पाकिस्तानी मीडिया में छाई 'कट्टरपंथी मोदी' की जीत

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- Author, अशोक कुमार
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भारत और पाकिस्तान के उर्दू अख़बारों में भाजपा और उसके प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की ही धूम मची है.
आम चुनावों में भाजपा की शानदार जीत पर कोई हैरान है तो कोई उन्हें ज़िम्मेदारी का अहसास करा रहा है, जबकि कई अख़बार उनके अतीत पर सवाल उठा रहे हैं.
दिल्ली से छपने वाले दैनिक सहाफ़त का संपादकीय है- आश्चर्यजनक चुनावी नतीजे. अख़बार लिखता है कि ऐसे नतीजे आएंगे, ये उम्मीद भाजपा को भी नहीं थी. यही नहीं आरएसएस ने जो अपना सर्वे कराया, उसमें कहा गया कि बीजेपी को 218 से ज़्यादा सीटें मिलनी की उम्मीद नहीं है जबकि कम से कम इनकी संख्या 189 हो सकती है.
अख़बार कहता है कि मोदी ने गुजरात के विकास के झूठ को जिस तरह मीडिया के जरिए सच बनाकर पेश किया, मतदाता उससे प्रभावित हो गए जबकि दूसरी तरफ़ कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं में वो जोश दिखा ही नहीं जिसकी ऐसे मौकों पर ज़रूरत होती है.
मोदी की आज़माइश
वहीं हिंदोस्तान एक्सप्रेस लिखता है कि इस बार के चुनाव में मोदी की सबसे ज़्यादा मदद संघ परिवार ने की, चुनाव प्रचार से लोगों को पोलिंग स्टेशनों तक लाने में उसने अपनी पूरी ताकत झोंक दी. इसलिए नतीजे मोदी के पक्ष में आए.
अख़बार के अनुसार अब संघ को लगने लगा है कि वो अपने एजेंडे को अमल में ला सकता है. वो धारा 370 को ख़त्म करने, राम मंदिर बनाने और कॉमन सिविल कोड को लाने की कोशिश कर सकते हैं जबकि अब तक भाजपा इन सभी मुद्दों का इस्तेमाल सिर्फ़ अपनी ज़रूरत के मुताबिक़ करती रही है.
हैदराबाद से छपने वाला दैनिक एतमाद कहता है कि मोदी को जितनी कामयाबी मिली है, उतनी ही ज़्यादा उनकी अब आज़माइश होगी. अख़बार कहता है कि मोदी ने हमेशा सुशासन की बात है, अब वो साबित करें कि बेहतर प्रशासन कैसे दिया जाता है.
अख़बार के अनुसार जनता ने उन्हें रिश्वत खोरी, भ्रष्टाचार और कुशासन दूर करने के लिए जनादेश दिया है, ऐसे में वो जनता को निराशा करने का जोखिम नहीं उठा सकते हैं. अख़बार कहता है कि चुनाव के दौरान बहुत बड़ी बड़ी और अच्छी अच्छी बातें कही जा सकती हैं लेकिन चुनाव के बाद आपको उनके प्रति गंभीर होना होगा.
मोदी की आलोचना
उधर पाकिस्तान के सभी बड़े अखबारों ने आम चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की जीत को अपनी पहली ख़बर बनाया और पहले पन्ने पर उस तस्वीर को भी जगह दी जिसमें नरेंद्र मोदी जीत के बाद अपनी मां का आशीर्वाद ले रहे हैं.
कराची समेत कई शहरों ने निकलने वाले जंग ने सुर्ख़ी लगाई-भारतीय चुनावों में बीजेपी कामयाब, कांग्रेस का सफ़ाया तो नवाए वक्त ने हेडलाइन दी- कट्टरपंथी बीजेपी और उसके सहयोगियों को मिला बहुमत.

साथ ही बॉलीवुड के कई चेहरों की तस्वीरें भी दी हैं जिनमें जीतने वालों में विनोद खन्ना, बप्पी लाहिरी, हेमा मालिनी जैसे नाम शामिल हैं तो हारने वालों में जया प्रदा, राज बब्बर और राखी सावंत.
वहीं बेहद दक्षिणपंथी माने जाने वाले कराची से प्रकाशित अख़बार <bold>उम्मत</bold> ने भारतीय चुनावों से जुड़ी ख़बर को सुर्ख़ी लगाई है- भारत ने गुजरात के <link type="page"><caption> कसाई को प्रधानमंत्री चुना</caption><url href="http://ummatpublication.com/2014/05/17/page-1.php" platform="highweb"/></link> लिया है.
अख़बार की रिपोर्ट में चुनावी नतीजों का विस्तार से विवरण देने के साथ साथ मोदी को गुजरात में 2002 के दंगों के दौरान मुसलमानों के कत्ले आम का ज़िम्मेदार भी बताया है.
बड़े फैसले की उम्मीद
दैनिक दुनिया का कहना है कि मोदी की जीत के बाद मुसलमान सहम कर रह गए हैं. इस अख़बार ने भी मोदी के दंगों से जुड़े अतीत पर सवाल उठाए हैं और लिखा है कि मोदी को ‘कसाई’ माना जाता है.
अख़बार के मुताबिक मोदी ने उसी आरएसएस के साये में अपनी राजनीति शुरू की है जो इटली के तानाशाह मुसोलिनी और जर्मनी के हिटलर से बहुत प्रेरित है.
दूसरी तरफ इसी अख़बार ने एक पूरा पेज नरेंद्र मोदी को समर्पित किया है और उनकी बड़ी सी तस्वीर के साथ बड़े बड़े अक्षरों में लिखा है – मोदी ने मार लिया मैदान.
एक बड़े से लेख में नरेंद्र मोदी के जीवन और उनकी उपलब्धियों का बखान करते हुए अख़बार लिखता है कि देखना ये है कि पाकिस्तान को लेकर वो किस तरह की नीतियां अपनाते हैं.
अख़बार के अनुसार मोदी का संबंध हिंदू राष्ट्रवादी पार्टी से है, इसलिए उन पर दबाव तो होगा, लेकिन भारत-पाकिस्तान रिश्तों को लेकर कोई राष्ट्रवादी हिंदू नेता ही बड़ा कदम उठा सकता है, इससे पहले वाजपेयी ऐसा कर चुके हैं.
क्रिकेट सीरिज़ बहाल

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अन्य ख़बरों में भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट सीरिज़ की बहाली पर जंग ने अपने संपादकीय में ख़ुशी जताई है और लिखा है कि दोनों देशों के बीच 2015 से 2023 के बीच होने वाली छह क्रिकेट श्रंखलाओं में से चार की मेजबानी पाकिस्तान करेगा और दो सीरिज़ भारत में होंगी.
वहीं नवाए वक्त ने चीन की इस पेशकश पर संपादकीय लिखा है कि वो कश्मीर मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करने को तैयार है. अख़बार लिखता है कि यकीनन चीन की ईमानदारी पर किसी संदेह की गुंजाइश नहीं लेकिन जाहिर है कि भारत उसकी मध्यस्थता की पेशकश ठुकरा देगा, इसलिए मौजूदा हालात में जरूरत इस बात की है कि चीन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वीटो पावर वाले सदस्य के रूप में कश्मीर के संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के अनुसार हल के लिए प्रभावी भूमिका अदा करे.
इसके अलावा एक्सप्रेस का संपादकीय है- अफ़ग़ानिस्तान में ड्रोन हमला, पाकिस्तान रहे होशियार. अख़बार कहता है कि बुधवार को अफ़ग़ान प्रांत नंगर में चरमपंथी ठिकानों पर ड्रोन हमला हुआ, लेकिन क्या पता पाकिस्तान को फिर इनका निशाना बनाया जाए. तालिबान से बातचीत की कोशिशों के चलते अमरीका ने फिलहाल पाकिस्तान में ड्रोन हमले रोके हुए हैं.
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