कादर मुल्ला की फाँसी के बाद हुए प्रदर्शन

बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी के नेता कादर मुल्ला को फाँसी दिए जाने के बाद देश में प्रदर्शन हुए हैं. मुल्ला को गुरुवार रात फाँसी दी गई.

कादर मुल्ला को फाँसी
इमेज कैप्शन, बांग्लादेश में वर्ष 1971 में किए गए युद्ध अपराधों के दोषी पाए गए जमात-ए-इस्लामी के शीर्ष नेता अब्दुल कादर मुल्ला को फाँसी देने के पक्ष में प्रदर्शन कर रहे लोगों में शामिल एक महिला नारे लगाते हुए.
कादर मुल्ला को फाँसी
इमेज कैप्शन, अब्दुल कादिर मुल्ला को गुरुवार रात फाँसी दे दी गई.
कादर मुल्ला को फाँसी
इमेज कैप्शन, युद्ध अपराध ट्राइब्यूनल ने इसी साल फ़रवरी में अब्दुल कादर मुल्ला को दोषी क़रार देते हुए आजीवन कारावास की सज़ा दी थी जिसे सितंबर में सर्वोच्च अदालत ने फाँसी में बदल दिया था.
कादर मुल्ला को फाँसी
इमेज कैप्शन, अब्दुल कादर मुल्ला पर आरोप था कि वे जमात-ए-इस्लामी के तहत क़ायम की गई अल बदर नामक सैन्य संगठन के कार्यकर्ता थे. उन पर युद्ध के आख़िरी दिनों में बांग्लादेश के 200 से ज़्यादा बुद्धिजीवियों के अपहरण और क़त्ल में शामिल होने का आरोप था.
कादर मुल्ला को फाँसी
इमेज कैप्शन, पैंसठ साल के अब्दुल कादर मुल्ला को स्थानीय समयानुसार गुरुवार रात ग्यारह बजे फाँसी दे दी गई.
कादर मुल्ला को फाँसी
इमेज कैप्शन, इसी साल फ़रवरी में जब अब्दुल कादर मुल्ला को दोषी पाया गया था तब जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश ने पूरे देश में विरोध प्रदर्शन किए थे.
कादर मुल्ला को फाँसी
इमेज कैप्शन, जमात-ए-इस्लामी का कहना था कि अब्दुल कादर मुल्ला को सज़ा सुनाए जाने के पीछे राजनीतिक कारण हैं.
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इमेज कैप्शन, बांग्लादेश की सरकार ने ये विशेष युद्ध अपराध ट्राइब्यूनल वर्ष 2010 में स्थापित किया था. इसका मक़सद उन आरोपियों पर मुक़दमा चलाना था जिन्होंने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के साथ मिलकर 1971 के युद्ध के दौरान पूर्वी पाकिस्तान के बांग्लादेश बनने का विरोध किया था.
कादर मुल्ला को फाँसी
इमेज कैप्शन, जमात-ए-इस्लामी ने धमकी दी थी कि अगर उन के शीर्ष नेता को फाँसी दी गई तो इसके भयानक परिणाम होंगे.
कादर मुल्ला को फाँसी
इमेज कैप्शन, अब्दुल कादर मुल्ला के बेटे हसन जमील अपने वालिद से आख़िरी बार मिलने के बाद मीडिया से बात करते हुए.
कादर मुल्ला को फाँसी
इमेज कैप्शन, बांग्लादेश की सरकार का दावा है कि 1971 में युद्ध के दौरान तीस लाख लोग मारे गए थे जबकि कुछ शोधकर्ताओं के मुताबिक़ इस युद्ध में तीन से पाँच लाख के बीच लोग मारे गए थे.