यूज़र्स के अनुरोध पर सर्च रिज़ल्ट बदले गूगल: ईयू कोर्ट

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यूरोपीय संघ की सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि गूगल को आम नागरिकों के अनुरोध पर अपने सर्च रिज़ल्ट में बदलाव करना चाहिए.
लक्ज़मबर्ग में यूरोपियन यूनियन <link type="page"><caption> कोर्ट ऑफ़ जस्टिस</caption><url href="http://curia.europa.eu/jcms/upload/docs/application/pdf/2014-05/cp140070en.pdf" platform="highweb"/></link> ने कहा कि "अप्रांसगिक" और पुरानी पड़ चुकी जानकारी को लोगों के अनुरोध पर हटा दिया जाना चाहिए.
ये मामला स्पेन के मारियो कोस्टा गोंज़ालेज़ नाम के एक व्यक्ति ने दायर किया था. उन्होंने शिकायत की थी कि उनके गिरवी रखे घर की नीलामी का नोटिस गूगल पर सर्च करने पर आ रहा है और इससे उनकी निजता का हनन होता है.
गूगल ने कहा है कि वो इस फ़ैसले से "निराश" है. गूगल के एक प्रवक्ता ने कहा "हमें इस फ़ैसले के असर का आकलन करने के लिए वक़्त चाहिए."
गूगल का कहना है कि वो जानकारी पर नियंत्रण नहीं रखती, सिर्फ़ इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी के लिंक मुहैया कराती है. इससे पहले गूगल कहती रही है कि डाटा हटाने के लिए उसे मजबूर करना सेंसरशिप की तरह है.
हालांकि यूरोपीय संघ की न्याय आयुक्त विविएन रीडिंग ने <link type="page"><caption> फ़ेसबुक पर एक पोस्ट में</caption><url href="https://www.facebook.com/permalink.php?story_fbid=304206613078842&id=291423897690447" platform="highweb"/></link> अदालत के फ़ैसले का स्वागत किया है.
उन्होंने कहा, "ये फ़ैसला यूरोप के लोगों की निजी जानकारी की सुरक्षा के लिए साफ़ जीत है."
'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता'
यूरोपीय आयोग ने साल 2012 में "भूलने का अधिकार" देने के ए<link type="page"><caption> क क़ानून</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/news/technology-16677370" platform="highweb"/></link> का प्रस्ताव रखा था. ये क़ानून अमल में आने का मतलब होता कि निजी जानकारी को लेकर यूरोपीय संघ के निर्देशों का पालन करते हुए संबंधित सर्च इंजन को सर्च के कुछ नतीजे हटाने पड़ते.
मंगलवार को दिए अपने फ़ैसले में अदालत ने कहा कि लोगों को ये अनुरोध करने का अधिकार है कि अगर ऐसा लगता है कि उनसे जुड़ी जानकारी "अपर्याप्त या अप्रासंगिक है" तो हटा दी जाए.
मारियो कोस्टा गोंजालेज़ ने शिकायत की थी कि गूगल में उनका नाम सर्च करने पर 16 साल पहले का अख़बार का एक लेख सामने आता है जिसमें कहा गया था कि क़र्ज़ न चुकाने पर उनका घर नीलाम कर दिया जाएगा.
उनका कहना था कि मामला सुलझ चुका है और अब इसका उनसे कोई ताल्लुक नहीं होना चाहिए.
सेंसरशिप के ख़िलाफ़ अभियान चलाने वाले समूह इंडेक्स ने फ़ैसले की आलोचना की है. इंडेक्स का कहना है कि ये फ़ैसला "अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मूलभूत अधिकार का उल्लंघन करता है."
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