मिस्र: और प्रदर्शनों की तैयारी, मृतकों की संख्या 525

मिस्र में सत्ता से बदख़ल हुए राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी के समर्थकों के खिलाफ़ बुधवार को हुई गोलीबारी में मारे गए लोगों की आधिकारिक संख्या 525 से अधिक बताई गई है जबकि लगभग 3000 लोग घायल हुए हैं.
मुर्सी के समर्थक कई दिनों से राजधानी काहिरा में जमा थे और विरोध प्रदर्शन कर रहे थे.
एक साल पहले मुर्सी दक्षिणपंथी संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड के समर्थन से ही चुनाव जीते थे. अब इस संगठन ने और प्रदर्शन बुलाने का आह्वान किया है.
इसी बीच अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने मिस्र की अंतरिम सरकार की तरफ़ से उठाए गए कदम की निंदा की है. उन्होंने कहा है कि अमरीका, मिस्र के साथ होने वाले वार्षिक द्विपक्षीय सैन्य कार्यक्रम रद्द कर रहा है.
प्रदर्शनकारी तीन जुलाई को बेदख़ल की गई मुर्सी सरकार को सत्ता में बहाल करने की मांग कर रहे थे.
बुधवार को उन्हें खदेड़ने के लिए हुई कार्रवाई के बाद मिस्र के शहरों में एक महीने के लिए आपातकाल लगा दिया गया.
गुरुवार को काहिरा में तनाव था लेकिन बाद दोपहर काहिरा विश्वविद्यालय से गोलियाँ चलने के आवाज़े सुनी गई हैं. मृतकों में 43 पुलिसकर्मी शामिल हैं.
<link type="page"><caption> तस्वीरों में सैन्य कार्रवाई</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/08/130814_egypt_pic_gallery.shtml" platform="highweb"/></link>
इस कार्रवाई की दुनिया भर में निंदा हुई है. संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ, अमरीका, फ्रांस, डेनमार्क, तुर्की ने जहाँ निंदा की है. उधर संयुक्त अरब अमीरात और बाहरीन ने कहा है कि वे मिस्र की सरकार की क़ानून-व्यवस्था कायम करने की मजबूरी समझते हैं.
'प्रदर्शन जारी रहेंगे'
मिस्र के टीवी चैनलों के मुताबिक़ बुधवार शाम तक रबा अल अदविया मस्जिद के पास के इलाक़े को पूरी तरह ख़ाली करा लिया गया.

मुस्लिम ब्रदरहुड के कई नेताओं को गिरफ़्तार किया गया जबकि कैंप से <link type="page"><caption> प्रदर्शनकारियों</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/08/130812_egypt_morsi_protest_ap.shtml" platform="highweb"/></link> को तितर-बितर कर दिया गया है.
इस हिंसा के बाद उपराष्ट्रपति मोहम्मद अल बारादेई ने अंतरिम सरकार से इस्तीफ़ा देने की घोषणा कर दी और कहा कि वे ख़ून की एक भी बूँद के बहने की जि़म्मेदारी नहीं ले सकते.
बीबीसी के मध्यपूर्व संपादक जेरेमी बोवन का कहना है, "संभावना ये है कि मुस्लिम ब्रदरहुड अपने प्रदर्शनों पर कायम रहेगा. उन्होंने 80 साल तक मिस्र में सत्ता में आने का इंतज़ार किया है. उनका मानना है कि उन्हें सत्ता से हटाना अन्यायपूर्ण है."
काहिरा शहर में मौजूद बीबीसी के खालेद एज़लाराब का कहना है, "गुरुवार सुबह सैकड़ों लोग एमान मस्जिद पर जमा हुए. इनमें से अधिकतर लोग मृतकों के रिश्तेदार थे. मस्जिद में दर्जनों शव सफ़ेद चादरों में लिपटे पड़े हैं. मैंने 70 शवों की गिनती की पर तब रुक गया जब मैंने देखा की ये संख्या वहाँ रखे गए शवों में से आधी है."

खालेद के मुताबिक रिश्तेदार खासे परेशान और उत्तेजित थे क्योंकि वे ये जानना चाहते थे कि शवों को उचित काग़ज़ात लेकर दफ़न कैसे करें. परिवारों का कहना है कि अस्पतालों ने दस्तावेज़ों में मौत के असल कारण बताने से इनकार कर दिया है.
बीबीसी संवाददाता का कहना था कि जब वे मस्जिद के बाहर ही मौजूद थे तब उन्होंने एक सैन्य वाहन को गुजरते देखे जिससे हवा में गोलियाँ चलाई जा रही थीं.
मिस्र के अंतरिम प्रधानमंत्री हाज़ेम बेबलावी ने सैन्य कार्रवाई का बचाव ये कहते हुए किया था कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रदर्शनकारियों को हटाना जरूरी था. बेबलावी ने कहा था कि अपदस्थ राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी के समर्थकों को तितर-बितर करने का फ़ैसला आसान नहीं था.
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