आस्था का अपमान न हो: पोप

पोप फ़्रांसिस

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कैथलिक ईसाइयों के सर्वोच्च धार्मिक नेता पोप फ़्रांसिस ने पेरिस हमले की निंदा करते हुए कहा है कि अभिव्यक्ति की आज़ादी का मतलब किसी की आस्था का अपमान नहीं है.

पोप का यह बयान पेरिस स्थित शार्ली एब्डो पत्रिका के दफ़्तर पर हमले के कुछ दिन बाद आया है. हमले में 12 लोग मारे गए थे. उसके बाद हुए हमलों में पांच लोग मारे गए थे.

पांच दिन की यात्रा पर फ़िलीपींस जाते समय विमान में पत्रकारों से बात करते हुए पोप ने कहा कि भगवान के नाम पर किसी की हत्या करना असाधारण बात है, लेकिन अभिव्यक्ति की आज़ादी की भी कुछ सीमाएं हैं और दूसरे धर्म का अपमान करके उनके मानने वालों को उकसाना भी ग़लत है.

इसके लिए उन्होंने अपने एक सहायक डॉक्टर गैसपेरी की ओर इशारा करते हुए कहा, ''अगर मेरे दोस्त डॉक्टर गैसपेरी मेरी मां के बारे में अपशब्द कहते हैं तो उन्हें घूसा खाने की उम्मीद करनी चाहिए.''

जर्मनी

पोप फ़्रांसिस

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इमेज कैप्शन, पांच दिनों के दौरे पर पोप फ़िलीपींस में हैं

उधर, पेरिस हमले के बाद जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल ने कहा है कि वह जर्मनी में लोगों के टेलिफ़ोन और इंटरनेट रिकॉर्ड की निगरानी दोबारा शुरू करना चाहती हैं.

यूरोपीय संघ की सर्वोच्च अदालत ने पिछले साल एक फ़ैसले में कहा था कि ऐसा करना निजता का उल्लंघन है.

जर्मनी में इसे लेकर काफ़ी विवाद है लेकिन मर्केल ने कहा कि अब नए क़ानून को जल्द से जल्द लागू किया जाना चाहिए जिसके बाद ऐसा करना संभव हो सके.

उन्होंने धर्म के नाम पर हिंसा को किसी भी तरह नियंत्रित करने की ज़रूरत पर बल दिया लेकिन साथ ही पेरिस हमले को मुसलमानों के ख़िलाफ़ भेदभाव भड़काने के लिए इस्तेमाल न करने की चेतावनी दी.

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