वेतन की जंग में ट्विटर बना 'हथियार'

सऊदी अरब
इमेज कैप्शन, लोगों को शिकायत है कि उनकी मेहनत पर विदेशी मुनाफा कमा रहे हैं.

सऊदी अरब में लोगों ने अपने वेतन बढ़ाने की मांग के लिए सोशल मीडिया पर एक खास अभियान चला रखा है. यह अभियान खाड़ी देशों में काफी लोकप्रिय हो रहा है. ये उन लोगों का अभियान है जो अपनी रोज़मर्रा की ज़रूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

अधिक तनख्वाह की मांग करने वाला यह <link type="page"><caption> अनोखा अभियान</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/06/130610_social_media_ra.shtml" platform="highweb"/></link> पिछले दो महीनों से <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/08/130803_twitter_abuse_sorry_dil.shtml" platform="highweb"/></link> पर जोर-शोर से चल रहा है. इस अभियान के लिए एक खास किस्म का हैशटैग #our_salary_does_not_meet_our_needs बनाया गया है.

जुलाई के पहले दो सप्ताह में ही इस <link type="page"><caption> खास हैशटैग</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2013/06/130613_facebook_hashtag_rd.shtml" platform="highweb"/></link> के साथ 1 करोड़ 70 लाख ट्वीट हुए. किसी भाषा का यह 16वां सबसे लोकप्रिय हैशटैग बन गया है.

हालांकि, इस अनोखे और लोकप्रिय अभियान की आलोचना भी हो रही है. कुछ लोग इसे एक गुमराह अभियान बता रहे हैं तो कुछ देश की समस्या को इस तरह सार्वजनिक किए जाने से नाखुश हैं.

सरकार पर सवाल

शाह अब्दुल्ला से तनख्वाह बढ़ाने की मांग करने वाला यह अभियान न सिर्फ सऊदी अरब में गरीबी की समस्या को उजागर करता है बल्कि यह मुट्ठीभर लोगों के हाथों में धन के केंद्रीकरण पर भी लोगों का ध्यान खींच रहा है.

साल 1970 में सऊदी अरब की आबादी 70 लाख थी जो 2012 में बढ़कर 3 करोड़ हो गई. ऐसे में पढ़े-लिखे उन युवाओं की संख्या बढ़ रही है जिनकी अपेक्षाएं ऊंची हैं.

अभियान चलाने वाले सरकार के 'फिज़ूल खर्चों' से खफा हैं. ट्विटर पर इससे जुड़ा एक कार्टून बहुत चल रहा है. इस कार्टून में दिखाया गया है कि कैसे सऊदी अरब के लोगों के पसीने की कमाई से खड़े खजूर के पेड़ का फल दूसरे देश के लोग खा रहे हैं.

वहीं, कुछ लोग जुलाई में मिस्र में राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी को अपदस्थ किए जाने के बाद मिस्र को आर्थिक मदद देने के सऊदी अरब की घोषणा से भी नाराज हैं.

शाही ज्यादतियां

सऊदी अरब
इमेज कैप्शन, अमरीकी अभिनेत्री जिसके साथ 15 मिनट बिताने के लिए कथित तौर पर 500,000 डॉलर खर्च किए गए.

सऊदी अरब के कई लोग ट्विटर पर चल रहे <link type="page"><caption> इस अभियान</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/04/130415_twitter_music_ra.shtml" platform="highweb"/></link> के जरिए शाही परिवार के कथित जरूरत से खर्चों पर अपनी नाराजगी का इजहार कर रहे हैं.

ट्विटर पर लोगों ने #our_salary_does_not_meet_our_needs हैशटैग के जरिए उस रिपोर्ट के खिलाफ़ ग़ुस्सा जाहिर किया है जिसमें कहा गया है कि किसी शाही व्यक्ति ने अमरीकी अभिनेत्री क्रिस्टन स्टुवर्ट के साथ मात्र 15 मिनट बिताने के लिए 500,000 डॉलर दान किया.

अभियान में शामिल लोग किफायती घरों की कमी और युवाओं की बढ़ती जनसंख्या के मुकाबले कम पड़ते रोजगार के अवसर जैसे मुद्दों पर भी सरकार से नाराज हैं.

<link type="page"><caption> ट्विटर पर</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/03/130307_twitter_follower_vr.shtml" platform="highweb"/></link> लोग 23 सितंबर को सऊदी राष्ट्रीय दिवस के मौके पर अपनी परेशानियों को सार्वजनिक करने के एक अवसर के रुप में देख रहे हैं.

आलोचना

अभियान दल के एक सदस्य कहते हैं, "कौन सा राष्ट्र दिवस. देश कर्ज में डूबा हुआ है. हमारे राजकुमार स्विट्जरलैंड घूम रहे हैं, और हम बिल भर रहे हैं. देश के इन हालात के लिए वे जिम्मेदार हैं जो हमारे पैसे और तेल संपदा से खिलवाड़ कर रहे हैं."

सरकार और व्यवस्था के प्रति पल रहे असंतोष को जाहिर किए जाने वाले इस अभियान की आलोचना भी हो रही है.

कैबिनेट महासचिव अब्दुल रहमान अल-सधन ने ट्विटर अभियान की आलोचना करते हुए कहा, "यह सरकार के <link type="page"><caption> खिलाफ विद्रोह</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2012/11/121106_italy_social_media_arm.shtml" platform="highweb"/></link> है. कुछ लोगों को यह बात खल रही है कि जहां कुछ देशों में अशांति है, सऊदी अरब में शांति और स्थिरता है."

<bold>(बीबीसी मॉनिटरिंग दुनिया भर के टीवी, रेडियो, वेब और प्रिंट माध्यमों में प्रकाशित होने वाली ख़बरों पर रिपोर्टिंग और विश्लेषण करता है. आप बीबीसी मॉनिटरिंग की खबरें <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/bbcmonitoring" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/BBCMonitoring" platform="highweb"/></link> पर भी पढ़ सकते हैं.)</bold>