मोदी को लेकर अभी से क्यों नरमी: पाक मीडिया

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- Author, अशोक कुमार
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाकिस्तान के उर्दू मीडिया में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर उठ रहे सवाल जहां चर्चा का विषय है वहीं भारतीय आम चुनावों से जुड़ी ख़बरों को भी ख़ासी कवरेज मिल रही है, जबकि भारत के उर्दू अखबारों में नरेंद्र मोदी और उनकी सियासत पर ख़ूब नुक्ताचीनी हो रही है.
हिंदोस्तान एक्सप्रेस ने भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के बनारस से पर्चा भरने और इस दौरान उमड़े लोगों की टीवी चैनलों पर हुई लाइव करवेज पर आपत्ति जताई है.
अख़बार कहता है कि ये लाइव कवरेज ऐसे दिन हो रही थी जब देश की 117 लोकसभा सीटों और यूपी की 12 लोकसभा सीटों पर वोट डाले जा रहे थे.
अख़बार कहता है कि नरेंद्र मोदी की शान में क़सीदे पढ़ने के लिए मानो न्यूज़ चैनलों पर एंकरों के बीच मुक़ाबला चल रहा था, लेकिन ये किसी ने नहीं सोचा कि इससे मतदान पर असर पड़ सकता है, जो ग़ैर जिम्मेदाराना है.
'सेक्युलर ताक़तों पर ज़िम्मेदारी'
वहीं हमारा समाज ने लिखा है कि दरअसल नरेंद्र मोदी आरएसएस और बीजेपी की मजबूरी हैं और उनके अलावा पार्टी में ऐसा कोई दूसरा नेता नहीं बचा है.
इसलिए तमाम विरोधियों के बावजूद नरेंद्र मोदी को प्रधामंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर उतारा गया है, लेकिन अख़बार कहता है कि मोदी इस पद तक पहुंचने में कामयाब हो पाएंगे, इसकी संभावना कम ही लगती है.
दिल्ली से छपने वाले रोज़नामा सहाफ़त का संपादकीय है- सेक्युलर ताक़तें कब और कैसे एकजुट होंगी.
अख़बार कहता है कि विडंबना ये है कि सेक्युलर होने का दावा करने वाली सियासी ताक़तें अभी तक एकजुट नहीं हुई हैं और आगे चलकर ये एकजुट हो पाएंगी, ऐसा भी पूरे यकीन से नहीं कहा जा सकता है.
अख़बार के अनुसार इन हालात अगर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में भाजपा की सरकार बनती है तो इसके लिए पूरी तरह से सेक्युलर ताक़तें ही ज़िम्मेदार होंगी.
विवादों में आईएसआई

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रुख़ पाकिस्तान का करें तो जंग ने लिखा कि उसके समूह के टीवी चैनल जियो न्यूज़ का प्रसारण धौंस और धमकी से कराची, हैदराबाद, क्वेटा, मुल्तान डेरा इस्माइल ख़ान, मरी, ओकाडा और पेशावर में बंद करा दिया गया है जबकि कई जगह पर चैनलों की सूची में उसे बहुत बाद में रखा गया है.
ये सब इसलिए कि जियो न्यूज़ के संपादक हामिद मीर ने कहा है है कि उन पर हुए हमले के पीछे किसी और का नहीं, बल्कि देश की सबसे बड़ी खुफिया एजेंसी आईएसआई के मुखिया का हाथ हो सकता है.
अख़बार कहता है कि ये कोई नई बात नहीं है क्योंकि आईएसआई लोगों को प्रताड़ित करती है, ये बात आईएसआई के एक पूर्व प्रमुख से लेकर पूर्व सैन्य शासक जनरल मुशर्रफ़ तक स्वीकार कर चुके है.
अख़बार कहता है कि जब पूरी दुनिया में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दायरा बढ़ रहा है तो पाकिस्तान में किसी चैनल पर पाबंदी लगाने कोशिशों से ये कैसा संदेश देने की कोशिश हो रही है.
वहीं दैनिक औसाफ़ में तहरीके इंसाफ़ पार्टी के प्रमुख इमरान ख़ान का ये बयान है कि जिस तरह बिना सबूत आईएसआई और उसके प्रमुख पर आरोप लगाए गए हैं, उससे एक राष्ट्रीय संस्था की बदनामी हुई है.
रोज़नामा ख़बरें ने प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के इस बयान का स्वागत किया है जिसमें उन्होंने कहा है कि चुनी हुई सरकार और सेना. पाकिस्तान की तरक़्क़ी के लिए एकजुट हैं.
अख़बार कहता है कि सेना प्रमुख की तरफ़ से इस बयान का स्वागत किए जाने से पिछले कुछ दिनों से जारी इन अफ़वाहों पर रोक लगेगी कि सरकार और पाकिस्तानी फ़ौज के बीच मतभेदों के कारण नए संकट की तरफ़ जा रहा है.
चर्चा में मोदी
दैनिक नवाए वक्त ने भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित के हालिया बयान की आलोचना की है.
इस बयान में उन्होंने भाजपा की तरफ़ से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के इस बयान को स्वागतयोग्य बताया था कि भारत पाकिस्तान समेत सब देशों से संतुलित संबंध रखना चाहता, मतलब ‘न कोई हमें धमकाए और न हम ऐसा करें.’

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अख़बार कहता है कि चुनाव नतीजे आने से पहले ही मोदी को प्रधानमंत्री समझ लेने के अब्दुल बासित के बयान से भाजपा तो ख़ुश होगी, लेकिन दूसरी पार्टियों को ये बात हज़म नहीं होगी.
संपादकीय में कहा गया है कि न तो अभी मोदी का प्रधानमंत्री बनना पक्का है और न ही कांग्रेस का हारना, फिर अभी से भाजपा और मोदी को लेकर इतना नरम होने की क्या ज़रूरत है जबकि मुसलमानों और पाकिस्तान को लेकर उनकी सोच से सब वाक़िफ़ हैं.
वहीं एक्सप्रेस की ख़बर में टाइम पत्रिका की ओर से जारी दुनिया के 100 प्रभावशाली लोगों की सूची का जिक्र है जिसमें आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल पहले स्थान पर, नरेंद्र मोदी दूसरे स्थान पर और पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई 13वें स्थान पर हैं.
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