बांग्लादेश: इस्लामी नेता को मिली फांसी की सज़ा

मोतीउर्रहमान निज़ामी

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बांग्लादेश की मुख्य इस्लामी पार्टी के एक नेता को हथियारों की तस्करी और अराजकता फैलाने के जुर्म में मौत की सज़ा सुनाई गई है.

जमात-ए-इस्लामी पार्टी के अध्यक्ष मोतीउर्रहमान निज़ामी को 13 अन्य लोगों के साथ पड़ोसी मुल्क भारत के राज्य असम में पृथकतावादियों को हथियारों की तस्करी का दोषी पाया गया है.

यह पूरा मामला वर्ष 2004 का है जब निज़ामी उद्योग मंत्री के पद पर क़ाबिज़ थे. तब बांग्लादेश के दक्षिणी बंदरगाह चिटगांग से हथियारों का ज़ख़ीरा बरामद किया गया था.

निज़ामी का कहना है कि वह इस मामले में सज़ा के विरुद्ध अपील करेंगे.

मुक़दमे और राजनीति

निज़ामी इसके अलावा वर्ष 1971 में बांग्लादेश की आज़ादी के दौरान युद्ध अपराध संबंधी आरोपों का अलग से सामना कर रहे हैं.

उस मामले में मुक़दमे का फ़ैसला आना अभी बाकी है और यदि इस मामले में दोषी पाए जाने पर भी उन्हें मौत की सज़ा सुनाई जा सकती है.

जमात-ए-इस्लामी पार्टी में निज़ामी के कई अन्य सहयोगियों को पहले ही युद्ध अपराधों के लिए दोषी क़रार दिया जा चुका है और कुछ को मौत की सज़ा हो चुकी है.

जमात-ए-इस्लामी पार्टी के कार्यकर्ता

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जमात-ए-इस्लामी के समर्थक इन मुक़दमों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करते रहे हैं जिनमें कई लोग मारे भी गए हैं.

पार्टी का कहना है कि यह सारे मुक़दमे राजनीति से प्रेरित हैं. मानवाधिकार समूहों का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप भी नहीं है.

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