मध्य-पूर्व शांति वार्ता की बहाली की कोशिश

अमरीकी विदेश मंत्री जॉन कैरी
इमेज कैप्शन, इसरायल और फ़लस्तीनियों के बीच सालों से रुकी हुई शांति वार्ता इस साल जुलाई में अमरीकी विदेश मंत्री की पहल पर फिर से शुरु हुई थी.

अमरीका के विदेश मंत्री जॉन कैरी तीन महीने पहले शुरु हुई शांति वार्ता को बहाल करने की कोशिश में इसराइली और फ़लस्तीनी नेताओं से मिलेंगे.

जॉन कैरी ने कहा, "मैं यहां मुश्किलों के बारे में बिना किसी ग़लतफ़हमी के लेकिन काम करने के निश्चय के साथ आया हूं."

इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच शांति वार्ता अगले साल अप्रैल में ख़त्म होगी लेकिन उसमें अब तक ज़्यादा प्रगति नहीं हुई है. अमरीकी विदेश मंत्री ने मीडिया में उठ रहे उन क़यासों से इंकार किया है कि वे दोनों पक्षों के सामने एक नए अंतरिम शांति समझौता का प्रस्ताव रख सकते हैं.

इससे पहले कैरी सऊदी अरब और मिस्र भी गए थे.

जॉन कैरी बुधवार को येरुश्लम में इसराइली प्रधान मंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू से और बेथलेहम में फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास से मुलाक़ात करेंगे.

'कोई नया समझौता नहीं'

इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच सालों से रुकी हुई शांति वार्ता इस साल जुलाई में अमरीकी विदेश मंत्री की पहल पर फिर से शुरु हुई थी.

जॉन कैरी ''टू-स्टेट सोल्यूशन या दो राष्ट्र समाधान'' के आधार पर दोनों पक्षों के बीच समझौते की कोशिश कर रहे हैं. इस समझौते के तहत इसराइल और एक ऐसे फ़लस्तीनी राष्ट्र की बात की जा रही है जिसमें पश्चिम तट और गज़ाशामिल होंगे.

इसराइली नेता यिट्ज़ाक राबिन की हत्या की 18वीं पुण्यतिथि के मौक़े पर इसराइल की राजधानी तेल अवीव में एक समारोह में जॉन कैरी ने कहा, "हमें यक़ीन है कि कोई (समाधान) मुमकिन है और ये सभी के लिए अच्छा है और ये हासिल हो सकता है."

इससे पहले अमरीकी विदेश मंत्री कह चुके हैं कि येरुश्लम, सीमाएं, सुरक्षा इंतज़ाम, बस्तियों और फ़लस्तीनी शरणार्थियों जैसे सभी मुद्दों पर चर्चा हो सकती है.

लेकिन उन्होंने एक अंतरिम समझौते पर चल रहे क़यासों से इंकार किया है. पिछले दिनों सऊदी अरब में उन्होंने कहा था, "इस वक्त कोई और योजना नहीं है."

इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच अब तक अज्ञात जगहों पर और समय पर कई बार बातचीत हो चुकी है. अमरीका ने मीडिया से इन मुलाक़ातों की रिपोर्ट नहीं करने की गुज़ारिश की है.

लेकिन दोनों ही पक्षों ने मूल मुद्दों पर बातचीत आगे ने बढ़ने पर निराशा व्यक्त की है.

मुश्किलें

इसरायली बस्ती
इमेज कैप्शन, फ़लस्तीनी चाहते हैं कि उनके राष्ट्र में इसरायल के कब्ज़े वाली ज़मीन भी शामिल हो लेकिन इसरायल को इससे इंकार है.

इसराइली प्रधान मंत्री नेतन्याहू चाहते हैं कि फ़लस्तीनी, इसराइल को बतौर यहूदी राष्ट्र मान्यता देने को प्राथमिकता दें जबकि फ़लस्तीनी कहते हैं कि उनके लिए सीमाएं और सुरक्षा प्रमुख मुद्दे हैं.

फ़लस्तीनी चाहते हैं कि उनके राष्ट्र में वो ज़मीन भी शामिल की जाए जिस पर इसराइल ने साल 1967 में क़ब्ज़ा कर लिया था लेकिन उन जगहों पर अब इसराइल ने बस्तियां बना ली हैं जहां लगभग 50 हज़ार इसराइली रहते हैं.

लेकिन बिन्यामिन नेतन्याहू ने 1967 वाली स्थिति को ''अरक्षणीय'' कहते हुए ख़ारिज कर दिया है. इसरायली प्रधान मंत्री का कहना है कि वो स्थिति ''ज़मीन पर हुए जनसांख्यिकी बदलावों'' को नज़रअंदाज़ करती है.

अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत क़ब्ज़ा किए गए इलाक़ों पर इसराइली बस्तियों को ग़ैर-क़ानूनी माना जाता है लेकिन इसराइल इसे नहीं मानता.

पश्चिम तट और पूर्व येरुश्लम में यहूदी बस्तियों का असर अब तक दोनों पक्षों के बीच बातचीत की बहाली पर पड़ता रहा है.

इस मुद्दे पर सितबंर 2010 में आख़िरी बार हुई सीधी बातचीत रुक गई थी और फ़लस्तीनी प्रतिनिधियों ने इसरायल पर ताज़ा बातचीत को पटरी से उतारने की कोशिश करने का आरोप लगाया है.

(बीबीसी हिन्दी के क्लिक करें एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)