फ़ेसबुक पर अपनी तस्वीरों के लिए कैसी दीवानगी!

सोशल मीडिया
इमेज कैप्शन, ख्यातिप्राप्त सेल्फीज में केली ब्रूक, जस्टिन बेइबर और रिहाना जैसे नाम प्रमुख हैं.

<link type="page"><caption> सोशल मीडिया</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/05/130530_social_media_office_tb.shtml" platform="highweb"/></link> पर आजकल खुद की ली हुई या ‘सेल्फ़ी’ तस्वीर साझा करने की होड़ सी मची हुई है.

इसकी पड़ताल कर रही हैं करिसा कूल्टहार्ड.

खुद की तस्वीर लेने के लिए सामने के हिस्से में कैमरे वाला स्मार्टफ़ोन क्रांतिकारी क़दम था.

एक हाथ की दूरी से फ़ोटो लेने वाला कैमरा हमें बेपरवाह होकर कहीं भी फोटो लेने के लिए प्रेरित करता है.

इन तस्वीरों को हज़ारों लोगों के साथ साझा किया जा सकता है.

फोटो साझा करने वाले ऐप इंस्टाग्राम में आपको हैशटैग #सेल्फ़ी के साथ दो करोड़ 30 लाख फ़ोटो और #मी वाले पांच करोड़ से ज़्यादा तस्वीरें मिल जाएंगी.

काफी लोकप्रिय

अपनी ख़ुद की तस्वीरें अपलोड करने वालों में रिहाना, जस्टिन बेईबर, लेडी गागा और मैडोना के नाम शामिल हैं.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के दूसरे कार्यकाल के शपथ ग्रहण समारोह में उनके बच्चों को मोबाइल फ़ोन से फ़ोटो खींचते हुए देखा गया था.

अंतरिक्ष यात्री स्टीव रॉबिंसन ने भी अंतरीक्ष यान डिस्कवरी की मरम्मत करते हुए अपनी तस्वीर ली थी.

पिछले छह महीनों में 'सेल्फ़ी' शब्द का इतना इस्तेमाल हुआ है कि अब इसे ऑक्सफ़ोर्ड की ऑनलाइन डिक्शनरी में शामिल करने पर विचार किया जा रहा है.

सोशल मीडिया
इमेज कैप्शन, अपने नए लुक के साथ करिसा कूल्टहर्ड की तस्वीर

पहली सेल्फ़ी

माना जाता है कि इस तरह का पहला फ़ोटोग्राफ शुरुआती कैमरामैन रॉबर्ट कॉरनेलियस ने 1839 में लिया था.

लेकिन इसे सेल्फ़ी माना जाए या नहीं इस पर बहस की गुंजाइश है.

इतिहासकार और रॉयल फ़ोटोग्राफिक सोसाइटी के निदेशक माइकल प्रिट्चर्ड कहते हैं, "हो सकता है कि ऐसी वास्तविक तस्वीर लेने के लिए उनका कोई दोस्त या सहायक रहा होगा. यह बहुत हद तक संभव है कि पहली सेल्फ़ी इसके बाद ली गई हो. सेल्फ टाइमर्स वाले शटर 1880 के दशक में आए. इससे तस्वीर लेने में पांच से दस सेकेंड तक का समय लगता था जिससे तस्वीर खींचने वाले को फ्रेम में आने का मौका मिल जाता था."

वैसे खुद की तस्वीरें साझा करने का चलन भी इंटरनेट से पुराना है. 1860 के दशक में क्याख्त दे विज़ित या छोटे-छोटे चित्रों वाले कार्डों का चलन बहुत तेज़ी से बढ़ा था. इसी दौरान फोटो बूथ भी बहुत लोकप्रिय हुए.

इसके बाद आया पोलारॉयड कैमरा. हालांकि पहला पोलारॉयड कैमरा बाज़ार में 1948 में आ गया था लेकिन इसे लोकप्रियता सत्तर के दशक में मिली.

प्रोफ़ेसर माइकल प्रिट्चर्ड कहते हैं, "पोलारॉयड कैमरे की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि इसमें फ़ोटो लेने के लिए फ़िल्म की जरूरत नहीं थी. इससे लोग शौकिया भी फ़ोटो ले सकते थे. इसकी फ़िल्म विकसित करने के लिए किसी डार्करूम की भी जरूरत नहीं थी."

कहानी कहने का एक तरीका

तकनीकी विकास से ये फायदा हुआ कि लोगों की फोटो कम समय में, चाहे जैसे पोज़ में खींची जा सकती थीं.

इंस्टाग्राम का उपयोग करने वाले 22 साल की ऐमिली कुक का मानना है कि यह सोशल नेटवर्किंग साइट पर कहानी कहने का एक तरीका है. वे कहती हैं, "आपको ये बताने की ज़रूरत नहीं है कि आप काम पर जा रहे हैं. यूनिफार्म में आपकी एक फ़ोटो ही यह काम कर देगी."

प्यू शोध केंद्र के हालिया नतीज़ों के मुताबिक़ अमरीकी किशोर सोशल मीडिया पर अपने बारे में पहले की अपेक्षा अधिक जानकारी साझा करते हैं. 2006 में ऐसे 79 फ़ीसदी किशोर करते थे तो अब 91 फ़ीसदी युवा ऐसा कर रहे हैं.

साशा और मालिया ओबामा
इमेज कैप्शन, अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के दूसरे कार्यकाल के शपथ ग्रहण के मौके पर उनकी बेटियों ने भी सेल्फ़ी खींची थी.

ख़तरे

लेकिन सेल्फ़ी के चलन की आलोचना भी हो रही है.

बहुत से लोग सेल्फ़ी को 'सेक्सिटिंग' यानी टेक्सट संदेश के ज़रिए सेक्स संबंधों से जुड़ी तस्वीरें भेजने का ज़रिया मानते हैं. ये तस्वीरें ज़्यादातर खुद ही खींची जाती हैं. स्कूलों में सेक्सटिंग की समस्या बढ़ रही है.

हालांकि ज़्यादातर सेल्फ़ी तस्वीरों में लोग कपड़े पहने होते हैं लेकिन फिर भी इससे वे मुश्किल में फंस सकते हैं.

बॉस्टन में मीडिया साइकॉलॉजी रिसर्च सेंटर की निदेशक डॉक्टर पामेला रुटलेज कहती हैं, "जो लोग अपनी ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए अपनी उत्तेजक तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालते हैं, वो कई बार ऐसी मुश्किल में फंस जाते हैं जिससे बाहर निकलना उनके लिए मुश्किल हो जाता है."

अपनी तस्वीरें लेने वाली ऐमिली भी कहती हैं उनकी पीढ़ी को हमेशा ही इंटरनेट के ख़तरों के बारे में आगाह किया जाता रहा है और इसलिए वे बहुत एहतियात बरतती हैं.

ऐमिली कहती हैं, "मैं जानती हूं कौन लोग मेरी तस्वीरें देखते हैं और अगर उनमें से कोई मुझे असहज महसूस करवाता है या मुझे उल्टे-सीधे संदेश मिलते हैं, तो मैं उन्हें ब्लॉक कर देती हूं."

लेकिन ऐमिली ये भी कहती हैं, "अंतत: ये मेरा चेहरा और शरीर है. अगर मैं अपनी तस्वीरें इंटरनेट पर डालना चाहती हूं और वो ग़लत हाथों में पड़ जाती हैं तो इसके लिए ज़िम्मेदारी भी मुझे ही लेनी पड़ेगी. मैं सोशल मी़डिया पर ऐसा कुछ नहीं पोस्ट नहीं करूंगी जो प्रिंट नहीं होना चाहिए या फिर मैं अपनी मां को न भेज सकूं."

आलोचना

सेल्फ़ी की ज़्यादा आलोचना उससे जुड़े ख़तरों की वजह से नहीं बल्कि आत्ममुग्धता की वजह से है. ये सोचना कितना सही है कि आपके दोस्तों को आपकी तस्वीरों में दिलचस्पी होगी.

डॉक्टर पामेला रुटलेज कहती हैं कि आलोचक तो हमेशा ही रहेंगे. वे कहती हैं, "पारंपरिक रुप से लोगों और ख़ासकर महिलाओं से उम्मीद नहीं की जाती कि वो अपने बारे में बात करें या डींगे हांके."

लेकिन ये नज़रिया इस बात पर निर्भर करता है कि हम इंटरनेट पर निजी जानकारी साझा करने के बारे में क्या सोचते हैं. हो सकता है कि इंटरनेट पर निजी जानकारी और तस्वीरों का साझा करने का बढ़ता चलन से 'सामान्य' की परिभाषा भी बदल गई है.

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