सभी अमरीकी संस्थानों की सुरक्षा हुई कड़ी

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पूरे विश्व में सभी अमरीकी संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गयी है. यह क़दम केंद्रीय ख़ुफ़िया एजेंसी (सीआईए) के पूछताछ के तौर तरीकों के बारे में जारी की जाने वाली रिपोर्ट के मद्देनज़र उठाया गया है.
अमरीकी राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता जोश अर्नेस्ट ने यह जानकारी देते हुए कहा कि 'बड़े ख़तरे' के कुछ 'संकेतों' के कारण दूतावास और अन्य अमरीकी संस्थान सावधानी बरत रहे हैं.
मंगलवार को अमरीकी सीनेट की इस रिपोर्ट का 480 पन्नों वाला सारांश जारी किया जाना है.

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अनुमान है कि 9/11 की घटना के बाद अल-क़ायदा के ख़िलाफ़ चलाए गए सीआईए के अभियान की इसमें विस्तृत जानकारी होगी.
इसके अलावा रिपोर्ट में सीआईए के एजेंटों के संदिग्ध व्यक्तियों से सूचना निकलवाने के लिए आजमाए गए विवादास्पद तौर-तरीकों के बारे में और जानकारी सामने आने की संभावना है.
माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट में जानकारी निकलवाने के लिए कड़ी पूछताछ के तरीके के विफल रहने की बात भी कही गयी है.
रिपोर्ट में क्या सार्वजनिक किया जाए, इसे लेकर अमरीका में असहमति के चलते इस रिपोर्ट को जारी किए जाने में देर हुई.
रिपोर्ट लीक

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सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी की 6,000 पन्नों की पूरी रिपोर्ट अभी तक गोपनीय दस्तावेज है.
राष्ट्रपति बराक ओबामा ने जब 2009 में पद संभाला तो उन्होंने सीआईए के पूछताछ कार्यक्रम पर रोक लगा दी थी और स्वीकार किया था कि अल-क़ायदा क़ैदियों से पूछताछ में जो तरीक़े अपनाए गए वो टॉर्चर सरीखे थे.
अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के कार्यकाल के दौरान अल-क़ायदा के ख़िलाफ़ सीआईए ऑपरेशन में लगभग 100 संदिग्ध चरमपंथियों को अमरीका से बाहर अमरीकी कैदखानों में क़ैद किया गया था.
इनसे पूछताछ के दौरान थप्पड़ मारने, अपमान करने, बर्फ में रखने और सोने न देने जैसे तरीक़े अपनाए गए.
इसी वर्ष अगस्त में सीनेट की रिपोर्ट पहली बार लीक हुई थी. इसके बाद बराक ओबामा ने कहा था, "हमने कुछ ऐसी चीजें की हैं जो हमारे मूल्यों से उलट थीं."
इससे पहले इस कार्यक्रम की जांच अमरीकी न्याय मंत्रालय ने की थी और उसने इसमें किसी भी आपराधिक आरोप से इनकार किया था, जिसके बाद मानवाधिकार संगठनों का विरोध शुरू हो गया था.
बचाव

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पिछले रविवार को पूर्व राष्ट्रपति बुश ने समाचार टीवी चैनल सीएनएन पर सीआईए का बचाव किया था.
पूर्व सीआईए निदेशक मिशेल हेडेन समेत अन्य कई लोगों ने भी इस रिपोर्ट को ख़ारिज किया है.
डेमोक्रेट सदस्यों के बहुमत वाली सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी ने कई सालों के अध्ययन के बाद इस रिपोर्ट को तैयार किया है.
ऐसा माना जा रहा है कि इस कमेटी में मौजूद रिपब्लिकन सदस्य अलग से अपनी रिपोर्ट जारी करेंगे.
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