प्रिंस हैरी को कोल्ड चैंबर में क्यों रखा गया?

प्रिंस हैरी, ब्रिटेन

ब्रिटेन के शाही परिवार के सदस्य राजकुमार हैरी ने सेना के एक प्रशिक्षण केंद्र पर शून्य से भी कम तापमान वाली जगह (कोल्ड चैंबर) पर रात गुजारी.

वे ध्रुवीय क्षेत्र में ट्रैकिंग के लिए खुद को ढालने की कोशिश कर रहे हैं.

प्रिंस हैरी दक्षिणी ध्रुव के लिए 200 मील लंबी दौड़ में ब्रिटेन के सेवानिवृत्त सैनिकों के साथ भाग लेंगे.

इस यात्रा में अमरीका और कॉमनवेल्थ देशों की टीमें भी भाग लेंगी. इस दौड़ की खास बात यह है कि इसमें भाग लेने वाले पूर्व सैनिक शारीरिक रूप से विकलांग हैं.

इस प्रतिस्पर्द्धा का आयोजन चैरिटी संस्था 'वॉकिंग विद द वूंडेड' की ओर से किया जा रहा है. इससे पहले हैरी चंदा एकत्र करने के लिए साल 2011 में उत्तरी ध्रुव की यात्रा कर चुके हैं.

<link type="page"><caption> ब्रितानी राजकुमार का हिंदुस्तानी डीएनए</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/06/130614_prince_william_indian_dna_rns.shtml" platform="highweb"/></link>

सैन्य पृष्ठभूमि

राजकुमार हैरी से जब उनके इस अनुभव के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यह एक ठंडी रात की नींद थी और सबसे बुरा इसके भीतर जाते वक्त लगा.

वारविकशायर के नुनिएटन के एक प्रशिक्षण केंद्र पर प्रिंस हैरी अपने चार साथियों के साथ शून्य से 35 डिग्री सेल्सियस कम तापमान पर पूरे 20 घंटे रहे.

वहाँ 45 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से तूफ़ानी हवाएँ भी चल रही थीं.

इस जगह का इस्तेमाल ज्यादातर कारों या सेना की गाड़ियों की टेस्टिंग के लिए किया जाता है.

प्रिंस हैरी

प्रिंस हैरी के साथ ट्रेनिंग में भाग लेने वाले चारों सैनिकों ने अफगानिस्तान में अपने शरीर का कोई न कोई अंग गंवाया है.

सेना की सक्रिय सेवा के दौरान अपनी एक टांग गँवा देने वाले टीम के सदस्य मेजर केट फिल्प ने बताया कि सैन्य पृष्ठभूमि का होने की वजह से प्रिंस हैरी टीम के एक अच्छे साथी हैं.

<link type="page"><caption> सेना छोड़ेंगे प्रिंस विलियम</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/09/130912_william_leaves_military_sb.shtml" platform="highweb"/></link>

उन्होंने कहा, "उन्हें इसका अनुभव भी है, वे उत्तरी ध्रुव पर कुछ वक्त गुजार भी चुके हैं. वे जानते हैं कि वह क्या कर रहे हैं. उन्हें सैन्य प्रशिक्षण भी प्राप्त है इसलिए उनके पास अतिरिक्त काबिलियत भी है."

मेजर फिल्प अभी भी ब्रिटेन की सेना से जुड़े हुए हैं. वह कहते हैं, "अच्छा था, रोमांचक था. यह एक बढ़िया ट्रेनिंग थी."

यह दौड़ शुरु होने में दो महीने का वक्त है. मेजर फिल्प कहते हैं कि ट्रेनिंग से उन्हें व्यावहारिक नज़रिया मिला है.

फिल्प कहते हैं, "शुरुआत से ही यह बहुत आसान लग रहा था और जितना ज्यादा वक्त हम लोग साथ गुजारेंगे उतना ही सहज होते जाएंगे."

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