पहली बार अंतरिक्ष की सैर पर ओलंपिक मशाल

पहली बार ओलंपिक मशाल को अंतरिक्ष की सैर कराई गई है.
अगले साल रूस के सोची शहर में होने वाले शीतकालीन ओलंपिक खेलों से पहले दो रूसी अंतरिक्ष यात्रियों ने पहली बार बिना जली मशाल लेकर स्पेसवॉक या अंतरिक्ष में चहलकदमी की.
ओलेग कोटोव और सर्गेई रयाज़ानस्की शनिवार दोपहर 1434 जीएमटी को बिना जली मशाल को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के दरवाज़े से लेकर निकले.
इस ऐताहासिक घटना के सीधे प्रसारण में ओलेग कोटोव को पृथ्वी से 420 किलोमीटर ऊपर मशाल को लहराते देखा गया.
छह घंटे की स्पेसवॉक
गुरुवार को एक रूसी सोयूज़ रॉकेट में एक तीन सदस्यीय दल मशाल को अंतरिक्ष स्टेशन लेकर गया.
कज़ाखस्तान के बाइकानूर कोस्मोड्रोम से उड़ान भरने वाले इस रॉकेट में रूस के मिखाइल ट्यूरिन, अमरीका के रिक मास्ट्राकियो और जापान के कोइची वकाता थे.
इस दल ने कोटोव और रयाज़ानस्की को ओलंपिक प्रतीक दिया. ये दोनों पहले से ही अंतरिक्ष स्टेशन में मौजूद थे.
ओलेग कोटोव और सर्गेई रयाज़ानस्की ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन, आईएसएस, के बाहर ओलंपिक मशाल लहराते हुए तस्वीरें खिंचवाई. दोनों अंतरिक्ष यात्रियों ने हेलमेट कैमरा से एक दूसरे की तस्वीरें खींची और वीडियो बनाए.
ओलंपिक मशाल अंतरिक्ष यात्रियों के भारी भरकम स्पेस सूट से बंधी थी और इन दोनों ने मशाल के साथ लगभग एक घंटा खुले अंतरिक्ष में बिताया.
बाद में मशाल अंतरिक्ष यान में वापस ले जाई गई और अगले लगभग पांच घंटे कोटोव और रयाज़ानस्की ने स्पेसवॉक के दौरान अंतरिक्ष स्टेशन में कुछ मरम्मत का काम किया.
बेहतर छवि बनाने की कोशिश

इस घटना को रूस को एक ताक़तवर और आधुनिक देश की छवि बनाने की दिशा में लिए गए कदम की तरह देखा जा रहा है.
इस सप्ताह की शुरुआत में ओलेग कोटोव ने कहा था, "हम अपनी ओलंपिक मशाल को अंतरिक्ष में दिखाना चाहते हैं. हमें इसे ख़ूबसूरत तरीके से करना चाहेंगे. लाखों लोग टीवी पर इस घटना का सीधा प्रसारण देखेंगे और वे अंतरिक्ष स्टेशन देखेंगे और ये भी कि हम कैसे काम करते हैं."
इससे पहले साल 1996 और साल 2000 में भी ओलंपिक मशाल अंतरिक्ष में ले जाई गई थी लेकिन दोनों ही मौकों पर मशाल अंतरिक्ष यान के अंदर ही रही.
अंतरिक्ष या स्पेसवॉक के बाद ये मशाल पृथ्वी पर वापिस लाई जाएगी और इससे अगले साल फ़रवरी में ओलंपिक स्टेडियम में कॉलड्रॉन जलाई जाएगी.
ओलंपिक मशाल की अंतरिक्ष यात्रा सोवियत युग के बाद रूस के पहले ओलंपिक के लिए विस्तृत तैयारी का हिस्सा है. सोची ओलंपिक खेल अब तक के सबसे महंगे ओलंपिक खेल हैं जिसमें 50 अरब डॉलर की लागत आई है.
लेकिन आयोजन से पहले ही सोची ओलंपिक विवादों के घेरे में भी आ गया है. एक विवाद रूस के उस नए क़ानून को लेकर है जो समलैंगिकता के बारे में जानकारी फैलाने पर लगाम कसता है. साथ ही मानवाधिकार समूहों का आरोप है कि सोची में स्टेडियम बनाने वाले अप्रवासी मजदूरों को अधिकारियों ने पकड़ लिया है.












