हाई कोर्ट के जज को दख़ल न देने को कहा

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- Author, आलोक प्रकाश पुतुल
- पदनाम, रायपुर से बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए
छत्तीसगढ़ में वेदांता-स्टरलाइट की बालको कंपनी पर 1300 करोड़ रुपए की हेराफेरी के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के एक जज को दखल देने से मना किया है.
इस मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट को अपना फैसला वापस लेने के भी निर्देश दिए हैं.
बालको कंपनी पर आरोप है कि उसने अपने 21 हज़ार कर्मचारियों के भविष्य निधि खाते में अवैध तरीके से कटौती करते हुए 1300 करोड़ रुपए की आर्थिक हेराफेरी की है.
इसके अलावा अदालत के निर्देशों के उल्लंघन का भी मामला बालको के ख़िलाफ़ चल रहा है.
फ़ैसले पर रोक

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बालको ने इस मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट गई, जहां अदालत ने बालको को राहत देते हुए अगली सुनवाई तक पूरे मामले की जांच कार्रवाई पर रोक लगा दी.
हाई कोर्ट के इस फैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट जाने वाले याचिकाकर्ता संजीव शरद वर्मा कहते हैं, “ हमने अदालत में इस बात के तथ्य प्रस्तुत किए कि छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के जिस जज पी सैम कोसी ने बालको को इस मामले में राहत दी है, वह भविष्य निधि की गड़बड़ी के ही मामले में बालको के वकील भी रह चुके हैं.”
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट को आदेश दिया कि वह इस मामले में अपना फैसला वापस ले.
अदालत ने हाई कोर्ट में बालको के पक्ष में फैसला सुनाने वाले जज पी सैम कोसी को इस मामले की सुनवाई से भी अलग रहने के निर्देश दिए हैं.
वहीं बालको प्रबंधन का कहना है कि मामला अदालत में है और अदालत का जो भी दिशा निर्देश मिलेगा, उसका पालन किया जाएगा.
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