बस्ती बसाने की योजना पर पुनर्विचार करेगा इसराइल

अमरीकी विदेश मंत्री जॉन केरी के साथ इजरायली पीएम ने बात.
इमेज कैप्शन, अमरीकी विदेश मंत्री जॉन केरी के साथ इजरायली पीएम ने बात.

इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतनयाहू ने अपने आवास मंत्री को पश्चिमी तट में 20 हज़ार घरों के निर्माण की योजना पर पुनर्विचार करने का आदेश दिया है.

उन्होंने कहा कि इस योजना के कारण अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ अनावश्यक मनमुटाव पैदा होगा. मंगलवार को आवास मंत्री उरी एरियल ने इस योजना की घोषणा की थी.

इससे पहले अमरीका ने कहा था कि वह इसराइली योजना को लेकर बेहद चिंतित है.फ़लस्तीनियों ने इसराइल के इस क़दम से शांति वार्ता के टूटने की चेतावनी देते हुए संयुक्त राष्ट्र में अपील करने की बात कही है.

एक बयान मेंनेतनयाहू ने पश्चिमी तट में यहूदियों के लिए नए घर बनाए जाने की योजना पर कहा कि इस क़दम से कोई लाभ नहीं मिलेगा, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ ग़ैरज़रूरी विवाद ज़रूर पैदा हो जाएगा.

वो भी उस समय जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय ईरान के साथ एक बेहतर समझौते की कोशिश कर रहा है.

नेतनयाहू ने ये बातें हाल में जिनेवा में ईरान के विवादास्पद परमाणु योजना पर हुई बातचीत के संदर्भ में कही. बयान में कहा गया है कि आवास मंत्री ने प्रधानमंत्री के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है.

इजरायल के इस कदम से फिलीस्तीन में विरोध तेज हो गया है.
इमेज कैप्शन, इजरायल के इस कदम से फिलीस्तीन में विरोध तेज हो गया है.

इससे पहले फ़लस्तीन के राष्ट्रपति मोहमद अब्बास चेतावनी दे चुके हैं कि अगर इसराइल निर्माण कराने की दिशा में आगे बढ़ता है तो उसके साथ वार्ता पर इसका बुरा असर पड़ेगा. फ़लस्तीनियों का कहना है कि वे इस मुद्दे पर तुरंत चर्चा के लिए संयुक्त राष्ट्र में अपील करेंगे.

उधर, वाशिंगटन में अमरीकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता जेन पसाकी ने इससे पहले कहा कि इसराइल की योजना को लेकर अमरीका बेहद चिंतित है. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर अमरीका इसराइल से स्पष्टीकरण की मांग करेगा.

पिछले साल अमरीकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने इसराइल की इस गतिविधि को अवैध क़रार दिया था.

जुलाई में शुरू इसराइल-फ़लस्तीन के बीच सीधी वार्ता में अब तक मामूली प्रगति हुई है. इससे पहले सितंबर 2010 में इसराइल की बस्ती बसाने की ही योजना पर विवाद के कारण वार्ता प्रक्रिया टूट गई थी.

नेतनयाहू चाहते हैं कि फ़लस्तीनी इसराइल को एक यहूदी देश के रूप में मान्यता दें, जबकि फ़लस्तीनियों का कहना है कि सीमा और सुरक्षा उनके लिए सबसे अहम मुद्दे हैं.

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