इस्लामिक स्टेट अब इंडोनेशिया में?

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चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट के जेहादी लड़ाके इराक़ और सीरिया को धीरे-धीरे निगल रहे हैं. इंडोनेशिया सरकार को डर है कि यह संगठन अब दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम देश इंडोनेशिया में अपनी वैचारिक ज़मीन तैयार कर रहा है.

जकार्ता, केंद्रीय जावा के सोलो और पश्चिमी नूसा तेनग्गरा में हुई बैठकों में कट्टर इंडोनेशियाई संगठनों ने इस्लामिक स्टेट को अपना समर्थन जताया है.

बैठकों के साथ ही कई जगह नौजवानों ने आईएस के झंडे के साथ गांवों और क़स्बों में नारेबाज़ी की और प्रदर्शन किए हैं.

पिछले हफ़्ते यूट्यूब पर एक वीडियो में इंडोनेशियाई पुरुष आईएस के लिबास में दिखे जो देशवासियों को इस मुहिम से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रहे थे.

माना जा रहा है कि ये तस्वीरें सीरिया की हैं और वीडियो में जिस नेता का ज़िक्र है वह अबू मुहम्मद है, जिसे इंडोनेशियाई पुलिस चरमपंथी कार्रवाइयों की वजह से तलाश रही है.

इस अपुष्ट वीडियो ने सरकारी महकमों में चिंता पैदा कर दी है.

आईएस का समर्थन

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इंडोनेशिया ने पिछले दशक में अतिवादी संगठनों के ख़िलाफ़ कड़ी लड़ाई लड़ी है- ऐसी लड़ाई जिसे कमोबेश कामयाब माना जाता है.

चरमपंथी नेटवर्क छिन्न-भिन्न कर दिए गए और बाली धमाकों के लिए ज़िम्मेदार जेमा इस्लामिया संगठन के आध्यात्मिक नेता अबू बकर बशीर जेल में हैं. मगर पिछले महीने उन्होंने जेल से ही आईएस के हक़ में समर्थन का ऐलान कर दिया.

बशीर के समर्थक अतिवादी संगठनों में उभार से चिंताजनक बात होगी.

इस महीने की शुरुआत में इंडोनेशिया ने पूरे द्वीप समूह में आईएस की विचारधारा पर पाबंदी लगा दी थी.

इंडोनेशिया के राजनीतिक, क़ानूनी और रक्षा मामलों के मंत्री जोको सुयांतो का कहना है, "आईसिस (इस्लामिक स्टेट या आईएस) की विचारधारा पंचशील के ख़िलाफ़ है जो इंडोनेशिया के बहुलवादी और बहु सांस्कृतिक समाज का आधार है."

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सरकार का कहना है कि वो आईएस से जुड़ी सामग्री वाली वेबसाइटें ब्लॉक करेगी और मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया की यात्रा पर जा रहे इंडोनेशियाई नागरिकों पर नज़र रखेगी ताकि वो आईएस से न जुड़ सकें.

सरकारी कोशिशें

इंडोनेशिया उनकी नागरिकता रद्द करने के बारे में सोच रही है, जिन्होंने इस संगठन से समर्थन जताया है.

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मगर सीरिया में आईसिस के लिए लड़ने वाले धर्मगुरु अफ़ीफ़ अब्दुल माजिद ने सोलो में कहा था कि वो नागरिकता गंवाने से नहीं डरते.

हालांकि नरमपंथी इंडोनेशियाई मुसलमान इस विचारधारा को ठुकरा रहे हैं.

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इंडोनेशिया उलेमा काउंसिल के चेयरमैन दीन स्यामसुद्दीन कहते हैं, "आईएस जो करता है वह इस्लाम नहीं है. इस्लाम शांति सिखाता है और हिंसा नहीं चाहता."

इंडोनेशिया के चरमपंथ निरोधक बल के अधिकारी हैरी पुरवांतो कहते हैं, "हमारी चिंता उन लोगों को लेकर है जो इराक़ और सीरिया में लड़ने गए थे और अब लौट आए हैं."

फिलहाल इंडोनेशियाई क़ानून ऐसे संगठनों में नई भर्ती या विचारधारा के प्रसार पर रोक नहीं लगाता.

पुरवांतो के मुताबिक़, "हमें क़ानून बदलना होगा वरना हम कमज़ोर रहेंगे."

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