रूसी बैल नासा के घोड़ो से अच्छा

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- Author, रिचर्ड होलिंगम
- पदनाम, विज्ञान पत्रकार
अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा अंतरिक्ष यान ओरायन के प्रक्षेपण की तैयारी में है. लेकिन क्या आप जानते हैं उसके प्रतिस्पर्धी रूसी यान के बारे में, जो लगभग बिना रुके 50 साल से काम कर रहा है.
वर्ष 2011 में अमरीकी स्पेस शटल के रिटायर होने के बाद से अंतरिक्ष यात्रियों के लिए रूसी सोयूज़ ही अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) तक पहुंचने का एकमात्र विकल्प है.
अमरीकी और यूरोपीय भी इसका इस्तेमाल करते हैं.
1967 में छोड़े गए रूस के अंतरिक्ष यान सोयूज़ को इस्तेमाल करने वाले अनेक ग़ैर रूसी अंतरिक्ष यात्री - 'काम करने वाला और सुरक्षित' मानते हैं.
सस्ता और टिकाऊ

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यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ईएसए) के नीदरलैंड्स के अंतरिक्ष यात्री आंद्रे कीपर्स शिकायत करते हैं, "यह बहुत छोटा और तंग है. ख़ासकर बाईं और दाईं सीट जिन पर लंबे कद के अमरीकी और यूरोपियों को बैठने में दिक्कत होती है."
कीपर्स का तो ये भी कहना है कि उनके अमरीकी सहयोगी तो पेन किलर लेकर सोयूज़ में बैठते हैं.
सोयूज़ की लैंडिंग पर इटली के अंतरिक्ष यात्री पाओलो नेसपोली कहते हैं, "यह एक भीषण कार दुर्घटना होने जैसा है. यान के भीतर जब कुछ मशीनों पर नज़र पड़ता है तो लगता है कि हम 50 के दशक में पहुँच गए हैं."
लेकिन रूसियों का दावा है कि एक अमरीकी अंतरिक्ष यान की लागत पर वे 20 सोयूज़ अंतरिक्ष यान प्रक्षेपित कर सकते हैं.
असुविधाजनक, लेकिन विश्वसनीय

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नेसपोली कहते हैं, "यान काम करता है, यह असरदार है और वही करता है जो इसे करना चाहिए."
कीपर्स कहते हैं, "जब मेरी पत्नी ने सुना कि मुझे अंतरिक्ष यान में उड़ान भरनी पड़ सकती है तो उसने कहा कि वह चाहेगी कि मैं सोयूज़ में जाऊँ क्योंकि उसकी इमेज अच्छी है."
कीपर्स कहते हैं, "यह बहुत तकलीफ़देह है, लेकिन सुरक्षित है और अंतरिक्ष यान है."
1970 के दशक की शुरुआत में सोवियत संघ ने अंतरिक्ष की खोज में एक नई दिशा ली.
रूस ने परिक्रमा करने वाला अंतरिक्ष स्टेशन विकसित किया और सोयूज़ अंतरिक्ष यात्रियों को वहां ले जाने का उचित माध्यम बना.
क्योंकि अमरीका का स्पेस शटल 2011 में रिटायर हो चुका था, इसलिए नासा अपने यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजने के लिए पूरी तरह सोयूज़ पर निर्भर था.
सोयुज़ पर निर्भरता
सोयूज़ में मैकेनिकल नेविगेशन सिस्टम लगा हुआ था जो 1990 के दशक में ही हटा लिया गया, लेकिन पेरिस्कोप अब भी लगा हुआ है.

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यह सरल और मजबूत विश्वसनीयता यान की सभी प्रणालियों में दिखती है.
नासा के पूर्व इंजीनियर डेविड बेकर कहते हैं, "यान का पूरा ढांचा, उसके कल-पुर्जे और यान के अंदर की बहुत सी प्रणालियाँ अंतरिक्ष युग के पहले से ही ली गई थीं."
बेकर कहते हैं, "सोयूज़ में इस बात पर ज़ोर दिया गया था कि यदि कोई यंत्र टूटा नहीं है तो उसे मत छेड़ो."
उनका कहना है कि अमरीकी अंतरिक्ष यानों की इस बात के लिए आलोचना की जाती है कि उनमें ज़रूरत से ज़्यादा इंजीनियरिंग की गई है.

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अंतरिक्ष यात्री नेस्पोली कहते हैं, "हम रूसियों से सीख सकते हैं, कभी-कभी जब आप कम काम करते हैं तो यह भी अच्छा होता है."
क्षुद्रग्रह से लेकर मंगल ग्रह
नासा का ओरायन यूरोपीय सर्विस मॉड्यूल के साथ संयुक्त रूप से तैयार किया गया अत्याधुनिक अंतरिक्ष यान है जो इंसान को ऐस्टरौएड से लेकर मंगल ग्रह तक ले जाने का वादा करता है.
इनमें से कोई भी कार्यक्रम पूरी तरह वित्त पोषित नहीं है, लेकिन कहना होगा कि कम के कम ओरायन के बलबूते अमरीका एक बार फिर अपने अंतरिक्ष यात्रियों को आईएसएस पर भेज पाएगा.

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नया अमरीकी अंतरिक्ष यान बड़ा है, ज़्यादा आरामदायक है और सोयूज़ के मुक़ाबले अधिक प्रगतिशील है. ओरायन बनाने में कितनी लागत आई है, यह कहना तो मुश्किल है, लेकिन माना जा रहा है कि इस पर आया ख़र्च 400 करोड़ डॉलर से 1500 करोड़ डॉलर के बीच है.
नासा के पूर्व इंजीनियर डेविड बेकर कहते हैं कि उन्हें कतई हैरानी नहीं होगी अगर रूस का अंतरिक्ष यान सोयूज़ अगले 20 साल भी काम करता रहे.
वह भविष्यवाणी करते हैं, "सोयूज़ का इसके आगे एक लंबा भविष्य है."
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