हाफ़िज़ सईद इंटरव्यू-3: अंतरराष्ट्रीय अदालत में जाने को तैयार

जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफ़िज़ सईद

इमेज स्रोत, Reuters

जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफ़िज़ सईद ने बीबीसी से हुई ख़ास बातचीत में कहा कि वो मुंबई हमले के मामले में किसी भी अंतरराष्ट्रीय अदालत का सामना करने को तैयार हैं, बशर्ते उससे पहले यह साबित किया जाए कि पाकिस्तान की अदालतें फ़ैसला देने के काबिल नहीं हैं.

उन्होंने बीबीसी उर्दू संवाददाता शुमैला जाफरी से कहा कि पाकिस्तान के हर अदालत ने उन्हें बेकसूर ठहराया है.

<link type="page"><caption> हाफ़िज़ सईद से बातचीत का पहला अंश</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2014/06/140630_hafiz_saeed_dismissed_american_sanctions-sr.shtml" platform="highweb"/></link>

मुंबई हमलों की अंतरराष्ट्रीय जाँच पर हाफ़िज़ सईद

इंडिया पाकिस्तानी अदालतों के फ़ैसलों को स्वीकार नहीं कर रहा है क्योंकि अदालतों ने मुझे मुंबई हमलों के मामलों में बरी कर दिया है. अदालत ने माना है कि मेरी जमात का इस हमले से कोई संबंध नहीं है लेकिन अफ़सोस है कि हमारे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला इंडिया नहीं मानता.

<link type="page"><caption> हाफ़िज़ सईद से बातचीत का दूसरा अंश</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2014/06/140630_hafiz_saeed_dismissed_american_sanction_part2_sr.shtml" platform="highweb"/></link>

मैंने हमेशा क़ानून और इंसाफ़ का रास्ता अख़्तियार किया है. इंडिया और अमरीका के कहने पर मुझे बार-बार गिरफ़्तार किया गया. मैं हर बार अदालतों में गया और अदालतों ने मुझे राहत दी. पाकिस्तान की हुकूमतें तो हमेशा दबाव का शिकार रही हैं. हुकूमत इंडिया से दोस्ती चाहती थी और इसके लिए अमरीका का दबाव भी था. लेकिन पाकिस्तान में आज़ाद अदालत है और उसने हमेशा मेरे हक़ में फ़ैसला दिया है.

जमात उद दावा के प्रमुख हाफ़िज़ सईद

इमेज स्रोत, Reuters

मैं दुनिया की किसी भी अदालत में जाने को तैयार हूँ लेकिन पहले यह साबित करना पड़ेगा कि पाकिस्तान की अदालतें इस काबिल नहीं हैं कि वे फ़ैसला दे सकें.

साथ ही ये दुनिया में साबित किया जाए कि पाकिस्तान में कोई न्याय व्यवस्था नहीं है. तो उसके बाद मैं किसी का सामना करना को तैयार हूँ. लेकिन अगर हम आज़ाद मुल्क़ हैं, हमारी न्याय व्यवस्था स्वतंत्र है तो हमें इस प्रोपगैंडे का निशाना क्यों बनाया जाए और पाकिस्तान की न्याय व्यवस्था पर शक क्यों किया जाए.

<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml " platform="highweb"/></link> करें. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi " platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi " platform="highweb"/></link> पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)</bold>