क्या चीन और उत्तर कोरिया का दोस्ताना बना रहेगा?

उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग के फूफा चांग सोंग थाएक को मौत की सजा देने के बाद दुनिया भर से प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं. किसी ज़माने में उत्तर कोरियाई सरकार में बेहद ताकतवर रहे चांग को राजद्रोह एवं भ्रष्टाचार के आरोप में ये सज़ा दी गई.
दक्षिण पूर्वी एशिया पर नजर रखने वाले जानकारों की खास दिलचस्पी उत्तर कोरिया के मददगार देश चीन को लेकर बनी हुई है.
चीन के महत्वपूर्ण अखबारों में से एक द ग्लोबल टाइम्स ने इस बात को लेकर चिंता जाहिर की है कि चांग सोंग थाएक को मौत से जुड़े हालिया घटनाक्रम को लेकर चीन के आम लोगों की नकारात्मक राय को उत्तर कोरिया कहीं चीन का आधिकारिक रुख न समझ ले.
अखबार लिखता है, "उत्तर कोरिया के आंतरिक मामलों में दखल न देने की चीन की सरकारी नीति सही है. खासकर उत्तर कोरिया के सत्ता के ढाँचें को देखते हुए चीन को ऐसा ही करना चाहिए लेकिन चीन के समाज में पहले से ही लोगों की राय में बहुत विविधता है और चीन की सरकार उत्तर कोरिया को लेकर पूरे समाज के रुख को प्रभावित नहीं कर सकती."
चीन का रुख

ग्लोबल टाइम्स कहता है, "इसमें कोई शक नहीं कि उत्तर कोरिया में हाल में हुई घटनाओं पर चीन के लोगों को ऐतराज है. मुमकिन है कि उत्तर कोरिया को लेकर चीनियों की नकारात्मक राय से आने वाले कल में दोनों देशों के रिश्तों पर असर पड़ सकता है."
"उदाहरण के लिए उत्तर कोरिया को दी जाने वाली चीनी मदद पर सवाल उठाए जा सकते हैं और दोनों देशों के नागरिकों के आपसी संवाद को इसका नुकसान पहुँचेगा."
<link type="page"><caption> (उत्तर कोरिया को चेतावनी)</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/01/130124_china_papers_roundup_ar.shtml" platform="highweb"/></link>
उधर हॉन्ग कॉन्ग के अंग्रेजी अखबार 'ता कुंग पाओ' ने लिखा है कि किम जोंग के फूफा चांग सोंग थाएक को मौत की सजा दिए जाने को चीन ने खुला समर्थन नहीं दिया है.
अखबार लिखता है, "ऐसे वक्त में जब किम जोंग को चीन के समर्थन की सबसे ज्यादा जरूरत थी चीन के विदेश मंत्रालय ने चांग सोंग थाएक के मामले से निपटने के किम जोंग के तरीके का सार्वजनिक तौर पर समर्थन नहीं किया. दोनों देशों के करीबी रिश्तों के मद्देनजर चीन का ये रुख कुछ हद तक असमान्य लगता है."
इस बीच हॉन्ग कॉन्ग से प्रकाशित होने वाले अंग्रेजी अखबार 'साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट' ने सुर्खी लगाई है, "किंम जोंग के फूफा की मौत चीन को कड़ा रुख अपनाने के लिए एक संकेत है."
स्पष्ट रवैया

अखबार के प्रमुख संपादक वांग शियांगवेई लिखते हैं, "चांग सोंग थाएक की मौत से उपजे हालात में चीन और उत्तर कोरिया के जटिल होते रिश्तों की झलक देखी जा सकती है. ये बात भी उजागर होती है कि उत्तर कोरिया पर शासन कर रहे खानदान पर चीन का सीमित प्रभाव ही है. यह इसके बावजूद है कि किम जोंग का परिवार अपने अस्तित्व के लिए काफी हद तक चीन पर निर्भर है."
"ऐसे वक्त में जबकि राष्ट्रपति शी जिनपिंग राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अतंरराष्ट्रीय मुद्दों पर अधिक स्पष्ट रवैया अपना रहे हैं, चीन को अमरीका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के अन्य सदस्य देशों के समर्थन से उत्तर कोरिया पर सख्ती बरतनी चाहिए."
हालांकि 'चाइना डेली' अखबार दोनों देशों के रिश्तों के बिगड़ने की अटकलों से पूरी तरह से इत्तेफाक रखता हुआ नहीं दिखता है. अखबार लिखता है कि चांग सोंग थाएक की मौत के बाद चीन के सहयोग से चल रही कुछ परियोजनाओं पर तात्कालिक असर पड़ सकता है लेकिन लंबे वक्त में दोनों पड़ोसियों के आर्थिक रिश्ते स्थिर रहेंगे.
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