अब ब्रिटेन पर जर्मनी में जासूसी करने का आरोप

ब्रितानी दूतावास जर्मनी
इमेज कैप्शन, ब्रितानी दूतावास से जर्मनी में जासूसी की ख़बर ब्रितानी अख़बार में छपी है.

मीडिया में इन ख़बरों के आने के बाद कि ब्रिटेन बर्लिन स्थित अपने दूतावास का इस्तेमाल जासूसी के लिए कर रहा था जर्मनी के विदेश मंत्रालय ने ब्रिटेन के राजदूत के साथ एक बैठक की है.

ब्रितानी दूतावास जर्मन संसद के पास है और चांसलर <link type="page"><caption> एंगेला मर्केल </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/10/131027_merkel_spying_sb.shtml" platform="highweb"/></link>का कार्यालय भी वहीं है.

ब्रिटेन से निकलने वाले अख़बार 'इंडिपेन्डेंट' ने अपनी एक ख़बर में कहा है कि हो सकता है कि ब्रितानी दूतावास का इस्तेमाल 'अहम ख़ुफ़िया जानकारियां जुटाने' के लिए किया गया हो.

अख़बार ने अमरीकी राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी या <link type="page"><caption> एनएसए </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/11/131031_us_spy_leaks_ssr.shtml" platform="highweb"/></link>के दस्तावेज़ों का हवाला देते हुए कहा है कि हो सकता है कि इस काम के लिए ब्रितानी दूतावास की छत पर लगे उच्च तकनीक वाले उपकरणों का प्रयोग किया गया हो.

‘अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के ख़िलाफ़’

जर्मनी का कहना है कि इस तरह की गतिविधि अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के ख़िलाफ़ है.

जर्मनी के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि जर्मनी के विदेश मंत्री गिदो वेस्टरवेला ने ब्रिटेन के राजदूत से मामले पर जवाब देने को कहा है.

प्रवक्ता ने कहा, “यूरोपीय विभाग के प्रमुख ने ब्रितानी मीडिया में छपी ताज़ा ख़बरों पर जवाब तलब किया है, साथ ही इस तरफ़ भी ध्यान आकर्षित किया है कि राजनयिक भवन के परिसर से बातचीत को सूनना या उसकी रिकार्डिंग करना अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के ख़िलाफ़ है.”

स्नोडेन

'इंडिपेन्डेंट' अख़बार की ख़बर एनएसए के उन दस्तावेज़ों पर आधारित है जिसे सीआईए से पहले जुड़े रहे <link type="page"><caption> एडवर्ड स्नोडेन </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/08/130816_edward_snowden_new_documents_leak_rns.shtml" platform="highweb"/></link>ने लीक किया था.

रिपोर्ट में कहा गया है कि एनएसए के दस्तावेज़, आसमान से ली गई तस्वीरों और जर्मनी में जुटाई गई पुरानी सूचनाएं इस तरफ़ इशारा करती हैं कि ब्रिटेन चोरी छिपे ख़ुफ़िया जानाकारियां इकट्ठा कर रहा है.

ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय में इस मामले में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

इसके पहले ये ख़बर आई थी कि <link type="page"><caption> अमरीका </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/06/130607_us_phone_record_ia.shtml" platform="highweb"/></link>चांसलर एंगेला मर्केल के फ़ोन कॉल्स को साल 2002 से ‘सुन’ रहा था.

इस ख़बर के आने के बाद जर्मनी और अमरीका के बीच राजनयिक तनाव की स्थिति पैदा हो गई है.

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