कहां जाकर रुकेगी रूस की गिरती मुद्रा?

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एप्पल का कहना है कि वह रूस में अपने उत्पाद नहीं बेच सकती क्योंकि रूबल की क़ीमत इतनी अस्थिर है कि दाम तय नहीं किए जा सकते.
कंपनी ने रूबल की क़ीमत गिरने के एक दिन बाद ही रूस में अपने आईफ़ोन, आईपैड और अन्य उत्पादों की बिक्री रोक दी है.
इस हफ़्ते ब्याज दरों को बढ़ाकर 10.5% से 17% करने के नाटकीय फ़ैसले के बावजूद रूबल 20% से ज़्यादा गिरा है.
बुधवार की सुबह ही रूबल पांच फ़ीसदी गिरा, जिसके बाद इसकी क़ीमत एक डॉलर के मुक़ाबले 71 रूबल हो गई.
'सस्ता तेल और प्रतिबंध'

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एप्पल ने पिछले महीने ही रूस में अपने उत्पादों के दाम 20% बढ़ाए थे क्योंकि कमज़ोर होते रूबल की वजह से रूस में एप्पल के उत्पाद यूरोप के अन्य देशों के मुक़ाबले सस्ते हो गए थे.
रूस के केंद्रीय बैंक ने बुधवार को कहा कि उसने सोमवार को देश के मुद्रा बाज़ार में दो अरब डॉलर ख़र्च किए हैं.
रूस इस अपनी मुद्रा की हालत सुधारने के लिए क़रीब 80 अरब डॉलर ख़र्च कर चुका है इसके बावजूद रूबल जनवरी से अब तक डॉलर के मुक़ाबले अपनी आधी क़ीमत खो चुका है.
इसकी मुख्य वजह सस्ता तेल और यूक्रेन को लेकर पश्चिमी देशों के लगाए प्रतिबंध हैं. दोनों वजहों से रूसी अर्थव्यवस्था कमज़ोर हुई है.
इस हफ़्ते रूबल इस डर से गिरा कि यूक्रेन में अलगाववादियों का समर्थन करने की वजह से अमरीका रूस पर और प्रतिबंध लगाने जा रहा है.
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