लीबिया में हिंसा पर लगे रोकः पश्चिमी देश

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अमरीका और उसके चार यूरोपीय सहयोगियों ब्रिटेन, फ़्रांस, जर्मनी और इटली ने अफ़्रीकी देश लीबिया में तत्काल संघर्ष रोकने की अपील की है.
इन देशों ने एक बयान में कहा है कि लीबिया संकट का 'कोई सैन्य समाधान नहीं' है.
लीबिया के पूर्वी शहर बेनग़ाज़ी में इस्लामी विद्रोहियों और सरकारी सुरक्षा बलों के बीच हाल में हुए संघर्ष में दर्ज़नों लोग मारे गए.
साल 2011 में कर्नल गद्दाफ़ी की सत्ता के पतन के बाद से देश में अस्थिरता की स्थिति बनी हुई है.
'ख़तरे में आज़ादी'

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पश्चिमी देशों के बयान में कहा गया है कि अगर स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय चरमपंथी ताक़तों को लीबिया में पनाह मिलती रही तो मुश्किल से हासिल आज़ादी फिर से ख़तरे में पड़ सकती है.
इन देशों ने कहा कि केवल लोकतांत्रिक तरीक़े से चुनी हुई सरकार के प्रति जवाबदेह नियमित सशस्त्र बल ही सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में सक्षम होंगे.
लीबिया में अंसार अल-शरिया समेत कई इस्लामी चरमपंथी संगठनों को अमरीका समेत कई देशों में चरमपंथी संगठनों की सूची में शामिल किया है.
ये चरमपंथी संगठनों ने सरकार के ख़िलाफ़ हथियार उठा रखे हैं और उनके डर के नव निर्वाचित संसद सदस्यों को छिपकर रहना पड़ रहा है.
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