कितने खिलौने काफी हैं हमारे बच्चों के लिए?

एक तरफ दुकानों में क्रिसमस के खिलौनों की रौनक हो रही है तो दूसरी तरफ कुछ लोग लोगों से अपील कर रहे हैं कि हमें खिलौने को लेकर अपना नज़रिया बदलने की कोशिश करनी चाहिए. ऐसे में ये विचार करना ज़रूरी हो जाता है कि क्या हम अपने बच्चों को ज़रूरत से ज़्यादा खिलौने दे रहे हैं. विचार कर रही हैं, ज़ोवेने फर्निस.
मेरे बेटे की आलमारी खिलौनों से भरी हुई है. जब मुझे स्विट्जरलैंड से सिंगापुर जाना हुआ तो मुझे सोचना पड़ा कि मैं उसके कौन-कौन से खिलौने लेकर जाऊँ.
इस ऊहापोह के दौरान ही मैंने गौर किया कि मेरे बेटे ने कई खिलौनों को महीनों से छुआ ही नहीं है और वह सबसे ज़्यादा देर तक 'साँप और सीढ़ी' खेलना पसंद करता है.
कई खिलौनों के तो उसने पैकेट ही नहीं खोले.
मनोवैज्ञानिक ओलिवर जेम्स मानते हैं कि बच्चों को ढेर सारे खिलौनों की 'आवश्यकता' नहीं होती.
ओलिवर कहते हैं, "ज़्यादातर बच्चों को एक ट्रांजिशन ऑब्जेक्ट की ज़रूरत होती है, उनका पहला खिलौना, जैसे कि टेडी बीयर, ही उनका असल खिलौना होता है. वे उसे हर जगह लेकर घूमते हैं. उसके बाद तो लगभग सब कुछ समाज द्वारा पैदा की गई ज़रूरत होती है."
खिलौनों की भूख

आंकड़ों को देखें तो ऐसा लगता है कि हम बच्चों के भीतर खिलौनों के लिए अधिक से अधिक भूख पैदा करना चाहते हैं.
टॉय रिटेलर एसोशिएशन के अनुसार अकेले ब्रिटेन में खिलौनों पर हर साल तीन अरब पाउंड खर्च किए जाते हैं.
लंदन स्थित खिलौनों के संग्रहालय से जुड़ी कैथरीन हॉवेल स्वीकार करती हैं कि आज की पीढ़ी के बच्चों के पास पहले की पीढ़ियों से बहुत ज़्यादा खिलौने हैं.
स्टार वार्स शृंखला की फ़िल्मों के आने के बाद इलेक्ट्रानिक खिलौनों की लोकप्रियता में अभूतपूर्व बढ़ोत्तरी हुई लेकिन हॉवेल के अनुसार गुड़िया और बिल्डिंग ब्लॉक जैसे परंपरागत खिलौनों की लोकप्रियता अब भी बनी हुई है.
हॉवेल कहते हैं, "एक बच्चा हमेशा बिल्डिंग ब्लॉक को पसंद करता है क्योंकि इसमें वह अपनी कल्पना का प्रयोग कर सकता है."
मेरा अनुभव हॉवेल के प्रेक्षण से मिलता-जुलता है. मेरे तीन वर्षीय बेटे को भी ऐसे खिलौने ज़्यादा पसंद हैं जिनमें कल्पनाशीलता के लिए ज़्यादा जगह हो.
एक खिलौना तीन फायदे

रेज़िंग चिल्ड्रेनः द प्राइमरी ईयर्स की लेखिका लियात ह्यूज जोशी कहती हैं, "खिलौनों के कई फायदे हैं, ये बच्चों को सृजनात्मकता, मनोरंजन और शिक्षा तीनों प्रदान करते हैं."
जोशी मानती हैं, "एक खिलौने की तीन चीजें महत्वपूर्ण बनाती हैं, उसका सामाजिक महत्व जिससे बच्चों में सामूहिकता की भावना का विकास हो, उसका बहुमुखी होना जिसका सृजनात्मक प्रयोग किया जा सके और उसका टिकाऊ होना जिसे बच्चा कई साल तक प्रयोग कर सके."
जेम्स मानते हैं कि सृजनात्मक खिलौने बच्चों के लिए बेहतर होते हैं.
लेकिन असल सवाल यह है कि आख़िर कितने खिलौने बच्चों के लिए पर्याप्त होते हैं?
जो लोग कम खिलौनों कि वकालत करते हैं उनका कहना है कि खिलौनों का प्रकार एक मात्र ख़तरा नहीं है बल्कि उनकी बढ़ती संख्या भी बच्चों के लिए नुकसानदेह है.
खिलौने और तनाव

दो बच्चों के पिता और घर और जीवनशैली से जुड़े मुद्दों पर लिखने वाले जोशुआ बेकर कहते हैं, "जब लोगों के पास सीमित संसाधन होते हैं तो वे आपस में ज़्यादा सहयोग करते हैं, यह बच्चों के लिए भी सच है."
जेम्स अपनी किताब एफ़ल्यूंजा में ब्रिटेन और अमरीका में भावनात्मक तनाव बढ़ने की तरफ ध्यान दिलाते हैं. शायद इसके पीछे एक कारण वह हो जिसकी तरफ बेकर इशारा कर रहे थे. जबकि यूरोप के लोगों में हताशा का शिकार होने की दर तकरीबन आधी है.
क्या यह महज संयोग है कि यूरोप की शिक्षा पद्धति में असल-जीवन के अनुभवों को प्राथमिकता दी जाती है ?
मैंने अपने बेटे के कई खिलौने स्विट्जरलैंड में छोड़ दिए लेकिन सारे नहीं छोड़े क्योंकि हो सकता है कि बच्चों को उनकी उतनी ज़रूरत न हो लेकिन उनके व्यस्त माता-पिता को उनकी ज़रूरत होती है.
लेकिन हम स्वेच्छापूर्वक अपने बच्चों के खिलौनों की संख्या कम कर सकते हैं, आखिरकार खिलौनों के अलावा भी बच्चों के पास खेलने-कूदने के ढेरों दूसरे तरीके होते हैं.
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