'मुश्किल' में रूस के समलैंगिक

- Author, स्टीवन रोज़नबर्ग
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, मॉस्को
रूस के सोशी में एक क्लब में संगीत बहुत ऊंची आवाज़ में बज रहा है, तंबाकू का धुआं गाढ़ा है और कई समलैंगिक जोड़े शाम का मज़ा उठा रहे हैं.
माहौल बड़ा शांत है. लोगों की मुस्कुराहटों और खुले बर्ताव से लगता है कि रूस में समलैंगिक होना कोई दिक्कत वाली बात नहीं है.
लेकिन इस क्लब के मालिक आंद्रेई तानिशेव कुछ और ही कहानी सुनाते हैं.
आंद्रेई कहते हैं, "यहां आक्रामकता ज़्यादा है और सड़कों पर ख़तरा और बढ़ा है."
आंद्रेई बताते हैं, "कई समलैंगिकों ने कपड़े पहनने का तरीका बदल लिया है, कानों से बालियां हटा दी हैं, मुश्किलों से बचने के लिए हेयरस्टाइल बदल लिया है."
आंद्रेई का कहना है कि सोवियत संघ के दिनों में भी, जब समलैंगिकता अपराध थी, समलैंगिकों के साथ आज के मुकाबले अच्छा बर्ताव होता था.
'बर्बर वीडियो'

इस व्यवहार के सबूत एक निगरानी समूह के ऑनलाइन पोस्ट किए गए वीडियो हैं.
एक वीडियो में एक व्यक्ति को जबरन पेशाब पिलाया जा रहा है ताकि उसकी समलैंगिकता का "इलाज हो सके."
इसके बाद इस व्यक्ति के सिर पर एक लोहे की बाल्टी रखी जाती है और वे लोग बेसबॉल बैट से मारते हैं.
इस तरह के हमले फिल्माए जाते हैं और इंटरनेट पर डाल दिए जाते हैं. इन हमलों को एक चरमपंथी राष्ट्रवादी गुट अंजाम दे रहा है.
इस गुट का कहना है कि उसका मकसद संदिग्ध पीडोफाइल (ऐसे लोग जो बच्चों का यौन शोषण करते हैं) को शर्मिंदा करना और सज़ा देना है.
लेकिन इन वीडियो को देखकर लगता है कि ये समलैंगिक विरोधी हमले हैं.
एक और ऑनलाइन क्लिप में एक महिला को दिखाया गया है जिसके हाथ में बंदूक है और उसने ऐसी पोशाक पहनी है जिसे देखकर लगता है कि वो 'शिकार पर है' और बच्चों का यौन शोषण करने वाले और समलैंगिकों का शिकार कर रही है.
वो महिला एक काल्पनिक लक्ष्य की ओर गोलियां दागना शुरू कर देती है.
महिला का नाम येकातेरिना है. हम उनको सेंट पीटर्सबर्ग में मिलते हैं जहां वो एक स्थानीय निगरानी समूह "ऑक्यूपाई पीडोफीलिया" की अगुवाई कर रही हैं.
येकातेरिना मुझे बताती हैं, "हमारी प्राथमिकता पीडोफाइल के मामले उजागर करना है लेकिन हम समलैंगिकता को बढ़ावा देने के भी ख़िलाफ हैं."
विवादास्पद क़ानून
समलैंगिक अधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि इस तरह की आक्रामकता एक नए विवादास्पद क़ानून का सीधा नतीजा है जिस पर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दस्तखत किए हैं.

इस क़ानून के तहत 18 साल से कम उम्र वालों तक "अपारंपरिक यौन संबंधों" के बारे में सूचना का प्रसार करने पर पाबंदी लगा दी गई है.
ये क़ानून समलैंगिकता को बच्चों और परिवार के लिए ख़तरे की तरह दिखाता है. मानवाधिकार संगठन रूसी एलजीबीटी नेटवर्क की अनास्तासिया स्मिर्नोवा कहती हैं, "ये क़ानून अपने आप में ख़तरा नहीं है लेकिन ये किस तरह की राय बना रहा है उसे देखें तो ये बड़ा ख़तरा है."
इस क़ानून को लेकर रूस की बड़ी अंतरराष्ट्रीय आलोचना हुई है. कई पश्चिमी देशों में इस बात की भी आवाज़ उठी है कि अगले साल सोशी में होने वाले शीतकालीन ओलंपिक का बहिष्कार कर दिया जाए.
हालांकि रूसी अधिकारियों का मानना है कि ये कुछ ज़्यादा ही प्रतिक्रिया है. आखिर उन्होंने समलैंगिकता पर पाबंदी नहीं लगाई है, सिर्फ इसके बारे में जानकारी फैलाने को रोका है.
लेकिन उन्होंने ऐसा क्यों किया? इसकी आंशिक वजह है कि ऑर्थोडॉक्स चर्च और रूसी सरकार देश के लिए पारंपरिक रूढ़िवादी मूल्यों पर आधारित नई राष्ट्रीय पहचान बना रहे हैं.
वहां उदारवादी पश्चिमी सामाजिक, राजनीतिक और यौन विचारों के लिए कोई जगह नहीं है.
सेंट पीटर्सबर्ग के सांसद विताली मिलोनोव कहते हैं, "हम क्यों आपकी सभी परंपराओं का सम्मान करें जबकि आप हमारी परंपराओं का सम्मान न करें."
मिलोनोव का कहना है, "हम इंग्लैंड की रानी को नहीं कहते कि वो आपके देश में समलैंगिक शादियों के बारे में क़ानून पर दस्तखत न करें. हमें ऐसा करने का कोई हक़ नहीं है क्योंकि हम आपकी आज़ादी का सम्मान करते हैं. आप हमारी आज़ादी को स्वीकार क्यों नहीं करते?"
मिलोनोव कहते हैं, "हम लैंगिक अल्पसंख्यकों पर हमला नहीं करते. उनके पास बराबर अधिकार हैं लेकिन उन्हें रूस की उन परंपराओं को बदलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए जिन्हें 90 फीसदी जनसंख्या का समर्थन हासिल है. समलैंगिकता पाप है."
वहीं सोशी में समलैंगिक कैबरे क्लब के मालिक आंद्रेई का मानना है कि समलैंगिकता की पूरी बहस ज़्यादा बड़ी घरेलू समस्याओं से ध्यान भटकाने के लिए हैं.
आंद्रेई मुझे कहते हैं, "औसत रूसी नागरिक समझता है कि उसे किससे लड़ना है, कौन दुश्मन है."
आंद्रेई का कहना है, "उन्हें लगता है कि दुश्मन समलैंगिक हैं और उनका समर्थन करने वाले पश्चिमी देश हैं. जितना पश्चिमी देश रूस में समलैंगिकों को समर्थन देंगे वो हमें और नफ़रत करेंगे क्योंकि यहां लोग मानते हैं कि पश्चिमी देश ही बुरे हैं."
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