सऊदी अरब: ब्लॉगर को कोड़ों की सज़ा रोकी

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सऊदी अरब के ब्लॉगर को रैफ़ बदावी को दूसरी बार कोड़े लगाने की सज़ा स्थगित कर दी गई है.
बदावी पर अपनी वेबसाइट ''सऊदी लिबरल नेटवर्क'' पर इस्लाम का अपमान करने, साइबर अपराध और अपने पिता के अवहेलना करने के आरोप थे. यह वेब साइट अब बंद कर दी गई है.
रैफ़ बदावी की कोड़ों की सज़ा उनकी खराब सेहत के चलते रोकी गई है. बदावी को जून 2012 में गिरफ़्तार किया गया था. उन्हें 10 साल क़ैद और 1000 कोड़े मारे जाने की सज़ा दी गई थी.
शुक्रवार की नमाज के बाद रैफ़ बदावी को दूसरी बार सरेआम कोड़े लगाए जाने थे.
पिछले शुक्रवार को बदावी को 50 कोड़े मारे गए थे जिसका पूरी दुनिया में विरोध किया गया. सऊदी अरब की ओर से इस विरोध पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

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सऊदी अरब ने बदावी के स्वास्थ्य और उनकी बाकी सज़ा के बारे में अभी कोई बयान नहीं दिया है. सज़ा के मुताबिक उन्हें हर सप्ताह कोड़े लगाए जाने हैं.
मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी ने एक बयान में कहा कि रैफ़ बदावी की जाँच करने के बाद डॉक्टरों को लगा कि पिछले सप्ताह बदवी को लगाए गए कोड़ों की वजह से आने वाले घाव अभी भरे नहीं हैं और वो अधिक कोड़े खाने में सक्षम नहीं हैं.
एमनेस्टी के अनुसार डॉक्टर ने सज़ा को अगले सप्ताह तक स्थगित करने की मांग की.
बदावी की पत्नी ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि सज़ा टाले जाने से उन्हें उम्मीद बंधी है कि सऊदी प्रशासन इस सज़ा को ख़त्म करना चाहता है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी आलोचना हो रही है.
कौन हैं बदावी
सऊदी अरब ने 31 वर्षीय ब्लॉगर और एक्टिविस्ट रईफ़ बदावी ने 2008 में एक ऑनलाइन फ़ोरम- लिबरल सऊदी नेटवर्क- बनाया था.
इसमें उन्होंने सऊदी अरब के धर्माधिकारियों के आलोचनात्मक लेख लिखे थे और नीतियों पर सवाल उठाए थे.
जाने माने मुस्लिम विद्वान शेख अब्दुर्रहमान अल-बराक ने बदावी के ख़िलाफ़ फ़तवा जारी करते हुए उन्हें 'नास्तिक' और 'धर्मत्यागी' करार दिया. उनके अनुसार बदावी ने कहा था कि 'मुसलमान, यहूदी, ईसाई और नास्तिक सभी समान हैं.'

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इसके बाद साल 2012 में उन पर जानलेवा हमला किया गया जिसके बाद उनकी बीवी और परिवार ने कनाडा में शरण मांगी.
इसी साल जेद्दाह में उन्हें इस्लाम के अपमान और नाफ़रमानी के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया गया था.
साल 2013 में उन्हें सात साल की सज़ा और 600 कोड़ों की सज़ा दी गई थी.
उन्होंने इस आदेश को चुनौती दी लेकिन पिछले साल मई में अदालत ने सज़ा बढ़ाकर 10 साल कैद और 1,000 कोड़ों में बदल दी.
सऊदी अरब इस्लामी क़ानून का कड़ाई से पालन करता है और यहां धर्म के बारे में खुली चर्चा करने से लोग बचते हैं.
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