नाइजीरियाई लड़ाकों के खिलाफ ट्विटर पर जंग

नाइजीरिया में आम लोग

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नाइजीरिया में पिछले कुछ दिनों के दौरान हुए दो भीषण हमलों में 100 से अधिक लोग मारे गए हैं. इसके साथ ही सोशल नेटवर्किंग साइट पर #बोर्नोमैसकर तेजी से ट्रैंड करने लगा है. इस हैशटैग का मकसद नाइजीरियाई नागरिकों और पूरी दुनिया को वहां के हालात से रूबरू करना है.

नाइजीरिया की राजधानी अबूजा में पत्रकार सैम हार्ट कहते है, "लोग जानवरों की तरह मारे जा रहे हैं और ऐसा लगता है कि किसी को भी इसकी परवाह नहीं है."

वो आगे कहते हैं, "नाइजीरियाई भी हमारी तरह ही हैं, और जो लोग मारे गए हैं वो इंसान हैं."

हार्ट और उनके कुछ दोस्तों ने मंगलवार को ट्विटर पर एक हैशटैग की शुरुआत की. उनकी कोशिश थी की उनका ये हैशटैग ट्रैंड कर जाए.

उन्हें उम्मीद थी कि लोगों के दबाव के चलते संघीय सरकार सक्रियता दिखाते हुए कुछ और कदम उठाएगी.

'अंतरराष्ट्रीय शर्म'

नाइजीरिया में ताजा हमले उत्तर-पूर्वी नाइजीरिया के राज्य बोर्नो के इज़हे और बामा में हुए हैं. कहा जा रहा है कि दोनों हमलों में <link type="page"><caption> इस्लामी समूह बोको हराम</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2014/02/140217_nigeria_boko_haram_dp.shtml" platform="highweb"/></link> का हाथ है.

बोको हराम का मकसद सरकार को हटाकर वहां एक इस्लामिक राज्य बनाना है. 2009 में शुरू हुए विद्रोह में अब तक 2,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं.

नाइजीरिया में सुरक्षाकर्मी

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इन हमलों को लेकर जो ट्विट आए उनमें लोगों का गुस्सा साफ तौर से देखा जा सकता था.

एक व्यक्ति ने लिखा कि निर्दोष लोग "कीड़ों की तरह मारे जा रहे हैं"- "चुपचाप बैठे रहना और इसे होने देना एक अंतरराष्ट्रीय शर्म का विषय है."

हालांकि ट्विटर पर कमेंट का मुख्य फोकस <link type="page"><caption> नाइजीरियाई सरकार</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/11/131106_nigeria_murder_nn.shtml" platform="highweb"/></link> पर ही है और माना जा रहा है कि हिंसा रोकने के लिए सरकार की कोशिशों में कमी रही है.

असुरक्षा का माहौल

इस हैशटैग को बढ़ावा देने वालों में अहमद रुफाई भी शामिल हैं. वो बताते हैं, अबूजा में सरकार का रुख "टालमटोल" वाला था. अहमद और उसके साथियों की मांग है कि हिंसा की निंदा और कार्रवाई का वादा करने के लिए एक आधिकारिक बयान जारी किया जाए.

फिलहाल इन हमलों को लेकर सरकारी प्रतिक्रिया यही रही है कि वो "लड़ाई जीत रहे हैं." देश के बजट का एक बड़ा हिस्सा इन लड़ाइयों पर ही खर्च हो जाता है.

सोशल मीडिया के जरिए ही बोर्नो राज्य से थोड़ी बहुत जानकारी मिल रही है. बोको हराम को हमला करने से रोकने के लिए कई महीनों से इंटरनेट और मोबाइल फोन कनेक्शन बंद कर दिए गए थे.

इस राज्य से <link type="page"><caption> ट्विट</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2014/02/140131_twitter_stolen_ssr.shtml" platform="highweb"/></link> करने वाले चंद लोगों में अहमदू भी हैं. वो बताते हैं कि इन प्रतिबंधों को अब हटा लिया गया है, लेकिन अभी भी कई लोग सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने से डर रहे हैं.

उन्होंने बताया, "मैं मुश्किल से ही रात में सो पाता हूं. मेरे ऊपर किसी भी समय हमला हो सकता है. यहां हर कोई ऐसा ही सोचता है. कोई भी सुरक्षित नहीं है."

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