अदालतों पर पूरा भरोसा है: मुशर्रफ़

कई साल विदेश में बिताने के बाद पाकिस्तान वारस लौटे पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ का कहना है कि उन्हें देश की न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है और उन्हें उम्मीद है कि उनके चुनाव लड़ने के अधिकार को नहीं छीना जाएगा.
पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने परवेज़ मुशर्रफ़ को <link type="page"><caption> देशद्रोह के आरोपों</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/04/130408_musharraf_sc_akd.shtml" platform="highweb"/></link> का सामना करने के लिए जजों के सामने पेश होने का आदेश दिया है और उनके अदालत ने उनके पाकिस्तान छोड़कर जाने पर रोक लगा रखी है.
बीबीसी उर्दू के साथ एक विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्हें पाकिस्तान की अदालतों से पूरी उम्मीद है और अदालत से उम्मीद नहीं करेंगे तो किससे करेंगे.
इस्लामाबाद और कराची से उनके <link type="page"><caption> नामांकन पत्र रद्द</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/04/130407_pakisan_musharraf_election.shtml" platform="highweb"/></link> किए जाने संबंधी सवाल के जवाब में उनका कहना था, “संविधान के हिसाब से तो मेरे ऊपर ऐसा कोई भी मामला नहीं बनता कि मेरा नामांकन रद्द किया जाए, फिर भी हुआ है. तो उसे मैंने चुनौती दी है क्योंकि चुनाव लड़ना सबका हक़ है, मेरा भी हक़ है.”
उन्होंने कहा, “जहां से मेरे नामांकन रद्द हुए हैं उन्हें मैं चुनौती दूंगा. वहां मैं जाऊंगा भी. तमाम मीडिया के ज़रिए मैं अपनी बात लोगों के सामने रखूंगा.”
'अदालत में जाना तौहीन'
कराची की अदालत में उपस्थित होने पर मुशर्रफ ने इसे अपनी तौहीन कहा था, इस बारे में पूछे गए सवाल पर उनका कहना था, “जहां तक कराची में अदालत में जाने पर तौहीनी वाली बात है, तो मुझे बाद में इस ग़लती का एहसास हुआ. क्योंकि मैं खुद अक्सर कहता रहा हूं कि क़ानून के आगे सभी बराबर हैं. तो ये मुझ पर भी लागू होता है. दूसरे मैंने ये भी महसूस किया कि मैं किसी इंसान के सामने नहीं बल्कि एक संस्था के सामने गया हूं.”
ये पूछे जाने पर कि अदालत ने उनके पाकिस्तान से बाहर जाने पर पाबंदी लगा दी है, तो क्या ये उन्हें स्वीकार है, उन्होंने कहा, “यहां चुनाव लड़ने और रहने के लिए आया हूं, इसलिए यदि मुझे बाहर जाने से मना करने की बात है तो इसमें मुझे कोई आपत्ति नहीं है.”
ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सैन्य शासक जनरल <link type="page"><caption> परवेज़ मुशर्रफ़ को जजों के सामने पेश </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/04/130408_musharraf_sc_akd.shtml" platform="highweb"/></link>होने का आदेश दिया है. इस पेशी के दौरान परवेज़ मुशर्रफ़ अपने कार्यकाल में लगे देशद्रोह के आरोपों का सामना करेंगे.
वकीलों ने अदालत में मांग की है कि जनरल मुशर्रफ़ पर अपने शासन काल के दौरान आपातकाल लागू करने और 2007 में वरिष्ठ जजों को बर्खास्त करने का मुक़द्दमा चलाया जाना चाहिए.
जजों की बर्खास्तगी के मामले पर परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा, "उस वक्त मैं लोकतांत्रिक व्यवस्था को लागू करने की कोशिश कर रहा था और उस कोशिश में कुछ कड़ी कार्रवाइयां करनी पड़ीं, जो मैंने कीं.जजों की बर्ख़ास्तगी का मामला उस वक्त की जरूरत थी, इसलिए ऐसा करना सही था.
जनरल मुशर्रफ़ को 2008 में सत्ता से हटा दिया गया था जिसके बाद वो विदेश चले गए थे. लेकिन मई में होनेवाले आम चुनाव में शिरकत करने के लिए वो पाकिस्तान लौटे हैं.












