गैंडे के शिकार के परमिट की नीलामी

काला गैंडा

नामीबिया में विलुप्तप्राय प्रजाति के एक काले गैंडे को मारने के लिए परमिट की नीलामी अमरीका में साढ़े तीन लाख डॉलर यानी करीब दो करोड़ दस लाख रुपए में हुई.

टैक्सस के डलास सफ़ारी क्लब का कहना है कि इससे इस प्रजाति को एक बूढ़े आक्रामक गैंडे से मुक्ति मिलेगी और नीलामी से मिलने वाली रक़म को इस प्रजाति के संरक्षण पर ख़र्च किया जाएगा.

हालांकि वन्य जीवों के संरक्षण के लिए काम कर रहे लोगों ने इस नीलामी की कड़ी आलोचना की है और यहां तक नीलामी में शामिल लोगों को जान से मारने की धमकी तक भी दी गई.

<link type="page"><caption> (काजीरंगा पार्क में 242 गैंडे बढ़े)</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/rolling_news/2012/04/120411_rhino_rise_rn.shtml" platform="highweb"/></link>

दुनिया में इस समय क़रीब 5,000 काले गैंडे हैं जिनमें से एक-तिहाई दक्षिण अफ्रीकी देश नामीबिया में हैं. नामीबिया हर साल गैंडों के शिकार के लिए केवल तीन परमिट जारी करता है. यह पहली बार है जब नामीबिया से बाहर इस तरह के परमिट की नीलामी की गई है.

यह नीलामी डलास के कनवेंशन सेंटर में कड़ी सुरक्षा के बीच आयोजित की गई. इस जगह दर्जनों प्रदर्शनकारी जमा थे.

नीलामी

काला गैंडा

इस नीलामी को जीतने वाले शख़्स के नाम की जानकारी नहीं दी गई है. नीलामी जीतने वाले को बूढ़े और प्रजनन में अक्षम काले गैंडे को मारने का अधिकार मिल गया है.

नीलामी के आयोजकों का कहना है कि ऐसे गैंडे जवान गैंडों के लिए ख़तरा होते हैं.

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सफ़ारी क्लब के अधिकारियों ने कहा कि नीलामी से मिलने वाली पूरी रक़म नामीबिया सरकार को दी जाएगी और इसे भविष्य में गैंडों के संरक्षण पर ख़र्च किया जाएगा.

जानवरों के अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों ने इसे एक 'दुखद मज़ाक' बताया है.

इंटरनेशनल फंड फॉर एनीमल वेलफेयर के जैफ़ी फ्लॉकन ने एसोसिएटेड प्रेस से कहा, "इस नीलामी से दुनिया को पता चला है कि एक अमरीकी किसी जीव को मारने के लिए कोई भी कीमत दे सकता है."

तमाशा

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उन्होंने कहा, "सच यह है कि यह एक विलुप्तप्राय प्रजाति के शिकार का तमाशा बनाना है."

क़रीब 80 हज़ार से ज़्यादा लोगों ने इस नीलामी के ख़िलाफ़ दी जा रही ऑनलाइन याचिका पर हस्ताक्षर किए थे.

<link type="page"><caption> (गैंडा, स्टेम सेल्स और टेस्ट-ट्यूब बेबी)</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2011/09/110905_rhino_stem_fma.shtml" platform="highweb"/></link>

उधर अमरीकी संघीय जाँच एजेंसी एफ़बीआई ने कहा है कि वह नीलामी के लिए दी गई मौत की धमकियों की तहकीकात कर रही है.

विशेषज्ञों का मानना है कि एशिया में गैंडे के सींग की बढ़ती मांग के कारण इनके शिकार के मामले बढ़ रहे हैं.

चीन और वियतनाम जैसे देशों में यह विश्वास है कि गैंडे के सींग से बने पाउडर में इलाज करने वाले गुण होते हैं और यह कैंसर जैसे रोगों में इलाज डाल सकती है. गैंडे के सींग की क़ीमत 65 हज़ार डॉलर यानी करीब 40 लाख रुपए प्रति किलो तक हो सकती है.

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