नवंबर तक 16 करोड़ डॉलर (क़रीब 1,000 करोड़ रुपए) ख़र्च करने पड़े हैं.
अपनी वेबसाइट पर जाली सामानों की समस्या से निपटने के लिए कंपनी ने 2,000 कर्मचारी रखे हैं और इसमें अगले साल 200 और कर्मचारियों को जोड़ा जाएगा.
इसके अलावा 5,400 स्वयंसेवक भी हैं जो कंपनी की रोज़ाना निगरानी योजना का हिस्सा हैं.
चीन में जाली सामानों की एक बड़ी समस्या है.
न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में रिकॉर्ड 25 अरब डॉलर की लिस्टिंग के पहले दुनिया की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी ने कहा था कि ग्राहकों, निवेशकों और खुदरा साझीदारों का दिल जीतने में जाली सामान रुकावट पैदा कर सकते हैं.
गंभीर मामला

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अमरीकी ई-कॉमर्स वेबसाइट ईबे ने 2010 में अदालत में दिए अपने हलफ़नामे में कहा था कि वो अपने 'ख़रीदार सुरक्षा कार्यक्रम' पर हर साल दो करोड़ डॉलर (क़रीब 126 करोड़ रुपए) ख़र्च करती है.
पिछले मंगलवार को अलीबाबा ग्रुप के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जोनाथन लू ने कहा था, "जालसाज़ी से लड़ने में हम संजीदगी से ज़िम्मेदारी निभा रहे हैं."
बयान में कहा गया है कि, "कंपनी के चेयरमैन जैक मा ने कहा था कि अगर ई-कॉमर्स चीन में सफल रहता है तो अलीबाबा ग्रुप के लिए यह कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन अगर समाज में जालसाज़ी के ख़िलाफ़ प्रभावी तरीक़े से नहीं निपटा गया तो इससे अलीबाबा ग्रुप पर बहुत फ़र्क़ पड़ेगा."
तमाम बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों के खुदरा व्यवापार को 2012 तक बौद्धिक संपदा को लेकर 'संदेहास्पद बाज़ारों' की अमरीकी ट्रेड रीप्रजेंटेटिव्स की सूची में रखा गया था.
बड़ी चुनौती

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एक सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक़, वर्ष 2013 में अमरीकी कस्टम विभाग द्वारा बौद्धिक संपदा की नक़ल से संबंधित जितने सामान ज़ब्त किए गए उसमें 93 प्रतिशत चीन और हांगकांग के थे.
पिछले महीने जब कंपनी ने सिंगल्स डे पर नौ अरब डॉलर (570 अरब रुपए) का सामान बेचा तो स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ़ इंडस्ट्री एंड कॉमर्स के अधिकारियों ने इस दिन बेचे गए जाली सामानों की जांच की थी.
जांच मे कहा गया था कि खुदरा दुकानों ने ऑनलाइन ख़रीदे गए 10 प्रतिशत सामान जाली थे या बहुत संदेहास्पद थे.
अलीबाबा ने कहा है कि उसने सिर्फ़ 2014 में ही जालसाज़ी के 1,000 मामलों की जांच में चीनी अधिकारियों की मदद की थी.
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