हिंसा पर इसराइली, फ़लस्तीनी औरतें..

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ग़ज़ा में इसराइली सैन्य कार्रवाई और हमास के रॉकेट हमलों से महिलाएँ बुरी तरह प्रभावित हैं. दोनों तरफ़ की औरतें मौत को रोज़ पास से गुज़रते देख रही हैं.
मगर दोनों की ख़्वाहिशें, दोनों के नज़रिए अलग हैं.
यह ध्यान देने वाली बात है कि अब तक 1,700 से ज़्यादा फ़लस्तीनियों की मौत हो चुकी है. दूसरी ओर इसराइल के 66 सैनिक मारे गए हैं.

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इसराइल की जूडी नीमान और गज़ा की मरम हबीस वहीद चाहती हैं कि जल्द से जल्द यह जंग रुके और वो चैन से जी सकें. पढ़ें उनकी ज़ुबानी उनके अनुभव.
जूडी नीमान, इसराइल
पिछले 25 साल से यहां के सभी घरों में एक सुरक्षा वाला कमरा है. जब भी सायरन बजता है, हम सब उस कमरे की ओर भागते हैं. अगर कोई रॉकेट हमारे घर पर गिरता है, तो हम बच जाते हैं.
यहां हमारे पास सुरक्षित जगह जाने के लिए एक मिनट का वक़्त होता है, लेकिन कुछ जगहों पर तो लोगों के पास 15 से 30 सेकेंड ही होते हैं.

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जब हम घर से बाहर होते हैं तो हमें कुछ अहतियात बरतने को कहा जाता है.
मेरा मानना है कि अगर दोनों पक्ष चाहें तो संघर्ष विराम हो सकता है.
मैं और मेरा परिवार चाहते हैं कि जब तक सुरंगें नेस्तनाबूद नहीं होतीं, तब तक संघर्ष विराम नहीं होना चाहिए.
हमास की नींव इसराइल के विनाश के लिए पड़ी थी लेकिन इस पर क्या कोई राजनीतिक सहमति बन पाएगी, मुझे संदेह है.
मरम हबीस वहीद, ग़ज़ा
मैं 22 साल की हूं और मैं ग़ज़ा पट्टी में रहती हूं. यहां हर मिनट हालात बदतर हो रहे हैं.
हम अपने अधिकार के लिए इतना संघर्ष कर रहे हैं और अपने बच्चों, औरतों और पुरुषों को दफ़ना रहे हैं.

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इसराइल मस्ज़िद, स्कूलों, खाली घरों और अस्पताल पर निशाना साध रहा है. आख़िर यह कैसा अपराध है?
मैं रोज़ मरते हुए लोगों को देखती हूं. हम चाहते हैं कि हमारे अधिकारों को स्वीकार किया जाए और हमारे साथ सामान्य लोगों की तरह बर्ताव हो.
मैं चाहती हूं कि पूरी दुनिया यह देखे कि इसराइल ने यहां किस तरह का अपराध किया है.
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