ग़ज़ा में मानवीय स्थिति गंभीर: संयुक्त राष्ट्र

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संयुक्त राष्ट्र के मानवीय सहायता मामलों की प्रमुख वेलेरी एमोस ने ग़ज़ा की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है.

उनका कहना है कि संघर्ष के कारण ग़ज़ा का क़रीब 44 फ़ीसदी हिस्सा फ़लस्तीनियों की पहुंच से बाहर है और वहां रहने वाले लोग रोटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

अधिकारियों का कहना है कि पिछले दो हफ़्ते से जारी हिंसा के कारण 710 से ज़्यादा फ़लस्तीनियों और 30 इसराइली नागरिकों की मौत हो चुकी है.

इस बीच, इसराइल की ओर से ज़मीनी और हवाई कार्रवाई जारी है. हमास के भी इसराइल की ओर रॉकेट हमलों में लगातार तेज़ी आ रही है.

इसराइल ने बीती आठ जुलाई को ग़ज़ा की ओर से हो रहे रॉकेट हमलों को रोकने के मक़सद से सैन्य अभियान की शुरुआत की थी.

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वेलेरी एमॉस ने गुरुवार को कहा, ''इस समय क़रीब एक लाख अठारह हज़ार लोग ऐसे हैं जो संयुक्त राष्ट्र के स्कूलों में शरण लिए हुए हैं. लोगों के लिए खाने की कमी है. पानी भी एक गंभीर समस्या है.''

उड़ानों पर प्रतिबंध

इस बीच, अमरीका की फेडरल एविएशन अथॉरिटी ने तेल अवीव की ओर उड़ने वाली एअरलाइनों पर लगा प्रतिबंध हटा लिया है.

यह प्रतिबंध मंगलवार को लगाया गया था. लेकिन तमाम यूरोपीय एयरलाइंस अभी तेल अवीव की ओर जाने से बच रही हैं.

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इसराइल के प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू ने गुरुवार को निर्दोष फ़लस्तीनी नागरिकों की मौत के लिए खेद जताया लेकिन उनका कहना था कि इसके लिए हमास ज़िम्मेदार है.

इसबीच, इस्लामी चरमपंथी समूह हमास के नेता ख़ालिद मिशाल ने कहा है कि ग़ज़ा में संघर्ष विराम तब तक लागू नहीं हो सकता है जब तक इसराइल की घेरेबंदी ख़त्म नहीं हो जाती.

हमास द्वारा इसराइली सैनिक गिलाड शालित के अपहरण के बाद इसराइल ने साल 2006 में ग़ज़ा पट्टी पर प्रतिबंध लगा दिया था.

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