फ़ेसबुक के दौर में रोमियो-जुलिएट की दास्तां

यमन हुदा

लड़की लड़के से मिलती है, लड़की का पिता इनकार कर देता है. यह कहानी बेहद पुरानी है, लेकिन रोमियो-जुलिएट से उलट यमन में एक जोड़े की ग़िरफ़्तारी से फ़ेसबुक पर अभियान छिड़ गया है.

तीन साल पहले, हुदा (अब उम्र 22 साल) सऊदी अरब में अपने गांव की एक मोबाइल फ़ोन की दुकान में गई थीं. वहां उनकी मुलाक़ात यमन के एक प्रवासी मज़दूर अराफ़ात (अब 25 साल) से हुई जो एक ग़रीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं. दोनों में प्रेम हो गया.

इस जोड़े के वकील का कहना है कि अराफ़ात ने हुदा के माता-पिता से हुदा का हाथ मांगा, लेकिन उन्हें इनकार मिला.

ऐसा लगता है कि हुदा ने बाद में <link type="page"><caption> यू-ट्यूब पर पोस्ट की गई एक क्लिप</caption><url href="https://www.youtube.com/watch?v=5eWBoQeYOME" platform="highweb"/></link> में सऊदी पत्रकारों को बताया, ‘’मेरा परिवार किसी और से मेरी शादी करना चाहता था लेकिन मैंने इनकार कर दिया. मैंने कहा मुझे अराफ़ात के अलावा कोई और नहीं छुएगा. इसके बाद मुझे ख़्याल आया कि मुझे भाग जाना चाहिए.’’

हुदा ने इसके बाद घर छोड़ दिया और यमनी कामगार का भेष धरकर सीमा पार की. उन्हें अवैध तौर पर सीमा पार करने के लिए पकड़ लिया गया.

ख़बरों के मुताबिक़, हुदा के परिवार का दावा था कि अराफ़ात ने उनकी बेटी पर ‘जादू’ किया था. जब अराफ़ात यमन लौटे तो उन्हें हुदा की मदद करने के आरोप में ग़िरफ़्तार कर लिया गया.

फ़ेसबुक पर अभियान

यमन हुदा अराफ़ात

तो हुदा और अराफ़ात की कहानी में रोमियो-जुलिएट या लैला और मजनूं की कहानी से अलग क्या है?

इस बार यमन में फ़ेसबुक ने इस जोड़े की ढेरों तस्वीरों और कई पन्नों को फैलाकर ज़बर्दस्त प्रतिक्रिया दी है.

एक में तो <link type="page"><caption> 11,000 लाइक</caption><url href="https://www.facebook.com/1Huda.Arafat" platform="highweb"/></link> हैं. कुछ टिप्पणियों में यमनी राष्ट्रवाद के ज़रिए अपने मालदार पड़ोसी पर ग़ुस्सा भी दर्ज कराया गया है लेकिन बहुत सी टिप्पणियों में साल 2011 की क्रांति का हवाला देते हुए यमनी अधिकारों की मांग की गई है.

हर शाम फ़ेसबुक पर बिताने वाले 33 साल के प्रशासनिक अधिकारी फ़हद कहते हैं, ‘’हुदा के साथ सहानुभूति इसलिए है क्योंकि उसने अपनी संस्कृति से विद्रोह किया."

वो आगे कहते हैं, "वह अपने पितृसत्तात्मक समाज के ख़िलाफ़ उठ खड़ी हुई जो कहता है कि किससे शादी करनी है. यह दिखाता है कि हमारे समाजों को आधुनिक बनने के लिए क्या चाहिए और जहां नौजवान अपनी आज़ादी और अधिकार के साथ जिससे चाहें शादी कर सकें.’’

फ़हद के ग्रुप ने रविवार को हुदा और अराफ़ात केस की अदालत में सुनवाई के दौरान अपना विरोध दर्ज कराया.

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