यमन में अल क़ायदा की बड़ी 'साज़िश नाकाम'

यमन का कहना है कि उसने गैस पाइपलाइनों को उड़ाने और देश के मुख्य बंदरगाहों पर क़ब्ज़ा करने की अल क़ायदा की साज़िश को नाकाम कर दिया है
देश में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और मुख्य इमारतों की सुरक्षा में बख़्तरबंद गाड़ियाँ लगाई गई हैं.
चरमपंथी हमलों की आशंका के मद्देनजर अमरीका और ब्रिटेन ने यमन से अपने राजनयिकों और दूतावास कर्मचारियों को वापस बुला लिया है.
वॉशिंगटन में मौजूद बीबीसी संवाददाता डेविड विलिस के मुताबिक़ ऐसा प्रतीत हो रहा है कि अल क़ायदा की एक बड़ा हमला करने की साज़िश के केंद्र में यमन ही था और अगर यह साज़िश कामयाब हो जाती तो यमन के बुनियादी ढांचे के मुख्य हिस्सों पर अल कायदा का कब्ज़ा हो जाता.
यमन की सरकार के प्रवक्ता राजेह बादी के मुताबिक देश की पाइपलाइनों को उड़ाकर कुछ शहरों पर कब्ज़ा करने की साज़िश रची गई थी.
उनके अनुसार साज़िश के तहत दो बड़े बंदरगाहों पर भी हमले किए जाते. यमन के तेल निर्यात का अधिकतर हिस्सा इनमें से एक बंदरगाह के ज़रिए ही होता है. यहाँ बड़ी संख्या में विदेशी कर्मचारी भी तैनात हैं.
<link type="page"><caption> कई देशों के दूतावास बंद</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/08/130804_embassy_closed_rd.shtml" platform="highweb"/></link>
बड़ी साज़िश

बादी ने कहा, "मुकाला और बावज़ीर जैसे मुख्य शहरों पर कब्ज़ा करने और शेबवा शहर में गैस पाइपलाइन पर अल क़ायदा ने समन्वित हमला करने की साज़िश रची थी."
उन्होंने बताया कि साज़िश के तहत अल कायदा के सदस्य सैनिक पोशाक में बंदरगाहों के बाहर तैनात किए जाते और इशारा मिलने पर वे हमला करके कब्ज़ा कर लेते.
समाचार एजेंसी एपी ने यमन के सरकारी अधिकारियों के हवाले से कहा है कि हमलों का उद्देश्य ड्रोन हमलों में मारे गए अल क़ायदा के शीर्ष कमांडर सैद-अल-शिहरी की मौत का बदला लेना था. सैद नवंबर में ड्रोन हमले में घायल हुए थे और बाद में उन्होंने दम तोड़ दिया था.
यमन की राजधानी सना में मौजूद बीबीसी संवाददाता अब्दुल्ला ग़ोराब के मुताबिक शहर में सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व रूप से बढ़ा दी गई है और सैंकड़ों की तादाद में बख़्तरबंद गाड़ियाँ सड़कों पर तैनात की गई हैं.
सैनिक और टैंकों ने विदेशी दूतावासों, सरकारी इमारतों और एयरपोर्टों को घेर रखा है और शीर्ष सरकारी अधिकारियों से अपनी आवाजाही को सीमित करने को कहा गया है.
बीते रविवार को उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व में अपने 20 दूतावासों को बंद करने वाले अमरीका और ब्रिटेन ने यमन से अपने राजनयिक कर्मचारियों को वापस बुला लिया है और अपने <link type="page"><caption> नागरिकों को यमन छोड़ने की हिदायत</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/08/130806_yemen_us_aa.shtml" platform="highweb"/></link> दी है.

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अल क़ायदा के शीर्ष कमांडर अयमान अल ज़वाहिरी और एक अन्य कमांडर के बीच बातचीत को पकड़े जाने के बाद ही अमरीका ने अपने दूतावास और वाणिज्यिक दूतावास बंद किए हैं.
साज़िश की बातचीत
'न्यूयॉर्क टाइम्स' के मुताबिक़ अमरीका ने ज़वाहिरी और यमन में अल क़ायदा के मुखिया नासिर-अल-वुहायशी के बीच <link type="page"><caption> संवाद को पकड़ा</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/08/130806_al_qaeda_us_ap.shtml" platform="highweb"/></link> है. अखबार के मुताबिक़ दोनों के बीच बातचीत से 9/11 हमले के बाद से अब तक की 'सबसे बड़ी साज़िश' के बारे में पता चला.
यमन सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अल क़ायदा की प्रतिक्रिया का डर है और 'हम उनके डर को समझते हैं.'
लेकिन यमन के विदेश मंत्रालय ने दूतावासों के खाली कराए जाने की आलोचना करते हुए कहा है कि इससे तो चरमपंथियों का ही उद्देश्य पूरा होगा.

बीबीसी को सूत्रों के हवाले से पता चला है कि अमरीका अपने विशेष सैन्य दस्ते यमन भेजकर अल क़ायदा के ठिकानों पर हमलों की तैयारी कर रहा है.
हालाँकि अमरीका पहले भी आतंकवाद विरोधी इकाइयों को प्रशिक्षित करने के लिए विशेष सैन्य दस्ते यमन भेज चुका है लेकिन सूत्रों के मुताबिक़ अब ऐसा लग रहा है कि संयुक्त विशेष अभियान कमान (जेएसओसी) हमले करने के लिए दस्ते तैयार कर रहा है.
जेएसओसी अमरीकी खुफिया एजेंसी सीआईए के सहयोग से काम करता है. पिछले दस दिन में सीआईए यमन में चार ड्रोन हमले कर चुकी है.
यमन अरब प्रायद्वीप में अल कायदा (एक्यूएपी) का अड्डा है. अमरकी गृह विभाग और व्हाइट हाऊस ने कहा है कि मौजूदा धमकी एक्यूएपी की ओर से ही आई है. हालाँकि दोनों ने ही इस बारे में अधिक जानकारी नहीं दी है.
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