तेल नहीं होगा तो सउदी के लोग क्या करेंगे?

सउदी अरब में बकरियां चराता एक चरवाहा

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सउदी और कुवैती लोग तेल खत्म हो जाने के बाद क्या करेंगे? अरबी भाषा के एक हैशटैग में इसी बात को लेकर फिक्र का आलम है.

सोशल मीडिया में इस हैशटैग का इस्तेमाल दस लाख से ज्यादा बार किया जा चुका है. पिछले हफ़्ते की शुरुआत में अरबी जुबान का यह हैशटैग ट्रेंड करना शुरू हो गया था.

इसका मतलब था, 'जब तेल खत्म हो जाएगा तो आपकी नौकरी...' यह हैशटैग न केवल सउदी अरब में ट्रेंड कर रहा था बल्कि कुवैत में भी लोग इसे बार बार दोहरा रहे थे.

इन दोनों देशों के नागरिक इस मुद्दे पर एक दूसरे से मज़ाक कर रहे थे लेकिन उनकी बातों में इसे लेकर फिक्र भी थी कि उनका भविष्य कैसा होगा.

बेरोजगारी

सउदी अरब का नक्शा

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कुछ सउदी लोग सादगी भरी जिंदगी में लौटने को लेकर उत्सुक दिखे और यहां तक कि चरवाहों की जिंदगी का जिक्र भी आया.

लेकिन कई लोग ऐसे भी थे जो अपने देश के भविष्य को लेकर निराशावादी लग रहे थे. एक आदमी ने ट्विटर पर कहा, "मैं एक बेरोज़गार हूं और मेरे जैसे कई लोग हैं. इससे ज्यादा बुरा क्या होगा कि उनके देश का तेल खत्म हो जाएगा."

खाड़ी क्षेत्र में सउदी अरब तेल का सबसे बड़ा उत्पादक है लेकिन इसके बावजूद वहां बेरोज़गारी एक बड़ी समस्या है.

सउदी लोगों में इस बात को लेकर भी असुरक्षा की भावना है कि वहां तेल की कीमतें पिछले चार साल के सबसे निचले स्तर पर हैं. हालांकि इसमें तेल की आपूर्ति पर कोई सीधी बात नहीं है.

तेल के बिना

तेल की रिफाइनरी

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और अगर तेल खत्म भी होने लगे तो इससे कीमतें बढ़ेंगी ही. लेकिन साल 2011 में सिटी ग्रुप ने अपनी एक रिपोर्ट में चेतावनी दी थी कि 2030 तक सउदी अरब में ऐसे हालात बन सकते हैं कि निर्यात के लिए तेल ही न बचे.

सउदी अरब के भीतर कई लोगों का ये मानना है कि उनके देश ने उस दिन के बारे में सोचा ही नहीं है कि तेल के बगैर उनका भविष्य कैसा होगा.

एक सउदी शख्स ने ट्वीट किया है, "मुझे डर है कि हम कहेंगे कि हमने अपना तेल ऐशो-आराम में खर्च कर दिया है. हमने इसका इस्तेमाल वैज्ञानिक तरक्की के लिए नहीं किया जिससे आने वाली पीढ़ियों का कोई फायदा हो सके."

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने सउदी सरकार से हाल ही में खर्च कम करने के और बुरे वक्त के लिए पैसे का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए कहा.

बुनियादी ढांचा

मक्का, सउदी अरब

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इमेज कैप्शन, हज करने के लिए दुनिया भर के मुसलमान मक्का जाते हैं.

पिछले कुछ सालों में सउदी सरकार ने कल्याणकारी कार्यों में खर्च बढ़ाया है. वे बुनियादी ढांचे के विकास के लिए कुछ बड़ी परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं.

लेकिन ऑनलाइन फोरम्स पर कुछ टिप्पणियों से इस बात का अंदाजा भी लगाया जा सकता है कि लोग विदेशी सहायता देने में उदारता बरतने के लिए सरकार से नाराज हैं.

सउदी अरब के सुल्तान अब्दुल्लाह

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इमेज कैप्शन, सउदी अरब के सुल्तान अब्दुल्लाह.

तेल के जखीरे पर बैठे होने के बावजूद सउदी लोगों में देश की अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता का माहौल है.

जुलाई में लोगों ने सोशल मीडिया पर 'वेतन से मेरी जरूरतें पूरी नहीं होतीं' के हैशटैग के साथ अपनी बात रखी थी.

लोगों की बातों से ये भी पता चलता है कि दुनिया के धनी देशों में भी लोग किस कदर परेशानियों का सामना कर रहे हैं. इसी तरह का डर कुवैत में भी देखा जा रहा है.

हालांकि वहां की आबादी बहुत कम है. एक कुवैती ने लिखा, "मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि वह दिन न देखना पड़ें क्योंकि यह पीढ़ी आत्मनिर्भर नहीं हो सकती."

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