स्वागत है चीन के सबसे अमीर क्लब में..

इमेज स्रोत,
- Author, नील कोइंग
- पदनाम, प्रोड्यूसर, चीनी अरबपति क्लब
दशकों तक चीन के नेता माओत्से तुंग के नेतृत्व में सरकार ने अर्थव्यवस्था पर काबू रखने की नीति अपनाई. निजी क्षेत्र लगभग ध्वस्त हो गया.
ऐसे में निजी कंपनियों और कारोबारियों की स्थिति मज़बूत रखने के लिए अनोखी पहल हुई.
एक ऐसा क्लब शुरू हुआ, जिसमें आज शीर्ष के कारोबारी शामिल हैं.
आखिर एक मामूली क्लब की ऐसी पहचान कैसे बनी और क्यों चीन के अरबपति इसका सदस्य बनने में गर्व महसूस करते हैं?
पढ़ें क्लब के प्रोड्यूसर नील कोइंग का आकलन
चीन की राजधानी बीजिंग के उत्तर-पश्चिमी छोर पर एक इलाक़ा दिग्गज तकनीकी कंपनियों के लिए मशहूर है. यहां एक बहुमंज़िला इमारत चुपचाप खड़ी है.
अंदर एक साधारण सा दिखने वाला दफ़्तर है, पर इसके उलट यह जगह कुछ बेहद असाधारण गतिविधियों का केंद्र है.
यह एक ऐसा क्लब है जिसके कई सदस्य अरबपति हैं.

इमेज स्रोत,
बीबीसी टीवी डॉक्यूमेंट्री 'चाइना बिलियनेयर्स क्लब' (सीबीसी) के प्रस्तुतकर्ता स्टीव टैपिन कहते हैं, "दुनिया भर में ऐसी मिसाल कहीं नहीं मिलेगी."
साझा मंच
चीनी कारोबारियों के इस क्लब में 46 शीर्ष कारोबारी नेता शामिल हैं. उनके साथ राजनेता, अकादमिक शख्सियतें और दूसरे सलाहकार भी जुड़ रहे हैं.
कुछ सदस्य तो अरबपति हैं. इनमें चीन की दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनी 'अलीबाबा' के जैक मा भी हैं.
माना जा रहा है कि उन्होंने चीन के सबसे धनी शख्स वांग जियानलिन की जगह ले ली है.
इस क्लब में कंपनी निर्माता मिल सकते हैं, आइडिया साझा कर सकते हैं और एक-दूसरे की सलाह ले सकते हैं.

इमेज स्रोत, thinkstock
क्लब की शुरुआत साल 2006 में हुई. तब से इसने बड़े पैमाने पर इवेंट किए हैं.
चीन कारोबारी क्लब (सीईसी) के सदस्यों ने देश-विदेश जाकर उन प्रधानमंत्रियों और राष्ट्रपतियों से भी मुलाकात की हैं, जो कारोबारियों के बारे में जानना चाहते हैं.
प्रतिस्पर्धा
मगर मुसीबत यह है कि इस क्लब में प्रवेश पाना बेहद मुश्किल है. नए सदस्यों की तो शायद ही कभी भर्ती की जाती है.
उम्मीदवार के पास सफल कारोबार का रिकॉर्ड और क्लब के मूल्य अनुसरण करने की क़ाबलियत होनी चाहिए.
क्लब कैसे काम करता है?
इसके जवाब में इंटरनेट कंपनी सिना के मुख्य कारोबारी चार्ल्स चाओ बताते हैं कि क्लब सदस्य अलग अलग उद्यम क्षेत्रों से हैं, इसलिए उनका आपस में कोई मुक़ाबला नहीं होता.
सहयोग
सदस्य एक दूसरे की मदद भी करते हैं. चाओ का कहना है कि यह सहयोग 'उम्मीद से परे' है.
क्लब कैसे अस्तित्व में आया? इसका जवाब चीन में कारोबारी समूहों की अनिश्चितता में छिपा है.
क्लब के संस्थापक लुई डोंगुआ ने बताया, "समाज कई बार कारोबारियों के साथ बुरा बर्ताव करता है. यही नहीं, इनके बारे में कई ग़लत धारणाएं भी मौजूद हैं."
लुई डोंगुआ एक ऐसी मैगज़ीन भी निकालते हैं, जो कारोबारियों की कहानियां छापता है.
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां <link type="page"><caption> क्लिक</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link> करें. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>












