इस्लामिक स्टेट से अधिक ख़तरनाक अल क़ायदा?

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- Author, शशांक जोशी
- पदनाम, सीनियर रिसर्च फेलो, रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज़ इंस्टीट्यूट
अमरीकी रक्षा मंत्री चक हेगल ने इस्लामिक स्टेट के चरमपंथियों के बारे में बताते हुए कुछ ख़ास तरह के शब्दों का इस्तेमाल किया है.
उन्होंने इस्लामिक स्टेट के 'सब कुछ बर्बाद कर देने वाले रणनीतिक मंसूबों' को लेकर चेताया है. चक हेगल ने इस चरमपंथी गुट को इराक़ या अन्य जगहों पर 'अमरीकी हितों पर मंडरा रहा ख़तरा' करार दिया है और कहा कि ये 'हमारे देखे सुने से ऊपर' है.
क्या ये इस्लामिक स्टेट के ख़तरे का लापरवाही से बढ़ा चढ़ा कर किया गया आकलन है या चक हेगल सही कह रहे हैं?
रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज़ इंस्टीट्यूट के सीनियर रिसर्च फेलो शशांक जोशी ने इस्लामिक स्टेट के ख़तरों का आकलन किया है.
यूरोपीय मुसलमान
पहले भी अमरीका ने कई तरह के प्रभावशाली चरमपंथी गुटों का सामना किया है. इनमें से कई तो अमरीकी हितों को नुकसान पहुँचाने में कामयाब रहे.
इन चरमपंथी गुटों में अल क़ायदा सबसे महत्वपूर्ण है जिसने कई मौक़ों पर अमरीका को चोट पहुँचाई है. इसके ठीक उलट इस्लामिक स्टेट ने अमरीकी ज़मीन पर कभी भी हमला नहीं किया है और केवल एक अमरीकी नागरिक, पत्रकार जेम्स फॉली की जान ली है.

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इस्लामिक स्टेट के साथ लड़ने वाले एक फ़्रांसीसी ने मई के महीने में ब्रसेल्स के यहूदी म्यूज़ियम में चार लोगों की जान ले ली थी लेकिन इसके पीछे 'आईएस' का हाथ होने को लेकर पक्के सबूत नहीं मिले.
इस्लामिक स्टेट के कैडर से हज़ारों यूरोपीय नागरिकों की संभावित वापसी वहाँ की सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती पैदा कर दी है. लेकिन ये नई समस्या नहीं है.
नवंबर 2013 की शुरुआत में सुरक्षा विश्लेषक थॉमस हेगामर ने इशारा किया था कि आधुनिक इतिहास के किसी भी संघर्ष में यूरोपीय मुसलमानों की अब तक की सबसे बड़ी भागीदारी देखी जा रही है.
मामूली ख़तरा

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जब तक कि हेगल के पास कोई ख़ुफ़िया जानकारी न हो, ऐसा लगता है कि इस्लामिक स्टेट के ख़तरे को बढ़ा चढ़ा कर पेश किया जा रहा है. यहाँ तक कि इराक़ में इरबिल और बग़दाद में मौजूद अमरीकी सुरक्षा बलों को मामूली ख़तरा है.
हेगल ने 'आसन्न' शब्द का इस्तेमाल किया है. शायद हेगल का इरादा आने वाले दिनों में होने वाले अमरीकी हमले की क़ानूनी औचित्य तैयार करना हो.
दूसरी तरफ़ इस बात को भी स्वीकार किया जाना चाहिए कि इस्लामिक स्टेट आधुनिक इतिहास का सबसे ताक़तवर जिहादी आंदोलन है. फ़्रांसीसी विदेश मंत्री के मुताबिक़ इस गुट के पास अरबों डॉलर और 10 से 17 हज़ार लड़ाके हैं जिनमें तक़रीबन दो हज़ार यूरोपीय हैं.
हाइब्रिड आंदोलन

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इस्लामिक स्टेट का दो देशों में 35 हज़ार वर्ग मील की ज़मीन पर नियंत्रण है. इराक़ी सेना से ज़ब्त किए गए आधुनिक अमरीकी हथियारों इनके क़ब्ज़े में है. यहाँ उन्हें सद्दाम हुसैन के वफ़ादार रहे पुराने अफ़सरों और कुछ सुन्नी क़बीलों का समर्थन हासिल है.
इसलिए इस्लामिक स्टेट को महज एक चरमपंथी समूह नहीं करार दिया जा सकता है. ये एक हाइब्रिड आंदोलन की तरह है जिसकी राष्ट्र निर्माण को लेकर कुछ इरादे हैं और एक पारंपरिक फौज भी है.
वे अल क़ायदा की तुलना में अधिक लचीले हैं, साजो सामान और ताक़त के लिहाज से भी उन्हें बढ़त हासिल है. इससे चोट पहुँचाने की उनकी ताक़त और बढ़ जाती है.
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