थाईलैंड में मार्शल लॉ, अधिकार सेना के हाथ में

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थाईलैंड में सरकार और विपक्ष के बीच कई महीनों से जारी तनातनी के बाद सेना ने देश में मार्शल लॉ लगा दिया है और इसे लागू करने के लिए बड़े पैमाने पर अधिकार अपने हाथ में ले लिए हैं.
सोशल मीडिया के ज़रिए मिल रही ख़बरों में कहा गया है कि सैनिकों ने टेलीविज़न स्टेशनों पर नियंत्रण कर लिया है.
थाईलैंड के सेना प्रमुख प्रयुध चान ओचा ने एक बयान जारी कर कहा है, ''शांति-व्यवस्था बनी रहे, इसलिए ये क़दम उठाया गया है. जितनी जल्दी हो सके, सभी पक्षों में सुलह हो जाए, इसलिए ये क़दम उठाया गया है.''
सेना प्रमुख उस क़ानून का हवाला भी दे रहे थे जिसके आधार पर उन्होंने मार्शल लॉ लगाने का फ़ैसला किया है.
इससे पहले, सेना द्वारा संचालित टीवी स्टेशन पर एक घोषणा में कहा गया, ''लोगों को घबराने की ज़रूरत नहीं है. लोग अपना जीवन सामान्य तरीके से जी सकते हैं.''
सरकार समर्थकों के भड़कने की आशंका
थाईलैंड में ये सारा घटनाक्रम ऐसे समय हो रहा है जब देश में लम्बे समय से राजनीतिक संकट जारी है जहां सरकार और विपक्ष के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है.
इस महीने की शुरुआत में ही एक अदालत ने प्रधानमंत्री यिंगलक चिनावाट और उनकी कैबिनेट के कई मंत्रियों को पद से हटने का आदेश दिया था.
वहीं विपक्ष की मांग है कि देश की सत्ता एक गैर-निर्वाचित प्रशासन को सौंप दी जाए जिसके पास देश का संविधान दोबारा लिखने का अधिकार भी हो.
संवाददाताओं का कहना है कि मार्शल लॉ लगाने की वजह से सरकार समर्थक भड़क सकते हैं.
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