सीरिया: पहली बार सरकारी और विद्रोही नेता आमने- सामने

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सीरियाई सरकार और विपक्ष के प्रतिनिधि शनिवार को जेनेवा में होने वाली शांति वार्ता में एक ही कमरे में बैठक करेंगे.
यह जानकारी सीरिया में संयुक्त राष्ट्र के दूत लखदर ब्राहिमी ने दी. उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि दोनों पक्ष ये समझ चुके हैं कि दाँव पर क्या लगा हुआ है और इस वार्ता का मकसद सीरिया को बचाना है.
ब्राहिमी ने यह घोषणा दोनों पक्ष के नेताओं से अलग-अलग मुलाकात के बाद की. विपक्षी दलों के एक प्रवक्ता ने इस बात पर जोर दिया है कि इस दौरान सरकारी प्रतिनिधियों के साथ सीधी वार्ता नहीं होगी.
वार्ता के दौरान सभी लोग एक ही कमरे मिलेंगे लेकिन सभी लोग लखदर ब्राहिमी से ही बात करेंगे. ब्राहिमी ही मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे है.
धीमी रफ़्तार
शांति वार्ता में प्रगति की धीमी रफ़्तार के लिए दोनों पक्षों ने एक दूसरे को जिम्मेदार ठहराया है.
राजनयिकों का कहना है कि वे अब शांति समझौते की जगह स्थानीय युद्धविराम जैसी रियायतों की उम्मीद कर रहे हैं.
आमने-सामने की बातचीत के लिए दोनों पक्षों को राज़ी करने के लिए लखदर ब्राहिमी ने तीन दिन तक प्रयास किया.
शुक्रवार को सरकारी प्रतिनिधिमंडल ने कथित तौर पर घोषणा की थी कि अगर शनिवार की वार्ता के लिए गंभीर मुद्दों को शामिल नहीं किया गया तो वह वार्ता से हट जाएगा.
सीरिया में 2011 में शुरू हुए गृह युद्ध में अब तक एक लाख से अधिक लोगों के मारे जाने की आशंका है.
इस गृहयुद्ध की वजह से क़रीब 95 लाख लोगों को अपना घर-बार छोड़कर शरणार्थी के रूप में दूसरे देशों में रहना पड़ रहा है. यह सीरिया और उसके पड़ोसी देशों के लिए बड़ी मानवीय समस्या बन गई है.
शांति वार्ता स्विटज़रलैंड के मॉन्गट्रे में बुधवार को शुरू हुई. लखदर ब्राहिमी ने गुरुवार और शुक्रवार को दोनों पक्षों को आमने-सामने की बैठक में शामिल होने के लिए मनाया.
माना जा रहा था कि शुक्रवार को दोनों पक्ष बैठक करेंगे. लेकिन कोई भी पक्ष दूसरे पक्ष से नहीं मिला.
शुक्रवार सुबह ब्राहिमी ने सरकारी प्रतिनिधियों और दोपहर बाद विपक्ष के नेताओं से मुलाकात की. इसके बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने घोषणा की कि दोनों पक्ष एक ही कमरे में मिलने पर सहमत हो गए हैं.
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